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UP: व्हाट्सएप पर आती थी डिग्री की डिमांड, इंदौर में मार्कशीट संग होती छपाई; इंटर पास 'डॉक्टर' ने खोले बड़े राज
Tue, 19 May 2026 02:43 PM IST
Sharukh Khan
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
Published by: Sharukh Khan
Updated Tue, 19 May 2026 02:43 PM IST
सार
कानपुर में फर्जी डिग्री की खरीद-फरोख्त के मामले में पकड़े गए मनीष ने एसआईटी को कई अहम जानकारियां दी हैं। उसने बताया है कि गिरोह बेहद संगठित और डिजिटल तरीके से काम करता था। फर्जी डिग्री और मार्कशीट की डिमांड व्हाट्सएप पर ली जाती थी जबकि दस्तावेजों की छपाई इंदौर में कराई जाती थी।
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Kanpur Fake Degree Scam
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
कानपुर पुलिस ने फर्जी डिग्री, मार्कशीट बनाने और बेचने वाले गिरोह के दो नए सदस्यों को एसआईटी ने रविवार को गिरफ्तार किया है। आरोपियों में हैदराबाद निवासी मनीष कुमार अग्रवाल और उन्नाव का कोचिंग संचालक अर्जुन यादव शामिल हैं। पुलिस को जांच में पता चला कि इंटर पास मनीष खुद को डॉक्टर बताकर फर्जी डिग्री का कारोबार कर रहा था। वह हाईस्कूल से लेकर प्रोफेशनल कोर्स तक की फर्जी डिग्रियां और माइग्रेशन सर्टिफिकेट तैयार कराने का भी काम कर रहा था।
सोमवार को पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी देते हुए बताया कि फर्जी डिग्री, मार्कशीट बनाने और बेचने के आरोप में शैलेंद्र ओझा को जेल भेजा जा चुका है। 19 फरवरी को शैलेंद्र की चैट, लेनदेन और कॉल डिटेल्स की जांच की गई थी। इससे मनीष का नाम सामने आया था। मनीष मूलरूप से राजस्थान के सीकर का रहने वाला है। वर्तमान में हैदराबाद के हिमायतनगर में रह रहा था।
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सोमवार को पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी देते हुए बताया कि फर्जी डिग्री, मार्कशीट बनाने और बेचने के आरोप में शैलेंद्र ओझा को जेल भेजा जा चुका है। 19 फरवरी को शैलेंद्र की चैट, लेनदेन और कॉल डिटेल्स की जांच की गई थी। इससे मनीष का नाम सामने आया था। मनीष मूलरूप से राजस्थान के सीकर का रहने वाला है। वर्तमान में हैदराबाद के हिमायतनगर में रह रहा था।
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इंटर पास करने के बाद उसने बीडीएस कोर्स में दाखिला लिया लेकिन असफल हो गया। बाद में वह हैदराबाद में रहने लगा जहां उसने चेन्नई की एक संस्था से कथित डॉक्टरेट उपाधि हासिल की। खुद को डॉक्टर बताने लगा। पूछताछ में उसने अब तक करीब 70 फर्जी मार्कशीट और डिग्रियां तैयार कराने की बात स्वीकारी है।
बताया कि वह तेलंगाना यूनिवर्सिटी से संबद्ध संस्थानों, कुमायूं यूनिवर्सिटी गढ़वाल और फरीदाबाद की लिंग्यात यूनिवर्सिटी के नाम पर डिग्रियां उपलब्ध कराता था। पूछताछ में मनीष ने कानपुर के शेखर गुप्ता और इंदौर के संजय पंजानी का नाम लिया है।
कहा कि इनके माध्यम से मार्कशीट के ऑर्डर और सप्लाई का कारोबार चलाया जा रहा था। मनीष ग्लोबल बुक ऑफ एक्सीलेंस अवॉर्ड नाम से कार्यक्रम भी आयोजित कराता था। उसने मुंबई, बंगलूरू और गोवा में अवॉर्ड शो कराए थे जिनमें अभिनेता और अभिनेत्री समेत कई सेलिब्रिटी शामिल हुए थे। पुलिस को इन कार्यक्रमों की तस्वीरें भी मिली हैं।
