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Kanpur: कैमरे और सुरक्षा गार्डों से बचने के लिए लगाया ज्ञान, ई-रैगिंग कर किया परेशान

Wed, 05 Feb 2025 11:30 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Wed, 05 Feb 2025 11:30 PM IST
सार

Kanpur News: जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में ई रैगिंग के प्रयास का पहला मामला सामने आया है। मामले में आठ छात्रों पर पहली कार्रवाई की गई है।

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Kanpur: Gave knowledge to avoid cameras and security guards, harassed by e-ragging
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में ई-रैगिंग के प्रयास का यह पहला मामला सामने आया है। एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्रों के हॉस्टल के चारों तरफ सीसीटीवी कैमरे और सुरक्षा गार्डों का पहरा रहता है। इनसे बचने के लिए सीनियर छात्रों ने ई-रैगिंग का रास्ता खोजा। वहीं, शिकायत के बाद जांच व साक्ष्य मिलने पर कॉलेज प्रबंधन ने त्वरित कार्रवाई की। ऐसे मामले में यह पहली कार्रवाई भी है।
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प्राचार्य डॉ. संजय काला ने कहा कि रैगिंग अपराध है, इसे लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति है। कार्रवाई के जरिये सीनियर छात्रों को मैसेज दिया गया कि कोई शरारत बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि इसके पहले ई-रैगिंग के प्रयास की शिकायत कहीं दर्ज नहीं की गई है। रैगिंग के प्रयास में छात्रों ने बहुत दिमाग लगाया। छात्रों ने नई आईडी बनाई और फर्जी नाम रखा जिससे वह पकड़ में न आएं, लेकिन जांच में सारा भेद खुल गया। जिस लैपटॉप से इंस्टाग्राम मैसेज किया गया, उसका नंबर भी पता चल गया। साइबर सेल ने यह भी पता लगाया कि लैपटॉप किस दुकान से खरीदा गया और खरीदार कौन था। मैसेज किस लोकेशन से और किस वक्त भेजा गया, इसका भी पता लग गया।
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आईडी का ब्योरा लेने के लिए जांच टीम ने इंस्टाग्राम से अनुमति ली थी। इसके बाद अकाउंट चेक किए गए। इसमें पता चला कि सीनियर छात्र जूनियर को मैसेज करके कहते थे कि अपना छोड़कर हमारा काम मैनुअल करो। इसके साथ ही ग्रॉस भेजें। एनाटमी विभाग में पार्थिव शरीर का विच्छेदन करके चार्ट बनाने को ग्रास कहते हैं। इसी तरह फोन कॉल पर जूनियर छात्रों से उल्टी-सीधी बातें व अपशब्द कहे गए। डॉ. काला ने बताया कि सभी छात्रों को सख्त चेतावनी दे दी गई है।
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एंड्रॉयड फोन पर लगाई जाएगी पाबंदी
प्राचार्य डॉ. काला ने कहा कि छात्रों के एंड्रॉयड फोन रखने पर पाबंदी लगाई जाएगी। अगर किसी को रखना है तो सामान्य फोन रखे, जिससे जरूरत के समय किसी से संपर्क कर लें। छात्रावास में लैंड लाइन की व्यवस्था रहेगी, उससे फोन कर सकते हैं।
 

हेल्पलाइन पर पहले की गईं शिकायतें
मेडिकल कॉलेज में इसके पहले भी एंटी रैगिंग सेल में शिकायतें की गई हैं। जांच के बाद मामले में साक्ष्य नहीं मिले और बात खत्म हो गई। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के पुरातन छात्र और उर्सला में नेत्र रोग विशेषज्ञ रहे एक डॉक्टर ने भी हेल्प लाइन में दो साल पहले शिकायत की थी। इस संबंध में एक वीडियो डाला गया था, लेकिन जांच में वह कहीं बाहर का निकला। बाद में नेत्ररोग विशेषज्ञ ने आकर कॉलेज प्रबंधन से माफी मांगी। इसी तरह तीन साल में पांच-छह बार एंटी रैगिंग हेल्पलाइन में शिकायतें की गईं। कॉलेज की एंटी रैगिंग कमेटी की जांच में मामले गलत पाए गए।
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