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कानपुर में छल-प्रपंच : लापरवाही की जमीन पर साउथ का अलग प्रशासन
Sat, 21 Aug 2021 03:29 AM IST
दुष्यंत शर्मा
मनोज चौरसिया, कानपुर
मनोज चौरसिया, कानपुर
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 21 Aug 2021 03:29 AM IST
सार
- 26 मार्च को केडीए बोर्ड की हरी झंडी के बाद नहीं हुआ कोई काम
- नगर निगम अफसरों ने अटकाई जमीन के मालिकाना हक की रिपोर्ट
- बीएन भल्ला अस्पताल परिसर में बनना है साउथ का प्रशासनिक भवन
- साउथ की 25 लाख की आबादी को तीन साल से छल रहे अफसर
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केडीए, कानपुर
विस्तार
साउथ सिटी का प्रशासनिक भवन तीन साल से कागजों में ही बन रहा है। बीएन भल्ला अस्पताल परिसर में इस भवन के निर्माण के प्रस्ताव पर केडीए बोर्ड की मुहर लगने के बाद अभी यही नहीं तय हो पाया है कि जमीन पर मालिकाना हक किसका है। बोर्ड के फैसले के अनुसार इस भवन के निर्माण का 50 फीसदी खर्च केडीए और निर्माण लागत नगर निगम देगा। जमीन की रिपोर्ट देने में नगर निगम अफसरों की लापरवाही से साउथ की करीब 25 लाख की आबादी सामान्य कार्यों के लिए भी शहर क्षेत्र स्थित विभागों के चक्कर लगाने को मजबूर है। इसी तरह बोर्ड में होने वाले ज्यादातर फैसलों पर केडीए कोई खास काम नहीं कर पाया।
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तीन साल पहले तत्कालीन मंडलायुक्त इफ्तिखारुद्दीन और तत्कालीन नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने साउथ सिटी में प्रशासनिक भवन बनाने की कवायद की थी। इस भवन में एडीएम (साउथ), एसपी साउथ (अब डीसीपी साउथ), नगर निगम, केडीए आदि विभागों के दफ्तर बनाने का फैसला लिया गया था। उस समय गोविंदनगर स्थित जागेश्वर अस्पताल परिसर को चिह्नित किया गया था, पर यह जमीन अस्पताल के लिए ही दान में मिलने संबंधी शर्त के चलते प्रशासनिक भवन नहीं बन पाया।
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इसके बाद अधिकारियों ने प्रशासनिक भवन के लिए बाबूपुरवा थाने के बगल में बंद पड़े बीएन भल्ला अस्पताल परिसर को चुना। वहां करीब 20 हजार वर्गमीटर जमीन है, पर दोनों अफसरों के तबादले के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया था। मौजूदा मंडलायुक्त डॉ. राजशेखर की अध्यक्षता में 26 मार्च को हुई केडीए की बोर्ड बैठक में तय हुआ कि बीएन भल्ला अस्पताल में बनने वाले प्रशासनिक भवन के निर्माण का 50-50 प्रतिशत खर्च नगर निगम और केडीए उठाएंगे।
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पांच माह में वहीं खड़े, जहां थे
26 मार्च को केडीए बोर्ड में मुहर लगने के बाद नगर निगम जोन तीन के अधिशासी अभियंता पुनीत ओझा ने संपत्ति विभाग से बीएन भल्ला अस्पताल की जमीन के स्वामित्व संबंधी जानकारी मांगी। अधिशासी अभियंता ने बताया कि संपत्ति विभाग ने अभी तक यह नहीं बताया है कि जमीन नगर निगम को कैसे मिली थी? जमीन मिलते समय कुछ शर्तें तो नहीं थीं? वहां कितनी जमीन खाली है, जिसमें प्रशासनिक भवन बन सकता है? प्रशासनिक भवन निर्माण के लिए संपत्ति विभाग ने एनओसी भी नहीं दी।
बकौल अधिशासी अभियंता, यह भी तय नहीं है कि वहां किन-किन विभागों के किस-किस श्रेणी के अधिकारियों, कर्मचारियों के लिए कार्यालय बनने हैं? उनकी जरूरत किस तरह के दफ्तरों की है? उनके लिए कितनी जमीन की जरूरत पड़ेगी? पुनीत ओझा के अनुसार, संपत्ति विभाग से एनओसी मिलने और प्रशासनिक भवन के विभागों आदि का फैसला होने के बाद कंसलटेंट से डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कराई जाएगी। उसके बाद बजट की मंजूरी, फिर टेंडर कराकर निर्माण शुरू कराया जा सकेगा।
साउथ में प्रशासनिक भवन बनेगा। तत्कालीन नगर आयुक्त ने इसके लिए सैद्धांतिक सहमति दे दी थी। प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार की जा रही है। जल्द ही आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
- डॉ. राजशेखर, मंडलायुक्त
साउथ क्षेत्र में प्रशासनिक भवन बनने का मामला मेरी जानकारी में नहीं है। इस संबंध में पूर्व के फैसलों की जानकारी करने के बाद ही कुछ बताया जा सकता है।
- शिवशरणप्पा जीएन, नगर आयुक्त
26 मार्च को केडीए बोर्ड बैठक के फैसलों का हाल
ये फैसले हुए यह है स्थिति
- केडीए किराये पर उठे मकान बेचेगा आवेदन लिए जा रहे हैं
- प्राधिकरण के आवंटियों को ब्याज में राहत ओटीएस स्कीम आई थी
- मेट्रो क्षेत्र में भवनों की ऊंचाई बढ़ाने का फैसला लंबित
- मॉडर्न सिटी के लिए गंगा किनारे सर्वे लंबित
- न्यू कानपुर सिटी के लिए सर्वे रिपोर्ट तैयार
- सिटी डेवलपमेेंट प्लान के लिए कंसलटेंट की नियुक्त लंबित
- केडीए निजी एजेंसियों के जरिये बेचेगा फ्लैट लंबित
- पनकी में बनेगा चार लेन का अंडरपास लंबित
- सिग्नेचर ग्रींस में बढ़ेंगी सुविधाएं कुछ नहीं हुआ
- नए सॉफ्टवेयर से केडीए के सभी विभागों को एक प्लेटफार्म में लाना लंबित
- मुकदमों में पैरवी के लिए लीगल काउंसिल की संबद्धता नहीं हुई
- नई योजनाएं विकसित होंगी नहीं हुईं
- 500 करोड़ से विकास पहले से लंबित कार्यों की ही प्रगति मात्र 8 फीसदी
- डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण रोकने को विशेष प्रवर्तन दस्ता नहीं बना
- बैराज-मंधना रोड के बायीं तरफ आवासीय क्षेत्र घोषित करने का प्रस्ताव लंबित
- नगर निगम से मिली 9000 संपत्तियों का सत्यापन नहीं हो पाया
- न्यू कानपुर सिटी विकसित न हो पाने के जिम्मेदार होंगे चिह्नित लंबित
- बिना पार्किंग वाले 550 नर्सिंगहोम, होटलों पर कार्रवाई नोटिस की खानापूरी
- बायोडायवर्सिटी पार्क का डीपीआर लंबित
- गंगा थीमपार्क लंबित