दुबई से लौटकर बदलता रहा ठिकाने
पुलिस को जांच में पता चला कि 18 फरवरी को जब किदवईनगर पुलिस ने जूही गोशाला चौराहे स्थित शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन के कार्यालय में छापा मारा था तब मनीष दुबई में था। मार्च में लौटने के बाद वह पुणे, गोवा, बंगलूरू, दिल्ली और फरीदाबाद में लगातार ठिकाने बदलता रहा। आखिरकार एसआईटी ने उसे रविवार शाम यशोदानगर स्थित शनिदेव चौराहे के पास से गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस को जांच में पता चला कि 18 फरवरी को जब किदवईनगर पुलिस ने जूही गोशाला चौराहे स्थित शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन के कार्यालय में छापा मारा था तब मनीष दुबई में था। मार्च में लौटने के बाद वह पुणे, गोवा, बंगलूरू, दिल्ली और फरीदाबाद में लगातार ठिकाने बदलता रहा। आखिरकार एसआईटी ने उसे रविवार शाम यशोदानगर स्थित शनिदेव चौराहे के पास से गिरफ्तार कर लिया।
जांच में मनीष और शैलेंद्र के खातों में करीब 16.44 लाख रुपये के लेनदेन की जानकारी मिली है। अर्जुन यादव ने करीब 20 लाख रुपये मनीष के खाते में ट्रांसफर किए थे। लेनदेन के सुबूत मिलने पर अर्जुन को किदवईनगर थाने लाकर पूछताछ करने के बाद गिरफ्तार किया गया है।
जूही स्थित ऑफिस से मिली थीं हजारों डिग्रियां
किदवईनगर पुलिस ने 18 फरवरी को जूही गोशाला चौराहे स्थित शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन के कार्यालय में छापा मारा था। वहां से नौ राज्यों के 14 विश्वविद्यालयों की मार्कशीट, डिग्रियां और माइग्रेशन सर्टिफिकेट बरामद हुए थे। टीम को यूपी बोर्ड प्रयागराज की 99 मार्कशीट भी मिलीं थीं। मौके से शैलेंद्र कुमार ओझा नागेश मणि त्रिपाठी, जोगेंद्र, अश्वनी कुमार सिंह और गिरफ्तार किया गया था जबकि विनीत और शेखू को बाद में जेल भेजा गया है।
किदवईनगर पुलिस ने 18 फरवरी को जूही गोशाला चौराहे स्थित शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन के कार्यालय में छापा मारा था। वहां से नौ राज्यों के 14 विश्वविद्यालयों की मार्कशीट, डिग्रियां और माइग्रेशन सर्टिफिकेट बरामद हुए थे। टीम को यूपी बोर्ड प्रयागराज की 99 मार्कशीट भी मिलीं थीं। मौके से शैलेंद्र कुमार ओझा नागेश मणि त्रिपाठी, जोगेंद्र, अश्वनी कुमार सिंह और गिरफ्तार किया गया था जबकि विनीत और शेखू को बाद में जेल भेजा गया है।
व्हाट्सएप पर आती थी डिग्री की डिमांड, इंदौर में मार्कशीट संग होती छपाई
डिग्री की खरीद-फरोख्त के मामले में पकड़े गए मनीष ने एसआईटी को कई अहम जानकारियां दी हैं। उसने बताया है कि गिरोह बेहद संगठित और डिजिटल तरीके से काम करता था। फर्जी डिग्री और मार्कशीट की डिमांड व्हाट्सएप पर ली जाती थी जबकि दस्तावेजों की छपाई इंदौर में कराई जाती थी। वहीं, पूछताछ में शहर निवासी शेखर गुप्ता के बारे में बताया है। पुलिस उसकी गिरफ्तारी के प्रयास में जुट गई है।
डिग्री की खरीद-फरोख्त के मामले में पकड़े गए मनीष ने एसआईटी को कई अहम जानकारियां दी हैं। उसने बताया है कि गिरोह बेहद संगठित और डिजिटल तरीके से काम करता था। फर्जी डिग्री और मार्कशीट की डिमांड व्हाट्सएप पर ली जाती थी जबकि दस्तावेजों की छपाई इंदौर में कराई जाती थी। वहीं, पूछताछ में शहर निवासी शेखर गुप्ता के बारे में बताया है। पुलिस उसकी गिरफ्तारी के प्रयास में जुट गई है।
