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Kanpur: ठंड में पानी पी रहे कम, दिमाग-दिल का फूल रहा दम, खून का थक्का बनने का खतरा

Mon, 06 Jan 2025 02:00 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Mon, 06 Jan 2025 02:00 PM IST
सार

Kanpur News: ठंड में कम पानी पीने और यूरीन अधिक करने से खून गाढ़ा हो रहा। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। 2 लीटर पानी पीना जरूरी है।

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Kanpur: People are drinking less water in winter, their brain and heart are getting exhausted
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

जाड़े में पानी कम पीने और बार-बार यूरीन करने से शरीर का जल संतुलन बिगड़ रहा है। इससे खून गाढ़ा होने लगता है और ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। दिल पर दबाव पड़ता है और खून का थक्का बनने का खतरा रहता है। कार्डियोलॉजी, हैलट और दूसरे अस्पतालों में आ रहे रोगियों के ब्योरे से यह पता चला है। शरीर में पानी कम होने के दुष्प्रभाव से हार्ट अटैक और ब्रेन अटैक के साथ गुर्दों के खराब होने का खतरा है।
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शनिवार को कार्डियोलॉजी में 761 लोग जांच के लिए पहुंचे। 48 रोगियों ने इमरजेंसी में जांच कराई और हार्ट अटैक के लक्षण होने पर 28 रोगियों को भर्ती किया गया। ओपीडी में आए बहुत से लोगों ने दिन में तीन गिलास ही पानी पीया था। इसी तरह से हैलट ओपीडी में 50 रोगियों का बीपी बढ़ा निकला। दोपहर तक रोगियों ने औसत ढाई गिलास पानी पीया था। सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अवधेश कुमार शर्मा ने बताया कि व्यक्ति जाड़े में यूरीन तो कई बार जाता है और पानी कम पीता है। डिहाइड्रेशन होने से शरीर तनाव में आ जाता है। प्लाज्मा कम होता है और खून गाढ़ा हो जाता है। डॉ. शर्मा ने बताया कि शरीर में पानी की कमी होने पर शरीर का सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम एक्टिव हो जाता है। इससे धड़कन बढ़ती है और हृदय पर दबाव पड़ने लगता है। खून गाढ़ा होता है जिससे थक्का बनने प्रवृत्ति विकसित हो जाती है। जाड़े में डेढ़ से दो लीटर से कम पानी न पीएं।
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जल संतुलन के लिए छह से आठ गिलास पानी पीएं
वरिष्ठ गुर्दा रोग विशेषज्ञ डॉ. डीके सिन्हा ने बताया कि जाड़े में भी शरीर से आधा लीटर पानी वाष्पीकृत होता है। जल संतुलन के लिए छह से आठ गिलास पानी पीएं। खून गाढ़ा होने से बीपी, हार्ट अटैक, ब्रेन अटैक के खतरे के साथ ही गुर्दों को ब्लड सप्लाई कम होती है। इससे गुर्दों में भी खराबी आ जाती है।
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