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Kanpur: कैसे होंगे आविष्कार... योजना को फंड की दरकार, परिषदीय स्कूलों के छात्र नहीं किए जा रहे प्रशिक्षित
Sun, 22 Jan 2023 03:36 PM IST
शिखा पांडेय
दिव्यांश सिंह, संवाद
दिव्यांश सिंह, संवाद
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 22 Jan 2023 03:36 PM IST
सार
राष्ट्रीय आविष्कार योजना की शुरुआत में 2018-19 में जिले के 26 परिषदीय स्कूलों में 2.5 लाख रुपये आविष्कार प्रयोगशाला बनवाई गई थी। योजना के तहत प्रशिक्षित शिक्षकों की जिम्मेदारी थी कि इन प्रयोगशालाओं में छात्रों को प्रशिक्षण दें। वर्तमान में ये प्रयोगशाला खस्ताहाल हालत में हैं।
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बीएसए कार्यालय में बनी लैब
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कानपुर जिले में राष्ट्रीय आविष्कार योजना बजट की कमी से ठप हो गई है। बीते तीन साल से किसी भी शिक्षक को प्रशिक्षण नहीं दिया गया है। ऐसे में परिषदीय स्कूलों के छात्रों को आविष्कार संबंधी प्रशिक्षण नहीं मिल पा रहा है। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से संचालित परिषदीय स्कूलों के छात्रों में गणित और विज्ञान में नवाचारी मॉडल बनाने, रुचि बढ़ाने के लिए शिक्षा मंत्रालय ने यह योजना शुरू की थी।
2017 में बीएसए कार्यालय में बनी यूनिट ऑफ साइंस एंड एजुकेशनल डेवलपमेंट (यूनिसेड) की ओर से प्रयोगशाला बनवाई गई थी। वर्तमान में प्रयोगशाला में यूनिसेड के दो कर्मचारी हैं। उन्होंने बताया कि योजना से संबंधित कामों को शहर की कंपनियों से मिलने वाले सीएसआर फंड से किया जाता है। बीते कई सालों से फंड न मिलने की वजह से योजना ठप पड़ी है। शिक्षकों को अंतिम प्रशिक्षण 21 सितंबर 2019 को दिया गया था।
26 स्कूलों में बनी थी लैब
योजना की शुरुआत में 2018-19 में जिले के 26 परिषदीय स्कूलों में 2.5 लाख रुपये आविष्कार प्रयोगशाला बनवाई गई थी। योजना के तहत प्रशिक्षित शिक्षकों की जिम्मेदारी थी कि इन प्रयोगशालाओं में छात्रों को प्रशिक्षण दें। वर्तमान में ये प्रयोगशाला खस्ताहाल हालत में हैं। बीएसए कार्यालय में बनी प्रयोगशाला में शिक्षकों को प्रशिक्षित करने के लिए ब्रेन मॉडल, मून मॉडल, जेनरेटर का मॉडल, कैलिडोस्कोप, कंकाल का मॉडल, इलेक्ट्रिक बेल और गणित के मॉडल हैं।
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प्रयोगशाला है या नहीं, शिक्षकों को पता ही नहीं
गांधीनगर स्थित यूपीएस मॉडल प्रेमनगर के प्रधानाध्यापक सुभाष यादव से जब राष्ट्रीय आविष्कार प्रयोगशाला की बात पूछी गई तो उन्होंने एक कमरे को खोलकर दिखाया कहा कि यह प्रयोगशाला है। किसने बनवाई पता नहीं, मैं स्कूल में नया आया हूं। प्रयोगशाला में रखे कुछ उपकरणों में धूल जमा थी। वहीं, डिप्टी पड़ाव स्थित सरकारी स्कूल के प्रधानाध्यापक शहनबाज ने बताया कि यहां कोई लैब नहीं है।
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2017 में बीएसए कार्यालय में बनी यूनिट ऑफ साइंस एंड एजुकेशनल डेवलपमेंट (यूनिसेड) की ओर से प्रयोगशाला बनवाई गई थी। वर्तमान में प्रयोगशाला में यूनिसेड के दो कर्मचारी हैं। उन्होंने बताया कि योजना से संबंधित कामों को शहर की कंपनियों से मिलने वाले सीएसआर फंड से किया जाता है। बीते कई सालों से फंड न मिलने की वजह से योजना ठप पड़ी है। शिक्षकों को अंतिम प्रशिक्षण 21 सितंबर 2019 को दिया गया था।
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26 स्कूलों में बनी थी लैब
योजना की शुरुआत में 2018-19 में जिले के 26 परिषदीय स्कूलों में 2.5 लाख रुपये आविष्कार प्रयोगशाला बनवाई गई थी। योजना के तहत प्रशिक्षित शिक्षकों की जिम्मेदारी थी कि इन प्रयोगशालाओं में छात्रों को प्रशिक्षण दें। वर्तमान में ये प्रयोगशाला खस्ताहाल हालत में हैं। बीएसए कार्यालय में बनी प्रयोगशाला में शिक्षकों को प्रशिक्षित करने के लिए ब्रेन मॉडल, मून मॉडल, जेनरेटर का मॉडल, कैलिडोस्कोप, कंकाल का मॉडल, इलेक्ट्रिक बेल और गणित के मॉडल हैं।
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शहर में सीएसआर फंड नहीं मिल पा रहा है। इस वजह से ऑफलाइन प्रशिक्षण रुका है। शिक्षकों को ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया जा रहा है। डीजी बेसिक शिक्षा से बजट को लेकर चर्चा हुई है। मार्च-अप्रैल से 50-50 शिक्षकों के बैच का ऑफलाइन प्रशिक्षण शुरू होगा। छात्रों को आईआईटी कानपुर के सहयोग से कुछ स्किल डेवलपमेंट के कोर्स भी कराए जाएंगे। - अवनीश त्रिपाठी, राष्ट्रीय सलाहकार, राष्ट्रीय आविष्कार योजना
प्रयोगशाला है या नहीं, शिक्षकों को पता ही नहीं
गांधीनगर स्थित यूपीएस मॉडल प्रेमनगर के प्रधानाध्यापक सुभाष यादव से जब राष्ट्रीय आविष्कार प्रयोगशाला की बात पूछी गई तो उन्होंने एक कमरे को खोलकर दिखाया कहा कि यह प्रयोगशाला है। किसने बनवाई पता नहीं, मैं स्कूल में नया आया हूं। प्रयोगशाला में रखे कुछ उपकरणों में धूल जमा थी। वहीं, डिप्टी पड़ाव स्थित सरकारी स्कूल के प्रधानाध्यापक शहनबाज ने बताया कि यहां कोई लैब नहीं है।