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ऐ मेरे वतन के लोगों जरा याद करो पुलवामा के शहीद को
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समाधि स्थल पर मिट्टी ड़ालता शहीद का भाई कमलेश।
- फोटो : AKBARPUR
मुकीद अहमद (संवाद)
डेरापुर (कानपुर देहात)। ऐ मेरे जिले के लोगों, जरा याद करो श्याम बाबू की कुर्बानी। 14 फरवरी को जिले का यह लाल अपने सीआरपीएफ के जवान की वर्दी में देश की रक्षा करते हुए पुलवामा में शहीद हो गया था। अंतिम यात्रा में केंद्रीय मंत्री से लेकर अन्य कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी शामिल हुए थे। बड़ी-बड़ी बातें कर उनके परिवार व गांव के लोगों के सामने घोषणाएं की गई थी। छह दिन बाद इस घटना के एक साल पूरे हो जाएंगे। अभी तक नेताओं की घोषणाओं पर अमल नहीं हो सका है। शहीद के परिजनों की माने तो 850 मीटर सड़क, समाधि स्थल पर स्मारक, प्रवेश द्वार, समाधि स्थल तक मार्ग की घोषणाओं पर अमल नहीं हो सका है।
याद कर पिता की आंखें भर आईं
शहीद श्याम बाबू के पिता राम प्रसाद ने कहा कि शहीद बेटे के अंतिम संस्कार के बाद नेताओं और अफसरों ने गांव की तरफ पलट कर भी नहीं देखा। 14 फरवरी को श्याम बाबू की पहली बरसी है। इससे पहले भाई कमलेश व अन्य परिजन समाधि स्थल के आसपास झाड़ियों की सफाई करने में जुट गए हैं। समाधि स्थल और चबूतरे का निर्माण खुद करने लगे हैं।
सड़क निर्माण 120 मीटर पहले बंद
समाधि स्थल से नुनारी से जुरिया मार्ग तक एक किलोमीटर पक्के मार्ग बनाए जाने की घोषणा की गई थी। काम शुरू हुआ और समाधि स्थल से 120 मीटर पहले ही बंद कर दिया गया। कई बार परिवार के लोगों ने पूरी सड़क बनाने की मांग उठाई, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। समाधि स्थल के आस-पास गंदगी है। वहां तक पहुंचने में गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है।
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एसडीएम दीपाली भार्गव ने बताया कि बजट के लिए शान को प्रस्ताव भेजा गया है। बजट न मिलने से समाधि स्थल पर स्मारक, प्रवेश द्वार और अन्य काम नहीं हो पा रहे हैं। दोबारा पत्र भेजा जाएगा।
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डेरापुर (कानपुर देहात)। ऐ मेरे जिले के लोगों, जरा याद करो श्याम बाबू की कुर्बानी। 14 फरवरी को जिले का यह लाल अपने सीआरपीएफ के जवान की वर्दी में देश की रक्षा करते हुए पुलवामा में शहीद हो गया था। अंतिम यात्रा में केंद्रीय मंत्री से लेकर अन्य कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी शामिल हुए थे। बड़ी-बड़ी बातें कर उनके परिवार व गांव के लोगों के सामने घोषणाएं की गई थी। छह दिन बाद इस घटना के एक साल पूरे हो जाएंगे। अभी तक नेताओं की घोषणाओं पर अमल नहीं हो सका है। शहीद के परिजनों की माने तो 850 मीटर सड़क, समाधि स्थल पर स्मारक, प्रवेश द्वार, समाधि स्थल तक मार्ग की घोषणाओं पर अमल नहीं हो सका है।
याद कर पिता की आंखें भर आईं
शहीद श्याम बाबू के पिता राम प्रसाद ने कहा कि शहीद बेटे के अंतिम संस्कार के बाद नेताओं और अफसरों ने गांव की तरफ पलट कर भी नहीं देखा। 14 फरवरी को श्याम बाबू की पहली बरसी है। इससे पहले भाई कमलेश व अन्य परिजन समाधि स्थल के आसपास झाड़ियों की सफाई करने में जुट गए हैं। समाधि स्थल और चबूतरे का निर्माण खुद करने लगे हैं।
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सड़क निर्माण 120 मीटर पहले बंद
समाधि स्थल से नुनारी से जुरिया मार्ग तक एक किलोमीटर पक्के मार्ग बनाए जाने की घोषणा की गई थी। काम शुरू हुआ और समाधि स्थल से 120 मीटर पहले ही बंद कर दिया गया। कई बार परिवार के लोगों ने पूरी सड़क बनाने की मांग उठाई, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। समाधि स्थल के आस-पास गंदगी है। वहां तक पहुंचने में गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है।
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एसडीएम दीपाली भार्गव ने बताया कि बजट के लिए शान को प्रस्ताव भेजा गया है। बजट न मिलने से समाधि स्थल पर स्मारक, प्रवेश द्वार और अन्य काम नहीं हो पा रहे हैं। दोबारा पत्र भेजा जाएगा।