UP: शुगर बढ़ी…गुर्दा खराब तो आंखों में जल्दी हो रहा काला मोतिया, ग्लूकोमा के रोगियों पर अध्ययन में हुई पुष्टि
Kanpur Health News: डॉ. शालिनी का कहना है कि डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, फैटी लिवर आदि के रोगी बढ़ रहे हैं, उसी अनुपात में ग्लूकोमा के रोगियों में भी इजाफा हुआ है। अध्ययन में इस बात की पुष्टि हुई है। थॉयरायड के रोगियों में काला मोतिया का रिस्क कम मिला है।
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Study On Glaucoma Patients: डायबिटीज रोगी के अगर गुर्दों में भी दिक्कत आ गई है, तो उसे काला मोतिया (ग्लूकोमा) से आंख की रोशनी जाने का खतरा बढ़ जाएगा। साथ ही फैटी लिवर, खराब कोलेस्ट्राल, खून में चिकनाई और नीचे वाला डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर से भी आंखों में दबाव बढ़ने लगता है, जिससे काला मोतिया हो जाता है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग में हुए अध्ययन में यह पता चला है। काला मोतिया से आंख की रोशनी जाने पर फिर वापस नहीं होती।
काला मोतिया के रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। नेत्र रोग विभाग के शोध में 40 साल से अधिक आयु के 525 रोगियों को शामिल किया गया। इनमें 63 फीसदी पुरुष रहे हैं। जब रोगियों की स्थिति का अध्ययन किया गया तो हैरत में डालने वाले तथ्य शोध करने वाली टीम के सामने आए। शोध की अगुवा नेत्र रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ. शालिनी मोहन ने बताया कि डायबिटीज रोगियों में काला मोतिया होने का खतरा आम रोगी की तुलना में दोगुना अधिक होता है।
डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर के बढ़ने से आंखों का प्रेशर भी बढ़ने लगता है
अगर रोगी को डायबिटीज भी है और उसके गुर्दे में खराबी आ गई और सीरम क्रेटेनिन बढ़ने लगा तो काला मोतिया होने का खतरा साढ़े तीन गुना बढ़ जाता है। अध्ययन से यह भी पता चला कि अगर किसी व्यक्ति के नीचे वाला डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर सामान्य 80 के स्थान पर 100 के ऊपर रहता है, तो भी काला मोतिया होने का खतरा बढ़ता है। डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर के बढ़ने से आंखों का प्रेशर भी बढ़ने लगता है।
ग्लूकोमा के रोगियों में भी इजाफा हुआ
इसके अलावा काला मोतिया के रोगियों में सामान्य रोगियों की तुलना में खराब कोलेस्ट्राल एलडीएल और खून में चिकनाई बढ़ी पाई गई। काला मोतिया के रोगियों का लिवर फैटी मिला है। डॉ. शालिनी का कहना है कि डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, फैटी लिवर आदि के रोगी बढ़ रहे हैं, उसी अनुपात में ग्लूकोमा के रोगियों में भी इजाफा हुआ है। अध्ययन में इस बात की पुष्टि हुई है। थॉयरायड के रोगियों में काला मोतिया का रिस्क कम मिला है।
ऐसे होता है काला मोतिया
आंखों में एक्युअस ह्युमर नामक द्रव्य अधिक बनने से दबाव बढ़ता है। इससे धीरे-धीरे ऑप्टिक तंत्रिका क्षतिग्रस्त होने लगती है। यही तंत्रिका मस्तिष्क तक देखी हुई वस्तु का मैसेज पहुंचाती है। जैसे-जैसे यह तंत्रिका क्षतिग्रस्त होती है व्यक्ति को दिखना कम होता है। देखने की परिधि कम हो जाती है, फिर रोशनी चली जाती है।
ओमेगा-3 फैटी एसिड कम करता रिस्क
डॉ. शालिनी ने बताया कि ओमेगा-3 फैटी एसिड से काला मोतिया होने का खतरा कम होता है। अखरोट, बादाम आदि में भी यह भरपूर मात्रा में होता है।