फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Kanpur-Kabrai Greenfield Highway Approved Project to Be Completed in Three Years

UP: कानपुर-कबरई ग्रीनफील्ड हाईवे को मंजूरी, साढ़े 3 घंटे का सफर डेढ़ घंटे में; रोज एक लाख से अधिक को होगी राहत

Thu, 02 Jul 2026 03:29 PM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर Published by: Sharukh Khan Updated Thu, 02 Jul 2026 03:29 PM IST
सार

कानपुर-कबरई ग्रीनफील्ड हाईवे तीन साल में बनेगा। रोज एक लाख से ज्यादा राहगीरों को राहत मिलेगी। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में स्वीकृत की गई परियोजना कानपुर और कबरई के बीच बिना रुकावट के तेज रफ्तार कनेक्टिविटी देगी। 

विज्ञापन
Kanpur-Kabrai Greenfield Highway Approved Project to Be Completed in Three Years
greenfield highway - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

कानपुर-कबरई ग्रीनफील्ड हाईवे बनने से रोज एक लाख से ज्यादा लोगों को जाम से निजात मिलेगी। हादसों पर भी अंकुश लगेगा। बुधवार को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति की बैठक में 117.7 किलोमीटर लंबे 7145 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट को स्वीकृति दी गई। 
विज्ञापन


भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने इसकी तैयारियां तेज कर दी हैं। सब कुछ तय समय में हुआ तो तीन साल में निर्माण पूरा हो जाएगा। इसमें छह माह टेंडर और जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया के भी शामिल हैं। ग्रीनफील्ड राष्ट्रीय राजमार्ग यहां (कानपुर) से आगे बढ़ने पर मौजूदा कानपुर - कबरई राष्ट्रीय राजमार्ग के दाहिनी तरफ बनाया जाएगा।
विज्ञापन


इसके बनने से महानगर से बुंदेलखंड क्षेत्र के महोबा जनपद स्थित कबरई की दूरी फर्राटा भरते हुए मात्र डेढ़ घंटे में पूरी की जा सकेगी। फिलहाल इसमें करीब साढ़े तीन घंटे लगते हैं। जाम लगने पर यह समय और भी बढ़ जाता है। फिलहाल नया राजमार्ग चार-लेन का बनेगा, इसे इस प्रकार डिजाइन किया गया है, जिससे भविष्य में इसे चौड़ा करते हुए छह-लेन का किया जा सकेगा। यह नेशनल हाईवे प्रोग्राम के तहत भोपाल-कानपुर इकनॉमिक कॉरिडोर का एक अहम हिस्सा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

एनएच-34 पर कानपुर से कबरई का मौजूदा मार्ग दो लेन का है। इसके चलते आए दिन जाम की भीषण समस्या से वाहन सवार परेशान होते हैं। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में स्वीकृत की गई परियोजना कानपुर और कबरई के बीच बिना रुकावट के तेज रफ्तार कनेक्टिविटी देगी। 

साथ ही मध्य प्रदेश के सागर, भोपाल और अन्य हिस्सों के लिए आगे की कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी। जानकारों का कहना है कि इस परियोजना से उत्तर प्रदेश के औद्योगिक और व्यावसायिक केंद्रों को मध्य प्रदेश के खनिज समृद्ध, विनिर्माण और कृषि क्षेत्रों से जोड़ने वाला एक आधुनिक कंट्रोल्ड इकनॉमिक कॉरिडोर बनेगा। ग्रीनफील्ड के किनारे नई टाउनशिप विकसित होगी। कानपुर और बुंदेलखंड क्षेत्र में उद्योग, व्यापार, रोजगार व निवेश के नए अवसर सृजित होने के साथ विकास को बल मिलेगा।

80 से 100 किमी प्रति घंटा की रफ्तार के लिए डिजाइन किया गया है। एनएचएआई के प्रोजेक्ट निदेशक पंकज यादव के अनुसार ग्रीनफील्ड कॉरिडोर 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार के लिए डिजाइन किया गया है। यह कॉरिडोर कानपुर और कबरई के बीच यात्रा के समय को साढ़े तीन घंटे से घटाकर डेढ़ घंटे कर देगा। साथ ही यह सड़क सुरक्षा में सुधार करेगा। समय, पेट्रोल-डीजल खर्च और वायु प्रदूषण कम होगा। 

