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...हे भगवान, दानदाताओं को ये क्या हो गया

Thu, 15 Dec 2016 12:51 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Thu, 15 Dec 2016 12:51 AM IST
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kanpur panki hanuman temple
भंडारे में दान-दक्षिणा कम हुआ
दिल खोलकर दान करने वाले लोग न जाने कहां चले गए हैं। 1000 और 500 के पुराने नोटों की बंदी से दानदाताओं को न जाने क्या हो गया है। मंदिरों में चढ़ावे की रकम में गिरावट अब चिंता का विषय बन चुकी है। नोट बंदी का जबरदस्त असर कानपुर के पनकी हनुमान मंदिर भंडारे में देखने को मिला। अमूमन भंडारा संपन्न होने के बाद जहां मंदिर समिति को 2 से 3 लाख रुपये की बचत होती थी। वहीं मंदिर समिति पर अब डेढ़ लाख रुपये की उधारी हो गई है। जो प्रत्येक सप्ताह (बुधवार) में खुलने वाले दानपात्र से आने वाली रकम से चुकाई जाएगी।
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पनकी मंदिर में हर साल आगहन मास में सीता राम के विवाह पर श्रीरामकथा और रासलीला का आयोजन किया जाता है। इस बार 4 से 12 दिसंबर तक आयोजन हुआ। इसके बाद 13 दिसंबर को भंडारा आयोजित हुआ। भंडारे में करीब 50 हजार भक्त पहुंचे पर दान नाम मात्र का आया। जिसके चलते मंदिर समिति परेशान है। उनका कहना है कि नोट बंदी का असर अब दिखने लगा है। भंडारे में करीब 20 कुंतल की बूंदी, 30 कुंतल की पूरी, 30 कुंतल सब्जी लगा था। इसमें इसमें 4 लाख रुपये लगे थे। मंदिर के महंत जितेंद्रदास का कहना है कि जो भक्त प्रसाद खाने के बाद 100 या 500 रुपये दे जाते थे वह बामुश्किल 50 या 100 रुपये तक दे गए। जबकि बड़े दानदाता नोट बंदी के कारण प्रसाद ग्रहण करने भी नहीं आए। पिछले साल दानदाताओं से इतना मिला था कि भंडारे का खर्च भी निकल आया था और 2 से 3 लाख रुपये भी बच गए थे। पर इस बार तो डेढ़ लाख रुपये की उधारी हो गई है।
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