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यूपी का औद्योगिक शहर ऊहापोह की स्थिति में, ये है बड़ी वजह

Sat, 29 Sep 2018 03:56 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Updated Sat, 29 Sep 2018 03:56 PM IST
सार

- सब्सिडी के बावजूद नई इकाई लगाने को आगे नहीं आ रहे लोग 
- 6.25 से 20 लाख रुपये तक की दी छूट दे रही सरकार 
- टेनरियों की शिफ्टिंग और बंदी की चर्चाओं की वजह से सभी ऊहापोह में 

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Kanpur industry will be behind in establishment
डेमो पिक

विस्तार

‘एक जिला एक उत्पाद’ योजना अच्छी है, लेकिन कानपुर शहर को इसका बहुत अधिक लाभ नहीं मिलेगा। बल्कि चमड़े की नई इकाई लगाने में शहर पिछड़ेगा।’ यह कहना है शहर के नवोदित चमड़ा कारोबारी अजय दुबे का। इनकी जाजमऊ में चमड़ा उत्पादों की इकाई है। यह चिंतित हैं कि टेनरियों की बंदी और शिफ्टिंग से उनका भी कारोबार प्रभावित होगा। ऐसे में नए निवेश की तो सोच भी नहीं सकते। 
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दरअसल, शहर में चमड़ा कारोबार से जुड़े अधिकतर नए और पुराने कारोबारियों का ऐसा ही सोचना है। एक जिला, एक उत्पाद योजना के तहत सरकार की ओर से दी जाने वाली सहूलियतों से चमड़ा कारोबारी बहुत उत्साहित नहीं हैं। यही वजह है कि ओडीओपी योजना के तहत नए प्रोजेक्ट लगाने पर दी जा रही छूट का लाभ लेने के लिए एक भी आवेदन अभी तक नहीं आया है। सरकार की ओर से नए प्रोजेेक्ट लगाने पर 6.25 लाख से 20 लाख रुपये तक की छूट दी जा रही है।
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काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट के पदाधिकारी बताते हैं कि चमड़ा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सरकार प्रयास कर रही है लेकिन कारोबारी आशंकित हैं। जब तक प्रदूषण और शिफ्टिंग संबंधी मसले हल नहीं होंगे तब तक नए उद्यमी निवेश को तैयार नहीं होंगे।
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उद्यमी बोले
टेनरियों की शिफ्टिंग और बंदी की चर्चाओं से आशंकित कारोबारी चाहते हैं कि पहले से बसे उद्योग को ही मजबूत किया जाए। उन्हें भरोसा मिले कि उनका भविष्य सुरक्षित है। तभी नए या पुराने उद्यमी निवेश के लिए आकर्षित होंगे। - ओपी पांडेय, कार्यकारी निदेशक, कानपुर उन्नाव लेदर क्लस्टर

चमड़ा उद्योग के लिए अनुकूल माहौल नहीं बन पा रहा है। कच्चे माल की उपलब्धता होने के बाद भी टेनरी संचालक माल नहीं ले रहे हैं कि आगे उत्पादन होगा भी या नहीं। ऐसे में नई इकाई के विस्तार की योजना थोड़ा मुश्किल काम है। - जावेद इकबाल, रीजनल चेयरमैन, सीएलई 

ओडीओपी योजना बेहद अच्छी है। सरकार की नीयत भी विकासपरक है। लेकिन इस काम से जुड़े लोगों में ऊहापोह की स्थिति है। विदेशों में शहर की साख गिरी है। आर्डर कम मिल रहे हैं। शिफ्टिंग और प्रदूषण से संबंधित मसले सुलझने के बाद ही इस उद्योग को लाभ मिलेगा। - जफर फिरोज, निर्यात विशेषज्ञ 

चमड़ा उद्यमियों को काम करने का बेहतर माहौल मिले तो सरकार की योजना से नए उद्योग पनप सकते हैं। शहर में बड़ी संख्या में ऐसे उद्यमी हैं जो सरकारी मदद से निवेश की चाह रखते हैं, लेकिन अभी थोड़ा सशंकित हैं। - फिरोज आलम, पदाधिकारी, स्मॉल टेनर्स एसोसिएशन 
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