फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Kanpur: Number of young patients increased in OPD of Psychiatry Department

Kanpur: कम और बेवक्त सो रहे, युवाओं में बढ़ा तनाव, मनोरोग विभाग की ओपीडी में युवा रोगियों की संख्या बढ़ी

Wed, 21 Sep 2022 09:48 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Wed, 21 Sep 2022 09:48 AM IST
विज्ञापन
Kanpur: Number of young patients increased in OPD of Psychiatry Department
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
युवाओं में सोने की अवधि कम हो गई है। बदले हालात में ‘जवानी नींद भर सोया’ वाली बात नहीं रह गई है। नींद पूरी न होने से रोगियों में दूसरी बीमारियां पैदा हो रही हैं। बदली लाइफ स्टाइल और काम के स्ट्रेस की वजह से लोग कम सोने के साथ ही बेवक्त सो रहे हैं।
विज्ञापन


बड़े पैमाने पर आए इस बदलाव के लिए नई श्रेणी बनाई गई है। इसे ‘न्यू नॉर्मल’ कहा जा रहा है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग की ओपीडी में प्रतिदिन औसत डेढ़ सौ से दो सौ रोगी आते हैं। इनमें 90 फीसदी को कम सोने की परेशानी होती है। इन रोगियों में 20 से 40 वर्ष आयु के अधिक हैं।
विज्ञापन


इंडियन साइकेट्रिक सोसाइटी के सेंट्रल जोन के महासचिव डॉ. गणेश शंकर का कहना है कि स्ट्रेस और डिप्रेशन आम आदमियों में अधिक बढ़ा है। यह नींद को प्रभावित करता है। मनोरोग विभाग की ओपीडी में आने वाले युवा रोगियों में डिप्रेशन के रोगी अधिक हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

चक्कर आना, पैर की पिंडलियों में ऐंठन, पैर और हाथ के पंजों में झनझनाहट, झटके लगना आदि लक्षण हैं। इनकी हिस्ट्री से पता चला है कि अधिकतर स्ट्रेस का शिकार हैं। इससे उनके अंदर सिगरेट और तंबाकू की लत बढ़ी है। कुछ रोगी रात में एक घंटे ही सो पा रहे हैं।

इनमें आर्थिक रूप से कमजोर तबके के लोग भी शामिल हैं। पुरुषों में यह दिक्कत अधिक है। महिलाओं में अधेड़ आयु वर्ग की रोगियों को यह दिक्कत है। डॉ. गणेश शंकर का कहना है कि देर से सोने को न्यू नॉर्मल श्रेणी में शामिल किया गया।

मोबाइल और लैपटॉप ने बदली आदत
मोबाइल फोन और लैपटॉप पर देर रात तक चैटिंग करने की आदत ने नींद की अवधि प्रभावित की है। मनोरोग विभागाध्यक्ष डॉ. धनंजय चौधरी का कहना है कि अब रात 12 बजे तक जागना असामान्य नहीं माना जाता है। लोगों को सुबह काम से उठना पड़ता है जिससे नींद पूरी नहीं हो पाती। बाद में यही स्थिति दिक्कत पैदा करती है।

नियमित योग और व्यायाम करें
- सोच सकारात्मक रखें, अधिक स्ट्रेस न लें।
- सोने के पहले उलझन वाली बातें न सोचें।
- रात में जल्दी सादा और पौष्टिक भोजन कर लें।
- हल्के रंग की बेड शीट और कपड़े पहनें।

प्रतिदिन ओपीडी में आते हैं डेढ़ सौ रोगी 
- 60 फीसदी रोगी डिप्रेशन 
- 25 फीसदी रोगी एंजाइटी के
- 10 फीसदी रोगी मेनिया के
- पांच फीसदी रोगी सीजोफ्रेनिया और फोबिया के
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed