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Kanpur: जूट और ढैंचा से बना कपड़ा सूरज की किरणों से करेगा बचाव, यूपीटीटीआई के विशेषज्ञों ने किया तैयार

Tue, 18 Oct 2022 02:45 PM IST
शिखा पांडेय दिव्यांश सिंह, कानपुर
दिव्यांश सिंह, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Tue, 18 Oct 2022 02:45 PM IST
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Kanpur: Fabric made of jute and dhaincha will protect against sun rays
जूट और ढैंचा से बना कपड़ा - फोटो : अमर उजाला

उत्तर प्रदेश वस्त्र एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (यूपीटीटीआई) के विशेषज्ञों ने ढैंचा और जूट से ऐसा कपड़ा तैयार किया है जो शरीर को सूर्य की अल्ट्रावायलेट (पराबैंगनी) किरणों से बचाएगा। अभी जो कपड़ा तैयार किया गया है, वह मोटा है। इसे पहनने योग्य बनाने के लिए धागों को और पतला करने की दिशा में काम चल रहा है।

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दावा है कि इस कपड़े से बने कपड़े पहनने के बाद त्वचा झुलसेगी नहीं। इस कपड़े से पर्दे, सेना के टेंट, सब्जियों को सुरक्षित रखने के लिए शेड भी बनाया जा सकता है। संस्थान के विशेषज्ञों की इस तकनीक और शोध को अंतरराष्ट्रीय जर्नल (जर्नल ऑफ नेचुरल फाइबर) में प्रकाशित किया गया है।
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साथ ही कपड़े को पेटेंट कराने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। संस्थान के टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी के प्रो. मुकेश सिंह, डॉ. अरुण कुमार सिंह गंगवार, डॉ. शुभंकर मैती, डॉ. प्रशांत विश्नोई ने कपड़ा विकसित किया है। फाइबर और कपड़ा गोरखपुर के महावीर जूट मिल में तैयार किया गया है। 

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ढैंचा से पहली बार बना फाइबर, लिगनिन की मात्रा सबसे ज्यादा
डॉ. अरुण कुमार सिंह गंगवार ने बताया कि जूट और ढैंचा फाइबर को मिलाकर नया फाइबर बनाया गया। इस शोध में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ढैंचा से फाइबर पहली बार बनाया गया है। शोध में पाया गया कि इसमें लिगनिन की मात्रा 22 से 24 फीसदी है। लिगनिन सूर्य की हानिकारक किरणों से बचाव करता है। वहीं, जूट में 14 से 16 फीसदी लिगनिन पाई जाती है। अगले चरण में कपड़े में जूट की मात्रा को कम करके कपड़ा बनाया जाएगा।

किसानों को मिलेगा लाभ 
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मृदा वैज्ञानिक डॉ. खलील खान ने बताया कि किसान ढैंचा को मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए बोते हैं। फसल कटने के बाद इसकी हरी खाद बनाई जाती है। इस फसल को कोई महंगे दाम में नहीं खरीदता है। यदि इसका उपयोग कपड़ा बनाने में होगा तो इसके अच्छे दाम मिलेंगे। 

धागे का कठोरपन किया जा रहा कम 
प्रो. मुकेश सिंह ने बताया कि जूट और ढैंचा से तैयार धागे में कठोरपन अधिक है। इसको कम करने का प्रयास किया जा रहा है। कठोरपन होने से धागा कमजोर है। पहनने वाले कपड़ों के लिए धागे को पतला किया जा रहा है।

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