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने कहा कि मनीष ने पुलिस को बताया है कि वर्ष 2019 में वह कानपुर निवासी शेखर गुप्ता के संपर्क में आया था। वह शेखर से मिलने छह बार कानपुर आया है। शेखर ही अलग-अलग राज्यों से ग्राहकों की डिमांड जुटाता था और व्हाट्सएप पर नाम, फोटो, विषय, रोल नंबर और यूनिवर्सिटी की जानकारी भेजता था। इसके बाद तैयार डेटा इंदौर निवासी संजय पंजानी तक पहुंचाया जाता था।
कमिश्नर के मुताबिक संजय पंजानी के पास हाई क्वालिटी प्रिंटिंग सेटअप है जहां प्रोफेशनल डिग्रियां, मार्कशीट और माइग्रेशन सर्टिफिकेट तैयार किए जाते थे। गिरोह केवल सामान्य अंकपत्र ही नहीं बल्कि बीटेक, एमटेक, बीफार्मा, डीफार्मा और एलएलबी जैसे प्रोफेशनल कोर्स की डिग्रियां भी तैयार करता था।
जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी दस्तावेजों को असली दिखाने के लिए यूनिवर्सिटी के लोगो, सीरियल नंबर, डिजिटल सिग्नेचर और बारकोड का भी इस्तेमाल किया जाता था। कई दस्तावेज ऑनलाइन सत्यापन में दिखें इसके लिए एक वेबसाइट का इस्तेमाल किया जा रहा था। पुलिस कमिश्नर ने बताया कि गिरोह का नेटवर्क कई राज्यों तक फैला था। आरोपी हर डिग्री तैयार कराने के बदले 15 हजार रुपये तक लेते थे।
जांच में मनीष और शैलेंद्र के खातों में करीब 16.44 लाख रुपये के लेनदेन की जानकारी मिली है जबकि अर्जुन यादव ने करीब 10 लाख रुपये मनीष के खाते में ट्रांसफर किए थे। जांच में बैंक ट्रांजेक्शन, व्हाट्सएप चैट और कॉल रिकॉर्ड भी मिले हैं। एसआईटी अब फरार आरोपी शेखर गुप्ता और इंदौर के संजय पंजानी की तलाश कर रही है।
सेलिब्रिटी के जरिये बढ़ा रहा था पहुंच और पहचान
जांच में यह भी सामने आया कि मनीष ग्लोबल बुक ऑफ एक्सीलेंस अवॉर्ड नाम से कार्यक्रम आयोजित कराता था। उसने मुंबई, बंगलूरू और गोवा में अवॉर्ड शो कराए थे। मनीष की अभिनेता सोनू सूद, भार्गव, करन मेहरा, कथावाचक जया किशोरी समेत 60 सेलिब्रिटी की साथ फोटो मिली हैं।
जांच में यह भी सामने आया कि मनीष ग्लोबल बुक ऑफ एक्सीलेंस अवॉर्ड नाम से कार्यक्रम आयोजित कराता था। उसने मुंबई, बंगलूरू और गोवा में अवॉर्ड शो कराए थे। मनीष की अभिनेता सोनू सूद, भार्गव, करन मेहरा, कथावाचक जया किशोरी समेत 60 सेलिब्रिटी की साथ फोटो मिली हैं।
कमिश्नर ने किसी भी सेलिब्रिटी की भूमिका संदिग्ध मानने से इन्कार किया है। उनका मानना है कि अवॉर्ड शो और सेलिब्रिटी के जरिये आरोपी अपनी पहुंच व पहचान विदेशों तक बढ़ाना चाहता था। दुबई में भी एक कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी थी।
स्पेशल बच्चों की क्लासेस की आड़
पुलिस के मुताबिक अर्जुन यादव स्पेशल बच्चों के लिए ऑनलाइन क्लासेज की फ्रेंचाइजी चलाता था। वह मॉरीशस की कंपनी लर्निंग पाथ्स और मनीष के नाम रजिस्टर्ड अल्मा किड्स के जरिये शहर के कई स्कूल में क्लासेस संचालित करा रहा है। कंपनी बंद होने के बाद भी कथित रूप से फर्जी शिक्षकों के जरिये क्लासेस जारी है।
पुलिस के मुताबिक अर्जुन यादव स्पेशल बच्चों के लिए ऑनलाइन क्लासेज की फ्रेंचाइजी चलाता था। वह मॉरीशस की कंपनी लर्निंग पाथ्स और मनीष के नाम रजिस्टर्ड अल्मा किड्स के जरिये शहर के कई स्कूल में क्लासेस संचालित करा रहा है। कंपनी बंद होने के बाद भी कथित रूप से फर्जी शिक्षकों के जरिये क्लासेस जारी है।