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दिल्ली से हरिद्वार का सफर सिर्फ 1.5 घंटे में!: नितिन गडकरी ने इस नए रोड प्रोजेक्ट को लेकर क्या घोषणा की?
Tue, 27 Oct 2026 05:29 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Tue, 27 Oct 2026 05:29 PM IST
सार
- दिल्ली से हरिद्वार का सफर जल्द ही पहले से काफी कम समय में पूरा हो सकता है।
- केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि दिल्ली से हरिद्वार को जोड़ने वाली नई सड़क परियोजना जल्द ही खोली जाएगी।
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Delhi to Haridwar
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
दिल्ली-एनसीआर से धार्मिक नगरी हरिद्वार जाने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए एक बेहद खुशखबरी सामने आई है। अगले महीने एक नए एक्सप्रेसवे/रोड प्रोजेक्ट के शुरू होने के बाद दिल्ली से हरिद्वार की यात्रा केवल डेढ़ घंटे में पूरी की जा सकेगी। सीआईआई (CII) के राष्ट्रीय सम्मेलन 'हाईवेज ऑफ इंडियाज फ्यूचर: स्मार्ट, सेफ एंड सस्टेनेबल' में बोलते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने यह बड़ा एलान किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार का इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर न केवल यात्रा के समय को घटा रहा है। बल्कि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देकर रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रहा है।
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दिल्ली-देहरादून और हरिद्वार कनेक्टिविटी को लेकर नितिन गडकरी ने क्या कहा?
नितिन गडकरी ने बताया कि हाल ही में शुरू किए गए दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर ने दोनों शहरों के बीच यात्रा के समय को सात घंटे से घटाकर महज दो घंटे कर दिया है।
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- हरिद्वार के लिए अगला प्रोजेक्ट: उन्होंने कहा, "हमने हाल ही में दिल्ली से देहरादून मार्ग खोला है, जहां पहले सात घंटे लगते थे और अब आप दो घंटे में जा सकते हैं। इसी कड़ी में अब अगले महीने हम दिल्ली से हरिद्वार रूट को भी खोलने जा रहे हैं।"
- सफर में बचत: इस नए मार्ग के खुलते ही दिल्ली से हरिद्वार पहुंचने का समय सिमट कर लगभग डेढ़ घंटा रह जाएगा, जिससे यात्रियों को ट्रैफिक जाम से बड़ी राहत मिलेगी।
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धार्मिक पर्यटन और 'चारधाम' रूट पर ट्रैफिक का क्या असर पड़ा है?
सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार से देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों पर आने-जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भारी उछाल आया है:- चारधाम परियोजना: गडकरी ने बताया कि चारधाम सड़क परियोजना का 80 से 85 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। इसके चलते दिल्ली से बद्रीनाथ और केदारनाथ जाने वाले ट्रैफिक और श्रद्धालुओं की संख्या में तीन गुना की बढ़ोतरी हुई है।
- अन्य धार्मिक क्षेत्र: इसके अलावा अयोध्या, महाराष्ट्र के पंढरपुर पालखी मार्ग, पूर्वोत्तर और जम्मू-कश्मीर जैसे क्षेत्रों में सुरंगों, सड़कों और पुलों का जाल बिछाया जा रहा है।
- निवेश आंकड़े: सरकार के पास धार्मिक पर्यटन से जुड़ी 1 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाएं और 2 लाख करोड़ रुपये की टनल (सुरंग) परियोजनाएं जारी हैं। पर्यटन क्षेत्र में होने वाले 49 प्रतिशत कैपिटल एक्सपेंडिचर (पूंजीगत खर्च) से रोजगार की अपार संभावनाएं बन रही हैं।
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से ग्रामीण और आदिवासी जिलों को क्या फायदा होगा?
ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के आर्थिक फायदों का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे देश के विकास से अछूते रहे ग्रामीण, आकांक्षी और आदिवासी जिलों को बड़े आर्थिक केंद्रों से जोड़ रहा है:- हरियाणा और राजस्थान: हरियाणा के आकांक्षी जिलों के साथ-साथ राजस्थान के अलवर, दौसा, सवाई माधोपुर और बूंदी जैसे जिलों को बेहतर कनेक्टिविटी मिल रही है।
- मध्य प्रदेश और गुजरात: मध्य प्रदेश के रतलाम व झाबुआ और गुजरात के दाहोद जैसे आदिवासी बहुल जिले सीधे तौर पर देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और दिल्ली से जुड़ रहे हैं, जिससे वहां व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलेगी।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर ₹100 खर्च करने से अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ता है?
नितिन गडकरी ने इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताया। उनके अनुसार:- मल्टीप्लायर इफेक्ट: इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च किए गए हर 100 रुपये का अर्थव्यवस्था पर 325 रुपये का सकारात्मक आर्थिक प्रभाव पड़ता है। जिससे सीधे तौर पर जीडीपी (GDP) में इजाफा होता है।
- रोजगार और निर्माण: सड़क निर्माण के चरण में सीमेंट, स्टील और भारी मशीनरी की मांग बढ़ती है, जिससे प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होते हैं।
- लॉजिस्टिक्स कॉस्ट में कमी: बेहतर कनेक्टिविटी से परिवहन लागत घटती है। जिसका सीधा फायदा उद्योगों, व्यापार, पर्यटन और शहरों के समग्र विकास को मिलता है।