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Kanpur: आईआईटी का एप बताएगा…बाढ़ से कितना इलाका होगा प्रभावित, टेराएक्चा यूएवी ने विकसित की एप्लीकेशन

Sun, 04 May 2025 05:29 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sun, 04 May 2025 05:29 PM IST
सार

Kanpur News: आईआईटी के एप की मदद से सिर्फ बाढ़ के प्रकोप से बचाव नहीं होगा, बल्कि टाउन प्लानिंग और इंश्योरेंस जैसी पॉलिसी बनाने में भी मदद मिलेगी।

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Kanpur IITs app will tell how much area will be affected by floods TerraAccha UAV developed the application
iit kanpur - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आईआईटी कानपुर ने एक ऐसा एप तैयार किया है जिससे यह पता चल सकेगा कि बाढ़ से कितना इलाका प्रभावित होगा। साथ ही यह भी पता चल पाएगा कि नदियों का जलस्तर कितना बढ़ेगा। आईआईटी कानपुर के अर्थ साइंस विभाग के वैज्ञानिक प्रो. राजीव सिन्हा के मार्गदर्शन में टेराएक्वा यूएवी स्टार्टअप ने फ्लड डिजास्टर रिस्पांस सिस्टम नाम का एप विकसित किया है। शनिवार को प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में एप को लांच किया गया है।

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अधिकारियों ने एप विकसित करने वाली टीम, केडीए और सिंचाई विभाग को पूरे जिले का सर्वे करने का निर्देश दिया है ताकि कानपुर को बाढ़ के प्रकोप से सुरक्षित रखा जा सके। अभी तक बाढ़ की स्थिति का आकलन अमूमन पुराने अनुभवों के आधार पर होता था। सैटेलाइट से पता चलता है कि इतना जलस्तर बढ़ा तो इतना क्षेत्रफल प्रभावित हो सकता है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। आईआईटी के वैज्ञानिक प्रो. राजीव सिन्हा ने बताया कि बाढ़ के प्रकोप से सुरक्षा प्रदान करने वाले एप की टेक्नोलॉजी और एल्गोरिदम पूरी तरह तैयार है।

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4000 हेक्टेयर में स्थित 23 गांवों में किया गया ट्रायल
डाटा अपलोड करने के बाद पानी कितने क्षेत्र में बढ़ेगा, ऊंची-नीची जमीन के अनुसार नुकसान का आकलन और किस क्षेत्र में कितना पानी भरेगा, यह भी पता चल जाएगा। उन्होंने कहा कि एप में डाटा अपलोड करने के बाद इन सभी बिंदुओं की सटीक जानकारी मिल सकेगी। कार्यक्रम में शामिल अधिकारियों ने कहा कि आईआईटी के एप की मदद से प्रदेश के बाढ़ प्रभावित 48 जिलों को लाभ मिलेगा। इसको लेकर शासन से भी बात की जाएगी। प्रो. सिन्हा ने बताया कि एप का सफल ट्रायल बैराज के पास करीब 4000 हेक्टेयर में स्थित 23 गांवों में किया गया है।

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रिमोट सेंसिंग के आधार पर लिया जाता था डाटा
यह ट्रायल पूरी तरह से सफल रहा है। आठ माह की लगातार रिसर्च के बाद यह एप विकसित हुआ है। उन्होंने कहा कि इसमें सबसे महत्वपूर्ण डाटा है। अभी तक रिमोट सेंसिंग के आधार पर डाटा लिया जाता था जो पांच मीटर के अंतराल पर एनालिसिस के लिए आता है। एप में ड्रोन की मदद से लिए गए डाटा तीन सेमी के अंतराल पर एनालिसिस कर देते हैं। इस एप को तैयार करने के लिए आईआईटी के वैज्ञानिकों ने ड्रोन और रिमोट सेंसिंग के डाटा को एनालिसिस कर डिजिटल एलिवेशन मॉडल विकसित किया है।

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