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Kanpur: पाकिस्तानी आईपी एड्रेस से कस्टम अधिकारी बन ठगी करने में चार गिरफ्तार
Thu, 26 Feb 2026 10:42 PM IST
Shikha Pandey
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: Shikha Pandey
Updated Thu, 26 Feb 2026 10:42 PM IST
सार
Kanpur News: साइबर क्राइम ब्रांच ने प्रतिबिंब पोर्टल से मिल रही शिकायतों की जांच के बाद आरोपियों को धर दबोचा।
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पुलिस गिरफ्त में आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
साइबर क्राइम ब्रांच ने गुरुवार को ठगी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में एक महिला सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। यह गिरोह संदेश ऐप से पाकिस्तानी आईपी पते के सहारे वारदातों को अंजाम देता था। डीसीपी क्राइम श्रवण कुमार सिंह ने बताया कि इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर के प्रतिबिंब पोर्टल पर कानपुर के एक मोबाइल नंबर के कई जगह हुई वारदात में इस्तेमाल होने की जानकारी आ रही थी।
आरोपी स्वयं को कस्टम अधिकारी या पुलिस अफसर बताकर लोगों को ठगते थे। ठगी के लिए एक बंद मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किया जा रहा था। टेलीकॉम कंपनी इस नंबर को कानपुर में अपने सेवा प्रदाता कंप्यूटर पर उपयोग कर रही थी। इसी कारण कानपुर शहर ठगी का प्रमुख केंद्र बन रहा था। पकड़े गए लोगों में बहराइच के कमलेश कुमार गौतम, विकास गौतम, लखीमपुर खीरी की राखी मिश्रा और दीपक शर्मा हैं। आरोपी पाकिस्तान के इस्लामाबाद की आईपी पते से ठगी करते थे। बंद नंबर का संदेश एप चला रहे थे जिस पर पुलिस की प्रोफाइल तस्वीर थी। सेवा प्रदाता कंप्यूटर पर उपयोग होने से कोई अलर्ट संदेश नहीं आता था। आरोपियों के पास से मोबाइल, दस्तावेज और अन्य सामान बरामद हुए हैं। गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।
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आरोपी स्वयं को कस्टम अधिकारी या पुलिस अफसर बताकर लोगों को ठगते थे। ठगी के लिए एक बंद मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किया जा रहा था। टेलीकॉम कंपनी इस नंबर को कानपुर में अपने सेवा प्रदाता कंप्यूटर पर उपयोग कर रही थी। इसी कारण कानपुर शहर ठगी का प्रमुख केंद्र बन रहा था। पकड़े गए लोगों में बहराइच के कमलेश कुमार गौतम, विकास गौतम, लखीमपुर खीरी की राखी मिश्रा और दीपक शर्मा हैं। आरोपी पाकिस्तान के इस्लामाबाद की आईपी पते से ठगी करते थे। बंद नंबर का संदेश एप चला रहे थे जिस पर पुलिस की प्रोफाइल तस्वीर थी। सेवा प्रदाता कंप्यूटर पर उपयोग होने से कोई अलर्ट संदेश नहीं आता था। आरोपियों के पास से मोबाइल, दस्तावेज और अन्य सामान बरामद हुए हैं। गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।
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पुलिस गिरफ्त में आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
कमलेश और राखी साथ करते थे नौकरी
साइबर क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर सुधीर यादव ने बताया कि कमलेश और राखी मिश्रा पहले लखीमपुर खीरी में नौकरी करते थे। दोनों का कार्य मार्केटिंग का था। कमलेश पूर्व में जेल जा चुका है। उसकी जेल के अंदर ही दीपक शर्मा से दोस्ती हुई थी। आरोपियों ने बाहर आने के बाद गैंग तैयार किया। शुरुआत में कमलेश पेट्रोल पंप के बार कोड के सहारे ठगी करता था। वही मास्टरमाइंड है। विकास रुपयों को ऑनलाइन ट्रांसफर कराता था। राखी मिश्रा का कार्य सरकारी योजनाओं, फ्लैट का प्रलोभन देना और धमकाना रहता था।
अब तक 36 लोगों को बना चुका शिकार
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, गिरोह अब तक 36 लोगों को शिकार बना चुका है। इसमें आगरा, हरिद्वार, श्रावस्ती, पटना, सासाराम, जयपुर आदि जगह के लोग शामिल हैं। गिरोह में शामिल अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है। टेलीकॉम कंपनी के कानपुर कार्यालय के स्टाफ से भी जानकारी जुटाई जाएगी। आखिर कैसे सर्वर के नंबर पर व्हाट्सएप नंबर चालू होने के बावजूद उन्हें जानकारी नहीं हुई। इस कार्य में किसी स्टाफ की मिलीभगत तो नहीं है।
साइबर क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर सुधीर यादव ने बताया कि कमलेश और राखी मिश्रा पहले लखीमपुर खीरी में नौकरी करते थे। दोनों का कार्य मार्केटिंग का था। कमलेश पूर्व में जेल जा चुका है। उसकी जेल के अंदर ही दीपक शर्मा से दोस्ती हुई थी। आरोपियों ने बाहर आने के बाद गैंग तैयार किया। शुरुआत में कमलेश पेट्रोल पंप के बार कोड के सहारे ठगी करता था। वही मास्टरमाइंड है। विकास रुपयों को ऑनलाइन ट्रांसफर कराता था। राखी मिश्रा का कार्य सरकारी योजनाओं, फ्लैट का प्रलोभन देना और धमकाना रहता था।
अब तक 36 लोगों को बना चुका शिकार
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, गिरोह अब तक 36 लोगों को शिकार बना चुका है। इसमें आगरा, हरिद्वार, श्रावस्ती, पटना, सासाराम, जयपुर आदि जगह के लोग शामिल हैं। गिरोह में शामिल अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है। टेलीकॉम कंपनी के कानपुर कार्यालय के स्टाफ से भी जानकारी जुटाई जाएगी। आखिर कैसे सर्वर के नंबर पर व्हाट्सएप नंबर चालू होने के बावजूद उन्हें जानकारी नहीं हुई। इस कार्य में किसी स्टाफ की मिलीभगत तो नहीं है।