फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Kanpur JK Cancer Institute surgeries not taking place 50 patients have to be referred every week

Kanpur: जेके कैंसर संस्थान में ‘लाचार’ इलाज, नहीं हो पा रही सर्जरी, हर हफ्ते 50 मरीजों को करना पड़ रहा रेफर

Sat, 13 Jun 2026 01:33 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Sat, 13 Jun 2026 01:33 PM IST
सार

Kanpur News: जेके कैंसर संस्थान में सर्जिकल टीम और आधुनिक उपकरणों के अभाव में मरीजों की सर्जरी नहीं हो पा रही है। प्रति सप्ताह 50 से अधिक मरीजों को हैलट अस्पताल रेफर किया जा रहा है, जबकि भवन और स्टॉफ की कमी के समाधान के लिए भेजे गए 10 प्रस्तावों पर अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है।

विज्ञापन
Kanpur JK Cancer Institute surgeries not taking place 50 patients have to be referred every week
जेके कैंसर इंस्टीट्यूट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर में जेके कैंसर संस्थान इन दिनों संसाधनों और स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। यहां सर्जिकल ऑन्कोलॉजी समेत कई विभाग संचालित हैं लेकिन हकीकत में मरीजों की सर्जरी तक नहीं हो पा रही है। नतीजतन हर सप्ताह 50 से अधिक मरीजों को हैलट अस्पताल रेफर करना पड़ रहा है। संस्थान में सर्जन होने के बावजूद पर्याप्त स्टाफ और सहयोगी टीम नहीं होने से ऑपरेशन पूरी तरह प्रभावित हैं।

विज्ञापन

अस्पताल में हर वर्ष लगभग छह हजार नए कैंसर मरीज पहुंचते हैं लेकिन संसाधनों के अभाव में उन्हें अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। कैंसर उपचार की आधुनिक तकनीक मानी जाने वाली लीनियर एक्सीलेरेटर मशीन वर्ष 2018 से खराब पड़ी है। इसके कारण मरीजों को पुरानी कोबाल्ट तकनीक से रेडियोथेरेपी दी जा रही है जिसके दुष्प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक माने जाते हैं।

विज्ञापन

नाम का सर्जिकल विभाग, एक सर्जन के भरोसे कैसे हो सर्जरी
सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग में केवल एक सर्जन डॉ. राजेश अग्रवाल तैनात हैं। हालांकि उनके साथ काम करने के लिए आवश्यक टीम नहीं है। नियमानुसार विभाग में तीन प्रमुख चिकित्सकीय पद होने चाहिए जो वर्तमान में रिक्त हैं। इसके अलावा छह सीनियर रेजिडेंट, तीन प्रोफेसर, एक सिस्टर, 21 स्टाफ नर्स, एक फार्मासिस्ट, एक स्टोर कीपर और दो क्लर्क समेत कुल 36 स्वीकृत पदों में से 35 खाली पड़े हैं।

संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल संभव हो सकेगा
आउटसोर्सिंग के तहत स्वीकृत 28 पद भी रिक्त हैं। स्टाफ की कमी का असर अस्पताल की अन्य सुविधाओं पर भी पड़ रहा है। सर्जरी न होने के कारण आईसीयू और वेंटिलेटर जैसी महत्वपूर्ण सुविधाओं का महीनों उपयोग नहीं हो पाता। विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित ऑपरेशन शुरू होने पर इन संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल संभव हो सकेगा।

विज्ञापन

छह साल में 10 बार भेजा नए भवन का प्रस्ताव
जेके कैंसर संस्थान का भवन भी जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है। संस्थान के निदेशक डॉ. एसएन प्रसाद ने बताया कि पिछले छह वर्षों में दस से अधिक बार दस मंजिला नए भवन का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। हर वर्ष दो बार प्रस्ताव भेजा जाता है, लेकिन अब तक मंजूरी नहीं मिल सकी है।

12 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हुआ है
हालांकि प्रशासनिक और अकादमिक गतिविधियों के लिए 12 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हुआ है, जिससे परिसर में तीन मंजिला भवन का निर्माण कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अब सात मंजिला नई इमारत के निर्माण का संशोधित प्रस्ताव इसी महीने शासन को भेजा जाएगा।

हमारे अस्पताल में सर्जन तो हैं, लेकिन पर्याप्त स्टाफ न होने के कारण सर्जरी नहीं हो पा रही है। मरीजों को रेफर करना पड़ता है। भवन भी जर्जर है इसलिए सात मंजिला नई इमारत का प्रस्ताव तैयार कराया जा रहा है।  -डॉ. एसएन प्रसाद, निदेशक, जेके कैंसर संस्थान

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed