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Kanpur News: इंडियन आर्ट थीम पर होगा कानपुर लिटरेचर फेस्टिवल, युवाओं को मिलेगा विशेष मंच
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कानपुर। कानपुर लिटरेचर फेस्टिवल का आयोजन 20 व 21 दिसंबर को कमला नगर स्थित गौरहरि सिंहानिया मैनेजमेंट रिसर्च इंस्टीट्यूट में किया जाएगा। दो दिवसीय आयोजन में साहित्य, संस्कृति और कला का संगम दिखेगा। फेस्टिवल में लेखक, कवि, संगीतकार, फिल्मकार और बुद्धिजीवी भाग लेंगे। इस वर्ष फेस्टिवल की थीम इंडियन आर्ट रखी गई है। फेस्टिवल में युवाओं को विशेष मंच दिया जाएगा। इसके तहत ओपन माइक सत्र का आयोजन किया जाएगा, जिसमें युवा गायन, मिमिक्री, कविता, गजल की प्रस्तुति देंगे।
साहित्य, संगीत, इतिहास, सिनेमा, रंगमंच और समकालीन विचारों से जुड़े कई सत्र आयोजित किए जाएंगे। कानपुर लिटरेचर फेस्टिवल से जुड़े अतुल तिवारी ने बताया कि इस बार आयोजन में युवाओं को केंद्र में रखा गया है। फेस्टिवल में युवाओं द्वारा बनाई गई शॉर्ट फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा। शहर के लेखकों और युवा रचनाकारों की कृतियों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। नमन मेहरा की फिल्म धुंधली यादें का प्रदर्शन किया जाएगा। सुनंदा मेहता और सुचित्रा अय्यर की पुस्तक बिहाइंड द बिग स्क्रीन का विमोचन होगा। शायर अकबर इलाहाबादी के जीवन और कृतित्व पर आधारित एक विशेष साहित्यिक सत्र भी आयोजित किया जाएगा। सिनेमा प्रेमियों के लिए विशाखा एन. सिंह और राघवी अग्रवाल की शॉर्ट फिल्म दिस इज नॉट माय होम के बाद शॉर्ट फिल्म मझधार प्रदर्शित की जाएगी। वहीं, फोटोग्राफर अनिल सिंदूरी की तस्वीरों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी।
अभिनेता जीशान अय्यूब, संगीतकार शांतनु मोइत्रा, एयर मार्शल दीपेंदु चौधरी से चर्चा होगी आकर्षण
फेस्टिवल का शुभारंभ 20 दिसंबर को दोपहर 1:30 बजे प्रसिद्ध तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन के जीवन पर आधारित फिल्म द स्पीकिंग हैंड्स (निर्देशक: सुमंत्रो घोषाल) के प्रदर्शन के साथ होगा। इसके बाद अभिनेता जीशान अय्यूब से उनके अभिनय के संघर्ष, रंगमंच और फिल्मी सफर को लेकर संवाद कार्यक्रम होगा। कवि नरेश सक्सेना से उनकी कविताओं पर विशेष बातचीत होगी। संगीत सत्र में प्रसिद्ध पियानोवादक और संगीतकार शांतनु मोइत्रा अपनी प्रस्तुति देंगे और अपने संगीत सफर के उतार-चढ़ाव व चुनौतियों पर चर्चा करेंगे। कथाकार और लेखक उत्कर्ष पटेल अपनी पुस्तक द्रौपदी के माध्यम से द्रौपदी के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करेंगे। राजनीतिक इतिहास से जुड़े एक विशेष सत्र में राजनीतिक विचारक सुधींद्र कुलकर्णी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया और आरएसएस की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के संदर्भ में अपने विचार रखेंगे। यह सत्र इसलिए भी खास होगा क्योंकि कुलकर्णी दोनों संगठनों से जुड़े रहने के बाद उनके अनुभवों पर चर्चा करेंगे। भारतीय सेना और रणनीति पर केंद्रित सत्र में एयर मार्शल दीपेंदु चौधरी से वरिष्ठ पत्रकार सुधीर मिश्रा ऑपरेशन सिंदूर को लेकर संवाद करेंगे। फेस्टिवल के दूसरे दिन समापन जावेद सिद्दीकी की ओर से लिखित प्रसिद्ध नाटक गुडुंबा से होगा, जिसे अभिनेत्री लुबना सलीम प्रस्तुत करेंगी। नाटक का निर्देशन सलीम आरिफ ने किया है।लुबना सलीम रंगमंच, फिल्म और टेलीविजन की जानी-मानी अभिनेत्री हैं।
