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कानपुर देहात : 2.86 लाख वाहनों पर सिर्फ 18 प्रदूषण जांच केंद्र
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एआरटीओ कार्यालय में वाहन के अभिलेख जांचते आरआई। संवाद
- फोटो : AKBARPUR
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कानपुर देहात। वाहनों से निकलने वाला धुआं लोगों का दम घोंट रहा रहा। इस पर नियंत्रण के लिए वाहनों का प्रदूषण प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। वहीं, जनपद में पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सेंटर (पीयूसी) वाहनों की अपेक्षा बहुत कम हैं।
जिले में एआरटीओ दफ्तर में 2.86 लाख वाहन पंजीकृत हैं, जिन पर सिर्फ 18 पीयूसी सेंटर खुले हैं। ऐसे में लोग प्रदूषण प्रमाण बनवाने में लापरवाही बरत रहे हैं। एआरटीओ कार्यालय की ओर से भी इसके प्रति जागरूकता के लिए अभियान नहीं चलाया जा रहा है।
जनपद में तेजी से खेतों और वनों को खत्म कर प्लाटिंग की जा रही है। इसका सीधा असर पर्यावरण पर पड़ रहा है। इसके साथ ही जनपद में बिना फिटनेस और प्रदूषण प्रमाण पत्र के वाहन दौड़ रहे हैं। कई वाहन सवारों को तो प्रदूषण प्रमाण पत्र के संबंध में जानकारी ही नहीं है।
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वाहन खरीदे हुए पांच वर्ष बीत जाने के बाद आज तक प्रदूषण प्रमाण पत्र नहीं बनवाया है। वहीं, इसके प्रति एआरटीओ कार्यालय भी सजग नहीं है। स्थिति यह है कि जनपद में 286712 वाहनों को प्रदूषण प्रमाण पत्र जारी करने के लिए सिर्फ 18 जगहों पर पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सेंटर खुले हैं।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए एआरटीओ कार्यालय की ओर से भी कोई खास पहल नहीं की जा रही है। वाहनों से निकल रहा धुआं लोगों को बीमार कर रहा है।
दमा, खुजली व आंख से जुड़ी होती समस्या
चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. अशोक जतारया ने बताया कि प्रदूषण से शरीर में बहुत सारी बीमारियां पनपती हैं। इससे त्वचा में सूजन, आंख में लालिमा, खुजली, दमा, बाल झड़ने जैसे कई अन्य समस्या होती है।
पीसीयू के लिए कई बार आवेदन मांगे गए हैं, लेकिन कोई रुचि नहीं लेता। इस वजह से सेंटर कम हैं। इसके लिए कोई ठोस योजना तैयार की जाएगी। - सत्येंद्र सिंह, आरआई, टेक्निकल
पंजीकृत वाहनों पर एक नजर
ट्रैक्टर: 24644
जीप: 8943
ऑटो: 6385
कार: 12434
बस: 1331
टेंपो: 7875
स्कूटर: 5280
मोपेड: 6285
मोटरसाइकिल: 213535
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जिले में एआरटीओ दफ्तर में 2.86 लाख वाहन पंजीकृत हैं, जिन पर सिर्फ 18 पीयूसी सेंटर खुले हैं। ऐसे में लोग प्रदूषण प्रमाण बनवाने में लापरवाही बरत रहे हैं। एआरटीओ कार्यालय की ओर से भी इसके प्रति जागरूकता के लिए अभियान नहीं चलाया जा रहा है।
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जनपद में तेजी से खेतों और वनों को खत्म कर प्लाटिंग की जा रही है। इसका सीधा असर पर्यावरण पर पड़ रहा है। इसके साथ ही जनपद में बिना फिटनेस और प्रदूषण प्रमाण पत्र के वाहन दौड़ रहे हैं। कई वाहन सवारों को तो प्रदूषण प्रमाण पत्र के संबंध में जानकारी ही नहीं है।
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वाहन खरीदे हुए पांच वर्ष बीत जाने के बाद आज तक प्रदूषण प्रमाण पत्र नहीं बनवाया है। वहीं, इसके प्रति एआरटीओ कार्यालय भी सजग नहीं है। स्थिति यह है कि जनपद में 286712 वाहनों को प्रदूषण प्रमाण पत्र जारी करने के लिए सिर्फ 18 जगहों पर पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सेंटर खुले हैं।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए एआरटीओ कार्यालय की ओर से भी कोई खास पहल नहीं की जा रही है। वाहनों से निकल रहा धुआं लोगों को बीमार कर रहा है।
दमा, खुजली व आंख से जुड़ी होती समस्या
चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. अशोक जतारया ने बताया कि प्रदूषण से शरीर में बहुत सारी बीमारियां पनपती हैं। इससे त्वचा में सूजन, आंख में लालिमा, खुजली, दमा, बाल झड़ने जैसे कई अन्य समस्या होती है।
पीसीयू के लिए कई बार आवेदन मांगे गए हैं, लेकिन कोई रुचि नहीं लेता। इस वजह से सेंटर कम हैं। इसके लिए कोई ठोस योजना तैयार की जाएगी। - सत्येंद्र सिंह, आरआई, टेक्निकल
पंजीकृत वाहनों पर एक नजर
ट्रैक्टर: 24644
जीप: 8943
ऑटो: 6385
कार: 12434
बस: 1331
टेंपो: 7875
स्कूटर: 5280
मोपेड: 6285
मोटरसाइकिल: 213535