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Kanpur: बुखार कर रहा है निमोनिया, दो रोगियों की मौत, गले के संक्रमण के बाद फेफड़ों पर आता असर
Sat, 24 Aug 2024 07:51 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 24 Aug 2024 07:51 PM IST
सार
Kanpur News: वायरल संक्रमण तेज हो गया है। सामान्य दवाओं से बुखार नहीं उतर रहा है। गले के संक्रमण के बाद फेफड़ों पर असर आ रहा है।
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हैलट अस्पताल
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
बारिश के मौसम में वायरल संक्रमण से बुखार के रोगी बढ़ गए हैं। बुखार के साथ रोगियों के पहले गले में संक्रमण होता है। इसके बाद फेफड़े संक्रमित हो जाते हैं। इससे निमोनिया के रोगी बढ़ रहे हैं। शनिवार को निमोनिया के दो रोगियों की मौत हो गई। हैलट में 24 घंटे में 294 रोगी भर्ती हुए हैं। इनमें सबसे अधिक रोगी मेडिसिन विभाग की यूनिट में भर्ती हुए। इसके साथ ही ओपीडी में विभिन्न विभागों में तीन हजार 338 रोगियों ने स्वास्थ्य परीक्षण कराया।
जरीब चौकी क्षेत्र के रहने वाले जगदीश (60) की निमोनिया से मौत हो गई। उनका हैलट में ओपीडी स्तर पर इलाज चल रहा था। परिजनों ने बताया कि बुखार के बाद सांस में दिक्कत हो गई थी। इसके साथ ही कल्याणपुर के रहने वाले रोगी विमल (55) की निमोनिया से मौत हुई। उनके फेफड़ों में पहले से बैक्टीरियल संक्रमण रहा है। चेस्ट हॉस्पिटल में ओपीडी स्तर पर इलाज चल रहा था। उनके भाई रत्नेश ने बताया कि तीन पहले बुखार आया तो तबियत बिगड़ गई।
एक्सरे जांच रिपोर्ट में डॉक्टर ने निमोनिया बताया था। इसके अलावा हैलट ओपीडी में बुखार के रोगी अधिक आए। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के सीनियर फिजीशियन डॉ. विशाल कुमार गुप्ता का कहना है कि बहुत से रोगियों का सामान्य दवाओं से बुखार नहीं उतरता तो दूसरी दवाएं देनी पड़ती है। इसके साथ ही वायरल संक्रमण से पुराने रोगों की जटिलताएं बढ़ जाती हैं।
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जरीब चौकी क्षेत्र के रहने वाले जगदीश (60) की निमोनिया से मौत हो गई। उनका हैलट में ओपीडी स्तर पर इलाज चल रहा था। परिजनों ने बताया कि बुखार के बाद सांस में दिक्कत हो गई थी। इसके साथ ही कल्याणपुर के रहने वाले रोगी विमल (55) की निमोनिया से मौत हुई। उनके फेफड़ों में पहले से बैक्टीरियल संक्रमण रहा है। चेस्ट हॉस्पिटल में ओपीडी स्तर पर इलाज चल रहा था। उनके भाई रत्नेश ने बताया कि तीन पहले बुखार आया तो तबियत बिगड़ गई।
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एक्सरे जांच रिपोर्ट में डॉक्टर ने निमोनिया बताया था। इसके अलावा हैलट ओपीडी में बुखार के रोगी अधिक आए। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के सीनियर फिजीशियन डॉ. विशाल कुमार गुप्ता का कहना है कि बहुत से रोगियों का सामान्य दवाओं से बुखार नहीं उतरता तो दूसरी दवाएं देनी पड़ती है। इसके साथ ही वायरल संक्रमण से पुराने रोगों की जटिलताएं बढ़ जाती हैं।
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