{"_id":"60bf7f258ebc3eb602032f2d","slug":"kanpur-eow-will-hand-over-the-case-diary-of-british-india-corporation-scam-to-the-cbi","type":"story","status":"publish","title_hn":"कानपुर: बीआईसी घोटाले की केस डायरी सीबीआई को सौंपेगी ईओडब्ल्यू, करोड़ों का हुआ खेल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कानपुर: बीआईसी घोटाले की केस डायरी सीबीआई को सौंपेगी ईओडब्ल्यू, करोड़ों का हुआ खेल
Tue, 08 Jun 2021 08:01 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Tue, 08 Jun 2021 08:01 PM IST
विज्ञापन
सीबीआई
- फोटो : गूगल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कानपुर में ब्रिटिश इंडिया कारपोरेशन की करोड़ों रुपये की संपत्तियों की खरीद फरोख्त मामले की जांच की केस डायरी जल्द ही आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) सीबीआई को सौंपेगी। दरअसल, मामले में ढाई साल पहले सीबीआई ने रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी।
इस वजह से ईओडब्ल्यू को अपनी जांच बंद करनी पड़ी थी। यशोदा नगर की फोरम अगेंस्ट करप्शन संस्था के सचिव सुरेंद्र गुप्ता ने एक जून 2018 को प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर बीआईसी की संपत्तियों की बिक्री में घोटाले का आरोप लगाया था।
आरोप था कि वर्ष 2004 में बिक्री के वक्त संपत्तियों की कीमत करीब दो हजार करोड़ थी, लेकिन तत्कालीन अधिकारियों ने बिल्डरों से सांठगांठ कर संपत्तियां 25 फीसदी मूल्य पर ही बेच दी थीं। पिछले साल दिसंबर में शासन की ओर से मामले की जांच ईओडब्ल्यू को सौंपी गई थी।
विज्ञापन
टीम ने वस्त्र मंत्रालय से संपर्क कर दस्तावेज भी जुटाए। इसी बीच पता चला कि नवंबर 2018 में सीबीआई ने मुकदमा दर्ज कर लिया था। बीआईसी के तत्कालीन सीएमडी केएस दुग्गल व कंपनी सेक्रेटरी केसी बाजपेई नामजद हैं। इसके बाद ईओडब्ल्यू ने जांच बंद कर दी थी। ईओडब्ल्यू के एसपी बाबूराम ने बताया कि अब तक की जांच रिपोर्ट सीबीआई को सौंपी जाएगी।
विज्ञापन
इस वजह से ईओडब्ल्यू को अपनी जांच बंद करनी पड़ी थी। यशोदा नगर की फोरम अगेंस्ट करप्शन संस्था के सचिव सुरेंद्र गुप्ता ने एक जून 2018 को प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर बीआईसी की संपत्तियों की बिक्री में घोटाले का आरोप लगाया था।
विज्ञापन
आरोप था कि वर्ष 2004 में बिक्री के वक्त संपत्तियों की कीमत करीब दो हजार करोड़ थी, लेकिन तत्कालीन अधिकारियों ने बिल्डरों से सांठगांठ कर संपत्तियां 25 फीसदी मूल्य पर ही बेच दी थीं। पिछले साल दिसंबर में शासन की ओर से मामले की जांच ईओडब्ल्यू को सौंपी गई थी।
विज्ञापन
टीम ने वस्त्र मंत्रालय से संपर्क कर दस्तावेज भी जुटाए। इसी बीच पता चला कि नवंबर 2018 में सीबीआई ने मुकदमा दर्ज कर लिया था। बीआईसी के तत्कालीन सीएमडी केएस दुग्गल व कंपनी सेक्रेटरी केसी बाजपेई नामजद हैं। इसके बाद ईओडब्ल्यू ने जांच बंद कर दी थी। ईओडब्ल्यू के एसपी बाबूराम ने बताया कि अब तक की जांच रिपोर्ट सीबीआई को सौंपी जाएगी।