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Kanpur: मोबाइल ने बच्चाें का दिमाग कर दिया हैंग, आई कॉन्टेक्ट पर नहीं दे रहे प्रतिक्रिया

Mon, 09 Feb 2026 12:35 PM IST
शिखा पांडेय रजा शास्त्री, अमर उजाला, कानपुर
रजा शास्त्री, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Mon, 09 Feb 2026 12:35 PM IST
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Kanpur: Mobile phones have overloaded children's brains; they are not responding to eye contact
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik.com

बच्चों को बहलाने के लिए फोन थमा देने का एक दुष्प्रभाव और सामने आया है। मोबाइल की स्क्रीन घंटों लगातार देखने से बच्चों के मस्तिष्क का सिस्टम हैंग हो जा रहा है। इससे मस्तिष्क कुछ सीख नहीं पाता। घबराए अभिभावक बच्चों को लेकर जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज न्यूरो साइंसेस विभाग आ रहे। एमआरआई जांचों में बच्चों के मस्तिष्क की रिपोर्ट सामान्य आ रही है लेकिन सभी लक्षण ऑटिज्म के रहते हैं।

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स्क्रीन के लत के मस्तिष्क पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव का अध्ययन करने के लिए न्यूरो साइंसेस विभाग ने 65 बच्चों की केस स्टडी तैयार की है। इन बच्चों को ओपीडी में लाया गया है। ये बच्चे ऑटिज्म के लक्षणों से ग्रसित रहे हैं। इनकी हिस्ट्री ली गई तो पता चला कि 90 फीसदी बच्चे मोबाइल के लती हैं। यह भी पाया गया कि इन्हें फोन देखने की लत उनके घर वालों ही लगाई है। बच्चे रोएं, शोर न करें, इसके लिए गेम लगाकर फोन थमा दिया जाता है।
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जो बच्चे ऑटिज्म के इलाज के लिए न्यूरो साइंसेस लाए गए हैं, उनका आयु वर्ग तीन साल से लेकर नौ साल के बीच का है। इन्हें डेढ़ दो साल की उम्र से ही घर वालों ने मोबाइल फोन की स्क्रीन दिखानी शुरू कर दी। इन बच्चों के केस का अध्ययन करवा रहे न्यूरो साइंसेस के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. मनीष सिंह ने बताया कि इन बच्चों में फूड हैबिट भी विकसित नहीं हुई है। इसके साथ ही वे आई कॉन्टेक्ट पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देते हैं। लगता है कि वे न कुछ सुनते हैं और न ही बोल पाते हैं। कुछ बच्चों की आंखों में भी दिक्कत आ गई।
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जो बच्चे ओपीडी में लाए गए उनमें 90 फीसदी मोबाइल स्क्रीन के लती हैं। स्क्रीन की लत से आटिज्म की तरह पैदा हो रही इस दिक्कत के अध्ययन में यह भी पता चला बच्चे का मस्तिष्क समाजिकता के लिए प्रशिक्षित नहीं हो पा रहा है। बच्चों की मस्तिष्क का साइज सामान्य रहता ह जबकि असली ऑटिज्म रोगी का मस्तिष्क का साइज छोटा मिलता है। इसके अलावा अन्य माइग्रेशनल डिफेक्ट भी एमआरआई जांच में आते हैं।


ब्रेन इंस्टीट्यूट के साथ करेंगे शोध
न्यूरो साइंसेस प्रमुख डॉ. मनीष सिंह ने बताया कि स्क्रीन की लत से मस्तिष्क पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को लेकर गुड़गांव स्थित ब्रेन रिसर्च इंस्टीट्यूट के साथ मिलकर शोध करने की तैयारी है। इसके साथ ही अमेरिका के न्यूरो साइंसेस के क्लीवलैंड क्लीनिक और जापान के विश्वविद्यालयों से भी बात चल रही है। इनके साथ साझा शोध किए जाएंगे।

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