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हाथ में हो सरकारी कलम तो डर काहे का! जमकर किया हेरफेर,  20 लाख रुपये रिकवरी के आदेश 

Sat, 15 Dec 2018 12:24 AM IST
प्रशांत कुमार क्राइम डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रशांत कुमार Updated Sat, 15 Dec 2018 12:24 AM IST
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Kanpur municipal auditor and chief tax assessment officer fraud
डेमो पिक
कानपुर नगर निगम के मुख्य नगर लेखा परीक्षक हुबई राम और मुख्य कर निर्धारण अधिकारी विनय कुमार राय ने कागजों में हेरफेर कर स्वयं अपना वेतन बढ़ा लिया। कई सालों से बढ़े वेतन के रूप में दोनों अफसर करीब 10-10 लाख रुपये अतिरिक्त ले चुके हैं। अब जांच में इसका खुलासा हुआ तो शासन ने नगर आयुक्त को दोनों अफसरों के वेतन से अतिरिक्त धनराशि की रिकवरी करने के आदेश दिए हैं। विनय राय का तबादला छह महीने पहले अलीगढ़ नगर निगम में हो चुका है। 
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हुबई राम तीन साल पहले तबादले के बाद कानपुर नगर निगम आए हैं। यहां उन्हें पुरानी सैलरी स्लिप के आधार पर ही वेतन दिया जाने लगा। इसी तरह चार साल पहले यहां स्थानांतरित होकर आए मुख्य कर निर्धारण अधिकारी विनय कुमार राय को भी पूूर्व तैनाती स्थल की वेतन पर्ची के आधार पर यहां बढ़ा हुआ वेतन दिया जाने लगा। 
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चार महीने पहले शासन में इस गड़बड़ी की शिकायत की गई। शासन ने अक्तूबर में नगर निगम के मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी रमेश निरंजन को इस मामले की जांच सौंपी। जांच में दोनों के हर महीने ज्यादा वेतन लेने की पुष्टि हुई। जांच रिपोर्ट के आधार पर स्थानीय निकाय निदेशालय (लखनऊ) के निदेशक अखिलेश सिंह ने नगर आयुक्त संतोष कुमार शर्मा को दोनों से रिकवरी करने और सही वेतन जारी कराने के निर्देश दिए। 
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ऐसे की गड़बड़ी....

शासन के रिकवरी आदेश पर मुख्य नगर लेखा परीक्षक से कह दिया गया है कि वे आगामी वेतन बिल वसूली जाने वाली धनराशि को समायोजित करते हुुए प्रस्तुत करें। यदि ऐसा नहीं किया तो वित्त विभाग स्वयं उनके  वेतन से हर महीने थोड़ी-थोड़ी धनराशि की रिकवरी करने लगेगा।
- रमेश निरंजन, मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी, नगर निगम
 
 
मुख्य नगर लेखा परीक्षक और मुख्य कर निर्धारण अधिकारी अपने-अपने विभाग के प्रभारी होने के नाते अपना और कर्मियों के वेतन के लिए बिल बनाकर मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी को भेजते हैं। नियमानुसार इन्हें अपने से उच्च अधिकारी (नगर आयुक्त), स्थानीय निकाय निदेशालय या शासन से वेतन निर्धारित कराना चाहिए। पर इन अफसरों ने कागजों में हेरफेर कर खुद ही अपना वेतन बढ़ा दिखाया जिसे मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी ने ओके कर दिया। तब से वे बढ़ा वेतन पा रहे हैं।
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