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Kanpur: बुखार का प्रकोप बढ़ता जा रहा, फेफड़ों और गुर्दों पर असर डाल रहा वायरल फीवर
Mon, 08 Sep 2025 11:04 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 08 Sep 2025 11:04 AM IST
सार
Kanpur News: वायरल के बाद निमोनिया होने से पहले फेफड़ों और फिर गुर्दों में दिक्कत आ रही।
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वायरल बुखार
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कानपुर में वायरल बुखार तेजी से फैल रहा है। हर रोज हैलट के अलावा अन्य सरकारी अस्पतालों में 500 रोगी वायरल बुखार के आ रहे हैं। कई गंभीर अवस्था में भर्ती हो रहे हैं। वायरल से निमोनिया और गुर्दे पर भी असर पड़ रहा है। ऐसे रोगी रोजाना ओपीडी में आ रहे हैं जो काफी दिनों से वायरल और उसके बाद निमोनिया की जद में थे।
हैलट के नेफ्रोलॉजी विभाग के डॉ. युवराज गुलाटी ने बताया कि हाल के दिनों में हमारे पास ऐसे कई रोगी आए हैं जिन्हें वायरल या निमोनिया के बाद किडनी संबंधी समस्याएं हुई हैं। वायरल रोगियों के फेफड़ों और गुर्दे पर असर हो रहा है। वायरल के साथ निमोनिया होने से फेफड़ों पर असर आ रहा है। इससे रोगी सेप्सिस में जा रहे हैं। सेप्सिस पूरे शरीर में फैलने का असर गुर्दों पर भी पड़ रहा है। ये वो रोगी हैं जो पहले कभी गुर्दे की बीमारी से पीड़ित नहीं थे। हैलट की ओपीडी में रोज 200 रोगी आते हैं, इनमें 40 रोगी सेप्सिस का शिकार हैं।
इसके अलावा जो पहले से गुर्दा संबंधी दिक्कतों से जूझ रहे हैं उनमें निमोनिया होने से गुर्दों की दिक्कत इतनी बढ़ जा रही है कि डायलिसिस की नौबत आ रही है। हैलट के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. एसके गौतम ने बताया कि मौसम बदलने की वजह से डायरिया और वायरल फीवर के रोगी तेजी से बढ़े हैं। अगर किसी को वायरल है तो बाहर का खाना न खाएं। बुखार या खांसी-जुकाम को नजरअंदाज न करें। बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा न लें। पेशाब कम हो रही और पैरों में सूजन है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
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हैलट के नेफ्रोलॉजी विभाग के डॉ. युवराज गुलाटी ने बताया कि हाल के दिनों में हमारे पास ऐसे कई रोगी आए हैं जिन्हें वायरल या निमोनिया के बाद किडनी संबंधी समस्याएं हुई हैं। वायरल रोगियों के फेफड़ों और गुर्दे पर असर हो रहा है। वायरल के साथ निमोनिया होने से फेफड़ों पर असर आ रहा है। इससे रोगी सेप्सिस में जा रहे हैं। सेप्सिस पूरे शरीर में फैलने का असर गुर्दों पर भी पड़ रहा है। ये वो रोगी हैं जो पहले कभी गुर्दे की बीमारी से पीड़ित नहीं थे। हैलट की ओपीडी में रोज 200 रोगी आते हैं, इनमें 40 रोगी सेप्सिस का शिकार हैं।
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इसके अलावा जो पहले से गुर्दा संबंधी दिक्कतों से जूझ रहे हैं उनमें निमोनिया होने से गुर्दों की दिक्कत इतनी बढ़ जा रही है कि डायलिसिस की नौबत आ रही है। हैलट के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. एसके गौतम ने बताया कि मौसम बदलने की वजह से डायरिया और वायरल फीवर के रोगी तेजी से बढ़े हैं। अगर किसी को वायरल है तो बाहर का खाना न खाएं। बुखार या खांसी-जुकाम को नजरअंदाज न करें। बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा न लें। पेशाब कम हो रही और पैरों में सूजन है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
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