कानपुर: नेशनल जियोफिजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट और डेनमार्क की टीम ने शुरू की विलुप्त सरस्वती धारा की खोज
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प्रयागराज और इसके आसपास पिछले लंबे समय से विलुप्त सरस्वती (गंगा यमुना के बीच तीसरी धारा) की खोज कानपुर में भी शुरू हो गई है। नेशनल जियोफिजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट हैदराबाद (एनजीआरआई) और डेनमार्क के विशेषज्ञों की टीम नदी की सूखी हुई धारा की खोज में जुट गई है।
शनिवार को इससे जुड़े विशेषज्ञों की एक टीम शहर आई। टीम कौशांबी और कानपुर के बीच हवाई और स्थलीय सर्वे करेगी। इस संबंध में सुबह ही सरसौल के पास विशेषज्ञों को लेकर एक हेलीकॉप्टर पहुंचा और प्रशासन से अनुमति के बाद इन लोगों ने काम शुरू कर दिया।
हालांकि अचानक हेलीकॉप्टर की लैंडिंग से ग्रामीणों में हड़कंप मच रहा। इस टीम के माध्यम से अभी तक पिछले कुछ वर्षों में मंझनपुर से प्रयागराज और प्रयागराज से कौशांबी तक खोज की गई है। इसमें पता चला है कि गंगा और यमुना नदी के बीच करीब 1000 फीट नीचे एक तीसरी धारा सूखी हुई अवस्था में है।
उसकी कुल लंबाई अभी तक जो प्राप्त हुई है, वह 14 किलोमीटर लंबी और करीब पांच किलोमीटर चौड़ी बताई जा रही है। विशेषज्ञों की टीम ट्रांजिट इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिस्टम के जरिये जमीन से करीब 200 से 400 मीटर नीचे की मिट्टी, कंकड़ और पत्थर का पता लगाती है।
उसके बाद कार्बन डेटिंग के जरिये उम्र निकाली जाती है। जनपद में गंगा नदी के साथ-साथ यमुना की धारा भी बुंदेलखंड को अलग करते हुए आगे निकलती है। एनजीआरआई की टीम इन क्षेत्रों में सर्वे कराएगी। टीम की तरफ से अभी इस तीसरी धारा का कोई नाम नहीं दिया गया है। माना जा रहा है कि यह गंगा-यमुना के बीच बहने वाली विलुप्त सरस्वती है। टीम यहां पर 15 अप्रैल तक काम करेगी।