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कानपुर: नगर निगम में भ्रष्टाचार पर बड़ा एक्शन, ठेकेदारों के भुगतान पर रोक, नई फर्मों के पंजीकरण पर पाबंदी

Tue, 25 Aug 2026 02:17 PM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: Himanshu Awasthi Updated Tue, 25 Aug 2026 02:17 PM IST
सार

Kanpur News: मुख्यमंत्री की सख्त टिप्पणी और भ्रष्टाचार की शिकायतों के बाद कानपुर नगर निगम में प्रशासनिक शिकंजा कस गया है। नगर आयुक्त ने सभी ठेकेदारों के भुगतान और नई फर्मों के पंजीकरण पर रोक लगाते हुए पिछले तीन वर्षों के विकास कार्यों की जांच शुरू कर दी है।

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Kanpur Municipal Corporation payments to contractors halted registration of new firms banned
कानपुर नगर निगम - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर नगर निगम में भ्रष्टाचार पर जांच तेज हो गई है। नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने ठेकेदारों के भुगतान पर रोक लगा दी है। नई फर्मों की पंजीकरण प्रक्रिया पर भी पाबंदी लगाई है। सोमवार सुबह सात बजे से ही अभियंत्रण विभाग के अधिकारी और कर्मचारी नगर निगम मुख्यालय पहुंच गए। नगर आयुक्त के आदेश पर पिछले तीन साल में हुए विकास कार्यों का लेखाजोखा जांच रहे हैं।

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रविवार को नगर निगम अधिकारियों ने हॉट मिक्स प्लांट से जुड़े बड़े ठेकेदारों के ठिकानों पर छापेमारी भी की। कई ठिकाने बंद मिले तो कई प्लांट खराब मिले। अब ऐसे सभी ठेकेदारों की कुंडली खंगाली जा रही है। 15वें वित्त के आवंटित बजट में बंदरबांट, अवैध वसूली, टेंडर प्रक्रिया में धांधली और हॉट मिक्स प्लांट के बिना सिंडीकेट बना कार्य करने के मामले में सोमवार को भी नगर निगम में हलचल रही।

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नगर निगम में कुल 400 पंजीकृत ठेकेदार हैं
खास तौर पर अभियंत्रण विभाग के अधिकारी और कर्मचारी फाइलें जांचने में लगे रहे। बता दें कि नगर निगम में कुल 400 पंजीकृत ठेकेदार हैं। इसमें से 27 हॉट मिक्स प्लांट से जुड़े हैं। नियमानुसार, हॉट मिक्स प्लांट से जुड़े हर ठेकेदार के पास अपना प्लांट होना चाहिए। नगर निगम के यह ठेकेदार आपस में सिंडीकेट बनाकर एक ही प्लांट से काम कर रहे हैं।

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मामले में ब्लैक लिस्ट व एफआईआर कराने की तैयारी
रविवार और सोमवार जब इन ठेकेदारों के बताए गए प्लांट पर नगर निगम अधिकारी पहुंचे, तो कई जगह प्लांट के बाहर ताला मिला। कुछ ठिकानों पर प्लांट ही खराब मिले। अब जांच हो रही है कि अगर प्लांट होना जरूरी है तो बिना प्लांट के यह ठेकेदार कैसे पंजीकृत हो गए। इन ठेकेदारों के खिलाफ गलत सूचना देकर पंजीकरण कराने और सिंडीकेट बनाकर कार्य करने के मामले में ब्लैक लिस्ट व एफआईआर कराने की तैयारी है।

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प्लांट पर मिला ताला तो सरेंडर हो गए ठेकेदार
रविवार को भौंती, किदवईनगर समेत शहर के अलग-अलग स्थानों पर ठेकेदारों के प्लांट पर जब नगर निगम अधिकारी पहुंचे तो उन्हें तमाम खामियां मिली। किदवईनगर में ठेकेदार फर्म अजय इंटरप्राइजेज के प्लांट के गेट पर ताला मिला। इस पर ठेकेदार अजय कुमार वाजपेयी ने नगर निगम के मुख्य अभियंता को पत्र देकर कहा है कि मेरा प्लांट नए स्थान पर शिफ्ट हो रहा है। शिफ्ट होने तक प्लांट का पंजीकरण निरस्त माना जाए। इसके अलावा, दूसरे ठेकेदार भी अपने कागजात लेकर नगर निगम मुख्यालय पहुंचे।

सुबह से देर रात तक चला बैठकों का दौर
नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने सोमवार सुबह करीब आठ बजे अपने कार्यालय में अभियंत्रण विभाग से जुड़े अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने पिछले तीन वर्षों का डाटा मांगा। कहा कि 15 वें वित्त आयोग के तहत किस-किस ठेकेदार ने कौन-कौन सा कार्य किया, उसका डाटा बनाएं। नाला सफाई और अन्य विकास कार्य की सूची बनाने के निर्देश दिए। सूत्रों के अनुसार, नगर आयुक्त की बैठक के बाद इंजीनियरिंग से जुड़े अधिकारी एक जगह एकत्र होकर रणनीति बनाते रहे। नगर आयुक्त की बैठकों का दौर देर रात तक चलता रहा।

यह था मामला
दो दिन पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए नगर निगम की कार्यप्रणाली में चली आ रही धांधली के मामले में अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई थी। टेंडर प्रक्रिया को अपने हिसाब से चलाने, नए ठेकेदारों को नगर निगम में घुसने न देने समेत शहरभर से अनधिकृत रूप से वसूली पर क्लास लगाई थी।

कई शिकायतें पहुंची थी
छह बागी पार्षद लगातार नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते रहे हैं। इसके अलावा, झांसी के एक ठेकेदार ने ठेके में गड़बड़ी करने, एक ठेकेदार का पंजीकरण न होने देने की शिकायत की थी। नए ठेकेदारों की एंट्री में माफियागिरी और वसूली व 15वें वित्त आयोग से मिले 300 करोड़ रुपये में मनमानी के आरोप लग रहे थे। यह सभी मामले सीएम तक पहुंचे जिस पर उन्हें सख्त टिप्पणी करनी पड़ी।

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