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साहित्य, संगीत, इतिहास, सिनेमा, रंगमंच और समकालीन विचारों से जुड़े कई सत्र आयोजित किए जाएंगे। कानपुर लिटरेचर फेस्टिवल से जुड़े अतुल तिवारी ने बताया कि इस बार आयोजन में युवाओं को केंद्र में रखा गया है। फेस्टिवल में युवाओं द्वारा बनाई गई शॉर्ट फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा। शहर के लेखकों और युवा रचनाकारों की कृतियों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। नमन मेहरा की फिल्म धुंधली यादें का प्रदर्शन किया जाएगा। सुनंदा मेहता और सुचित्रा अय्यर की पुस्तक बिहाइंड द बिग स्क्रीन का विमोचन होगा। शायर अकबर इलाहाबादी के जीवन और कृतित्व पर आधारित एक विशेष साहित्यिक सत्र भी आयोजित किया जाएगा। सिनेमा प्रेमियों के लिए विशाखा एन. सिंह और राघवी अग्रवाल की शॉर्ट फिल्म दिस इज नॉट माय होम के बाद शॉर्ट फिल्म मझधार प्रदर्शित की जाएगी। वहीं, फोटोग्राफर अनिल सिंदूरी की तस्वीरों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी।
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अभिनेता जीशान अय्यूब, संगीतकार शांतनु मोइत्रा, एयर मार्शल दीपेंदु चौधरी से चर्चा होगी आकर्षण
फेस्टिवल का शुभारंभ 20 दिसंबर को दोपहर 1:30 बजे प्रसिद्ध तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन के जीवन पर आधारित फिल्म द स्पीकिंग हैंड्स (निर्देशक: सुमंत्रो घोषाल) के प्रदर्शन के साथ होगा। इसके बाद अभिनेता जीशान अय्यूब से उनके अभिनय के संघर्ष, रंगमंच और फिल्मी सफर को लेकर संवाद कार्यक्रम होगा। कवि नरेश सक्सेना से उनकी कविताओं पर विशेष बातचीत होगी। संगीत सत्र में प्रसिद्ध पियानोवादक और संगीतकार शांतनु मोइत्रा अपनी प्रस्तुति देंगे और अपने संगीत सफर के उतार-चढ़ाव व चुनौतियों पर चर्चा करेंगे। कथाकार और लेखक उत्कर्ष पटेल अपनी पुस्तक द्रौपदी के माध्यम से द्रौपदी के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करेंगे। राजनीतिक इतिहास से जुड़े एक विशेष सत्र में राजनीतिक विचारक सुधींद्र कुलकर्णी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया और आरएसएस की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के संदर्भ में अपने विचार रखेंगे। यह सत्र इसलिए भी खास होगा क्योंकि कुलकर्णी दोनों संगठनों से जुड़े रहने के बाद उनके अनुभवों पर चर्चा करेंगे। भारतीय सेना और रणनीति पर केंद्रित सत्र में एयर मार्शल दीपेंदु चौधरी से वरिष्ठ पत्रकार सुधीर मिश्रा ऑपरेशन सिंदूर को लेकर संवाद करेंगे। फेस्टिवल के दूसरे दिन समापन जावेद सिद्दीकी की ओर से लिखित प्रसिद्ध नाटक गुडुंबा से होगा, जिसे अभिनेत्री लुबना सलीम प्रस्तुत करेंगी। नाटक का निर्देशन सलीम आरिफ ने किया है।लुबना सलीम रंगमंच, फिल्म और टेलीविजन की जानी-मानी अभिनेत्री हैं।
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