 

यात्रियों के साथ माल की आवाजाही आसान होगी। यह परियोजना एनएच-34, एनएच-35, बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे, कानपुर रिंग रोड और स्टेट हाईवे-46, 91, 10बी और 42 के साथ कनेक्टिविटी भी प्रदान करेगी। इससे क्षेत्रीय हाईवे नेटवर्क मजबूत होगा। यह कॉरिडोर कबरई माइनिंग बेल्ट से कनेक्टिविटी को और मजबूत करेगा। खनिज, औद्योगिक सामान, निर्माण सामग्री और खेती के उत्पादों की आवाजाही बेहतर होगी। इससे लॉजिस्टिक्स की क्षमता, सप्लाई चेन की मजबूती और इलाके के आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

1.2 करोड़ लोगों को मिलेगा रोजगार
परियोजना निर्माण के दौरान प्रति लेन प्रति किलोमीटर लगभग 11,188 प्रत्यक्ष और 13,985 अप्रत्यक्ष व्यक्तियों के लिए प्रतिदिन रोजगार पैदा होने की उम्मीद है। प्रस्तावित परियोजना से भविष्य में लगभग 1.2 करोड़ व्यक्ति का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।
 

रोज निकलते हैं 26000 वाहन
इस रूट के मौजूदा दो-लेन के राष्ट्रीय राजमार्ग से रोज 25,000 से 26,000 वाहन निकलते हैं। नया हाइवे बनने से इनकी संख्या दोगुनी से ज्यादा बढ़ने की संभावना है। यह इसके लंबे समय के आर्थिक, लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट महत्व को बताता है।

 

साढ़े चार साल में 994 हादसे, 604 मौत, 890 घायल
एनएचएआई की रिपोर्ट के अनुसार कानपुर-कबरई राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-34) में बीते साढ़े चार साल में 994 हादसे हुए हैं। इनमें 604 लोगों की मौत हुई और 890 घायल हुए हैं। 2022 में सर्वाधिक 306 हादसे हुए थे, जबकि पिछले साल इनकी संख्या घटकर 202 और इस साल 79 हादसे हुए। उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक सड़क दुर्घटनाओं वाले राजमार्गों में यह तीसरे स्थान पर है। 

 

अमर उजाला ने एनएच-34 पर लगातार हो रहे सड़क हादसों, जाम और भारी वाहनों के दबाव से राहत ग्रीनफील्ड हाईवे की जरूरत का मुद्दा लगातार उठाया। 19 मई को प्रकाशित विशेष अभियान संकरी डगर खत्म कर रही जिंदगी का सफर में सड़क की खामियों और दुर्घटनाओं को प्रकाशित किया गया। 27 मई को केंद्र सरकार में अटकी ग्रीनफील्ड हाईवे की फाइल शीर्षक से प्रकाशित रिपोर्ट में मंजूरी में हो रही देरी उजागर की गई। अब परियोजना को हरी झंडी मिलने से निर्माण का रास्ता साफ हो गया है।
 

860 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की जाएगी
परियोजना के लिए कानपुर नगर, हमीरपुर और महोबा में 860 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की जाएगी। जमीन 60 मीटर चौड़ाई में ली जाएगी। गजट नोटिफिकेशन हो गया है। जमीन का अधिग्रहण और मुआवजा वितरण होना है। यह ग्रीनफील्ड हाईवे कस्बों से बाहर होकर जाएगा ताकि आबादी प्रभावित न हो। इस पर सीमित स्थानों से ही कनेक्टिविटी दी जाएगी। करीब 80 प्रतिशत भूमि उपलब्ध होते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। परियोजना को 30 माह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। कार्यदायी संस्था निर्माण कार्य करेगी और वही रखरखाव का काम करते हुए टोल टैक्स भी वसूलेगी। पूरी उम्मीद है कि आगामी छह माह में परियोजना से संबंधित निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।-पंकज यादव, परियोजना निदेशक, एनएचएआई।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed