फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Kanpur If you concentrate on mobile then you are unaware of the things said by your loved ones study in GSVM

Kanpur: मोबाइल पर ध्यान तो अपनों की बातों से अंजान, GSVM में एक साल में 100 बच्चों पर हुआ अध्ययन, पढ़ें रिपोर्ट

Thu, 26 Jun 2025 03:05 PM IST
हिमांशु अवस्थी रजा शास्त्री, अमर उजाला, कानपुर
रजा शास्त्री, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Thu, 26 Jun 2025 03:05 PM IST
सार

Kanpur News: विशेषज्ञों का कहना है कि वर्चुअल ऑटिज्म के बाल रोगियों संख्या बढ़ रही है। हिस्ट्री से पता चलता है कि मां-बाप बच्चे को फोन दे देते हैं, जिससे वे रोएं नहीं खेलते रहें। ये मां-बाप खुद भी स्क्रीन में व्यस्त रहते हैं। बच्चों के मस्तिष्क पर स्क्रीन का प्रतिकूल प्रभाव आया है।

विज्ञापन
Kanpur If you concentrate on mobile then you are unaware of the things said by your loved ones study in GSVM
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बच्चों को व्यस्त रखने के लिए मोबाइल देना नुकसानदेह साबित हो रहा है। वे स्क्रीन के लती हो गए और वर्चुअल ऑटिज्म की गिरफ्त में आ रहे हैं। उनके समाजीकरण की प्रक्रिया बाधित हो रही है। वर्चुअल ऑटिज्म के शिकार बच्चे किसी की बात नहीं सुनते और न कोई प्रतिक्रिया देते हैं। बोलने की क्षमता भी प्रभावित हुई है, लेकिन फोन की स्क्रीन देखते ही एक्टिव हो जाते हैं।

विज्ञापन

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग में एक साल में ऐसे 100 बच्चों के बर्ताव का अध्ययन किया गया। इन बच्चों को उन्हीं के माता-पिता बाल मनोरोग विशेषज्ञ की ओपीडी में लेकर आए। विभागाध्यक्ष डॉ. धनंजय चौधरी ने बताया कि बच्चों का आयु वर्ग दो से छह साल रहा है। उन्हें ऑटिज्म रोग नहीं रहा लेकिन लक्षण सारे ऑटिज्म वाले ही रहे हैं।

विज्ञापन
Trending Videos

वर्चुअल ऑटिज्म के बाल रोगियों संख्या बढ़ रही
यह स्क्रीन का लती होने का दुष्प्रभाव है। इसकी वजह से बच्चों में सामाजिक बर्ताव का तरीका विकसित नहीं हो पाया। बाल मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. कृतिका चावला ने बताया कि वर्चुअल ऑटिज्म के बाल रोगियों संख्या बढ़ रही है। हिस्ट्री से पता चलता है कि मां-बाप बच्चे को फोन दे देते हैं, जिससे वे रोएं नहीं खेलते रहें।

विज्ञापन

मस्तिष्क पर स्क्रीन का प्रतिकूल प्रभाव
ये मां-बाप खुद भी स्क्रीन में व्यस्त रहते हैं।  बच्चों के मस्तिष्क पर स्क्रीन का प्रतिकूल प्रभाव आया है। बच्चे अब मोबाइल स्क्रीन पर जो देखते हैं, उसी पर प्रतिक्रिया देते हैं। अगर घर का सदस्य बुलाता है, तो गुमसुम रहते हैं जैसे कुछ सुन नहीं रहे। उन्होंने बताया कि यही आयु बच्चे के मस्तिष्क के विकास की होती है।

विज्ञापन

सोशलाइजेशन की प्रक्रिया होने लगती है बाधित
इसी उम्र में उसकी फूड हैबिट पड़ती है। भाषा और लोगों को प्रतिक्रिया देना सीखता है लेकिन वर्चुअल ऑटिज्म की स्थिति आने के बाद बच्चे अपने संवेदी (सेंसुअरी) अंगों का इस्तेमाल ही बंद कर देते हैं। आसपास की चीजों से खुद को जोड़ नहीं पाते। उनके मस्तिष्क का विकास अलग तरह से होने लगता है। सोशलाइजेशन की प्रक्रिया बाधित होने लगती है।

बड़े बच्चों में बढ़ रहा इंटरनेट सिंड्रोम
मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. आयुषी सिंह ने बताया कि आठ से 16 साल आयु वर्ग के बच्चों में इंटरनेट सिंड्रोम बढ़ रहा है। छोटी-छोटी रील देखने की आदत पड़ने पर बच्चे लंबे समय तक स्कूल में व्याख्यान नहीं सुन पा रहे। पुस्तकों में लंबे अध्याय भी नहीं पढ़ पाते। इससे उनकी कम्युनिकेशन स्किल बाधित हो रही। साथ ही चिड़चिड़ापन, छोटी बात पर अत्याधिक क्रोध आने के लक्षण पैदा हो रहे हैं। रील देखने में उनमें न्यूरो केमिकल डोपामीन का अधिक रिसाव हो जा रहा है। इससे उन्हें खुशी मिलती है जिससे लत पड़ जाती है। विभाग में एक साल में 50 बच्चों का परीक्षण किया गया है।

इन बातों का रखें ध्यान

  • बच्चों को मोबाइल न दें, उनके सामने खुद भी स्क्रीन में व्यस्त न रहें।
  • घर के लोग बच्चे से खूब बात करें, उसकी पसंदीदा चीजों को दें।
  • कोई चीज दिखाएं, फिर बच्चे को उसके बारे में बताएं।
  • बच्चे को बाहर घुमाने ले जाएं।
  • उसे हमउम्र बच्चों के साथ खेलने के लिए प्रेरित करें।
  • फूड हैबिट विकसित करें, उसे घर में बनने वाली चीजें खिलाएं, उनके बारे में पूछें।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed