कानपुर: CMO दफ्तर में वर्षों से जारी फिट-अनफिट का खेल, पहले ही रिपोर्ट सौंप चुकी थी एलआईयू, जल्द होगी कार्रवाई
Kanpur News: कानपुर सीएमओ कार्यालय में मेडिकल परीक्षण के दौरान फिट-अनफिट करने का गोरखधंधा वर्षों से चल रहा है। एलआईयू ने इस धांधली को लेकर 32 पन्नों की एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर पहले ही उच्चाधिकारियों को सौंप दी थी। रिपोर्ट के अनुसार, सबसे बड़ी वसूली यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा के दौरान हुई, जहां 5 से 10 लाख रुपये लेकर अनफिट अभ्यर्थियों को भी फिट करार दिया गया।
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कानपुर में होमगार्ड अभ्यार्थियों से मेडिकल के नाम पर वसूली करने के खेल का भले ही अब खुलासा हुआ हो, लेकिन सीएमओ कार्यालय से कई वर्षों से फिट-अनफिट का खेल खेल जा रहा है। इसकी भनक खुफिया विभाग (एलआईयू) को पहले से थी। खुफिया ने 32 पन्नों की अपनी रिपोर्ट में विस्तार से इस गोरखधंधे का जिक्र किया है, जिसे पहले ही उच्चाधिकारियों को सौंपा जा चुका है।
हालांकि, इस पर अब तक कार्रवाई नहीं की गई थी। रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक वसूली यूपी-पुुलिस भर्ती परीक्षा के दौरान शामिल हुए अभ्यर्थियों से की गई। इसमें कई अनफिट अभ्यर्थियों को हाईकोर्ट से याचिका डलवाकर फिट का सर्टिफिकेट दिया गया। कुछ लोगों को फिट होने के बाद भी अनफिट करार दिया गया। एलआईयू ने करीब 24 ऐसे लोगों का जिक्र किया है, जिन्हें मेडिकल बोर्ड ने पहले अनफिट करार दिया।
सीएमओ कार्यालय में फैले भ्रष्टाचार का भी जिक्र
इसके बाद में वे सीएमओ कार्यालय से फिटनेस प्रमाणपत्र लेकर लौटे। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि एलआईयू ने कुछ माह पहले नगर निगम, केडीए, आरटीओ और स्वास्थ्य विभाग में चल रही धांधली की विस्तृत रिपोर्ट बनाकर दी थी। इसी रिपोर्ट के आधार पर आरटीओ और नगर निगम में हाल ही बड़े स्तर पर कार्रवाई की गई थी। इसी रिपोर्ट में सीएमओ कार्यालय में फैले भ्रष्टाचार का भी जिक्र है। हालांकि, कार्रवाई अभी बाकी है।
हाईकोर्ट में हमसे जांच कराने की याचिका डालना
पुलिस भर्ती परीक्षा में शारीरिक नाप-तौल और मेडिकल परीक्षण होता है। बोर्ड में अलग-अलग जगहों के डॉक्टर व प्रशासनिक अधिकारी होते हैं। इस दौरान कुछ लोगों को वजन-लंबाई या छाती कम होने की बात कह दी जाती है। दूसरे चरण के मेडिकल में आंख, नाक, कान, फुटप्रिंट आदि का परीक्षण होता है।
अभ्यर्थियों को पास करने के लिए 5-10 लाख तक लिए
सबसे अधिक अभ्यर्थियों को इसी परीक्षण में फेल किया जाता है। फेल अभ्यर्थी जब बाहर निकलता है तो उसे बताया जाता है कि हाईकोर्ट में सीएमओ के नेतृत्व में गठित पैनल से परीक्षण कराने की याचिका डालना। हाईकोर्ट के आदेश पर सीएमओ जो टीम गठित करते हैं उस पैनल के डॉक्टरों को पहले से ही निर्देश होता है कि क्या करना है। ऐसे अभ्यर्थियों को पास करने के लिए 5-10 लाख रुपये तक लिए गए।
खुफिया विभाग ने कई विभागों में धांधली की रिपोर्ट सौंपी है। रिपोर्ट में दिए गए तथ्यों के आधार पर उनपर नजर रखी जा रही है। जल्द कार्रवाई भी की जाएगी। -डॉ. विपिन ताडा, एडिश्नल सीपी, लॉ एंड ऑर्डर