एक्सक्लूसिव: सत्यापन के खेल में विभाग पास, गर्भवतियां खाली हाथ…2017-18 के दबाए बैठा रहा आवेदन, पढ़ें मामला
Kanpur News: योजना शुरू होने के समय आवेदन पत्र ऑनलाइन और ऑफलाइन लिए जाते थे। इसका सत्यापन आशा व एएनएम से कराया जाता था। पात्र लाभार्थियों को धनराशि उनके खाते में भेजी जाती थी। वर्ष 2017 से 2018 के बीच करीब 32281 आवेदन आए, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने इनका सत्यापन नहीं कराया।
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विस्तार
मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने और गर्भवती को अच्छा पोषण देने के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना शुरुआती वर्ष 2017-18 में फिसड्डी साबित हुई। इस दाैरान 32281 गर्भवती महिलाएं योजना के लाभ के लिए राह ताकती रहीं। सात साल इंतजार के बाद वर्ष 2025 में इनमें से सिर्फ 14 गर्भवती ही सत्यापन में सफल रही हैं जबकि 32267 आवेदन निरस्त हो गए।
शासन ने वर्ष 2017 में प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना का शुभारंभ किया था। योजना में पहले बच्चे के जन्म लेने मां को तीन हजार रुपये और टीकाकरण पूरा होने पर 2000 रुपये देने का नियम था। वहीं, दूसरे बच्चे में बालिका होने पर मां को एक मुश्त छह हजार रुपये दिए जाते थे। स्वास्थ्य विभाग योजना का संचालन वर्ष 2024 तक करता रहा।
नहीं हुआ था आवेदनों का सत्यापन
शुरुआती दिनों में योजना को ऑनलाइन होने में करीब एक वर्ष से अधिक का समय लग गया। इस बीच न तो आवेदनों का सत्यापन हुआ था और न ही लंबित आवेदन पत्र पोर्टल पर दिखे। स्वास्थ्य विभाग से वर्ष 2025 में बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग को योजना हस्तांतरित कर दी गई। अप्रैल 2025 अप्रैल में किसी प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना-2.0 (पीएमएमवीवाई-2.0) पोर्टल का शुभारंभ हुआ।
जिले से लेकर शासन तक हलचल
शुरुआती एक माह तक पोर्टल पर आ रहे आवेदन पत्र दिख ही नहीं रहे थे। काफी मशक्कत के बाद पोर्टल पर वर्ष 2017-18 के 32281 आवेदन पत्र लंबित दिखे। इनका सत्यापन स्वास्थ्य विभाग ने नहीं कराया था। तत्कालीन जिला कार्यक्रम अधिकारी दुर्गेश प्रताप सिंह ने बड़ी संख्या में लंबित आवेदन पत्र देख इनका सत्यापन कराया जिससे फर्जीवाड़ा पकड़ में आया। इसे लेकर जिले से लेकर शासन तक हलचल मच गई।
सत्यापन में ज्यादातर आवेदन पत्र मिले अधूरे
योजना शुरू होने के समय आवेदन पत्र ऑनलाइन और ऑफलाइन लिए जाते थे। इसका सत्यापन आशा व एएनएम से कराया जाता था। पात्र लाभार्थियों को धनराशि उनके खाते में भेजी जाती थी। वर्ष 2017 से 2018 के बीच करीब 32281 आवेदन आए, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने इनका सत्यापन नहीं कराया। आवेदन सामने आने पर पुष्टाहार विभाग ने ब्लाॅकवार सभी आवेदन पत्रों की जांच कराई। इनमें ज्यादातर आवेदन पत्रों में कागजात अधूरे मिले। साथ ही कई आवेदन पत्र ऐसे थे जिनका पता ही नहीं मिला। करीब एक माह तक चले सत्यापन के बाद सिर्फ 14 आवेदन पत्र सही मिले। 32267 आवेदन पत्र पूरी तरह से निरस्त कर दिए गए।
ब्लाॅक आवेदन संख्या निरस्त पत्र
कानपुर नगर 19055 19055
भीतरगांव 1222 1222
बिधनू 959 959
बिल्हौर 1894 1884
चौबेपुर 1951 1950
घाटमपुर 1029 1029
ककवन 2328 2326
कल्याणपुर 265 265
पतारा 1776 1775
सरसौल 929 929
शिवराजपुर 873 873
पुराने जो भी आवेदन पोर्टल पर आए थे सभी की जांच कर ली गई है। करीब 14 पात्र मिले थे। सभी के आवेदन शासन को भेज दिए गए हैं। जल्द ही इनके खाते में धनराशि पहुंचेगी। -प्रीति सिन्हा, जिला कार्यक्रम अधिकारी