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कानपुर देहात : प्रदूषण नहीं, तीन फैक्टरियों से होगा प्राण वायु का संचार, खाली परिसर में उगाया जाएगा घना वन
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रनियां स्थ्ति एडविल फैक्टरी। संवाद
- फोटो : AKBARPUR
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कानपुर देहात। फैक्टरियों का जिक्र आते ही मन में प्रदूषण का विचार आता है। हालांकि अब फैक्टरियों को इको फ्रेंडली बनाने पर जोर है। इसी के तहत जनपद की रनियां, नबीपुर व उमरन स्थित तीन फैक्टरियों के खाली परिसर में जापान की मियावाकी पद्धति से घना जंगल उगाने की रूपरेखा तैयार की गई है।
इससे जल्द ही हरियाली तैयार होगी और फैक्टरियों से प्रदूषण के बजाय प्राण वायु का संचार होगा। जनपद में उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व वन विभाग इस तरह का पहला प्रयोग कर रहा है। तीनों फैक्टरियों में 31 हजार पौधे लगाए जाएंगे। तीन साल में ये पौधे घना जंगल विकसित करेंगे।
औद्योगिक क्षेत्र में मानसून आने पर हर साल पौधे लगाए जाते हैं। शासन से इसका लक्ष्य मिलता है। अलबत्ता फैक्टरी परिसर में घना जंगल उगाने को लेकर अब तक संजीदगी नहीं दिखाई गई। वन विभाग ने इस बार यह पहल की है।
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तीनों फैक्टरियों में उपलब्ध खाली करीब 6200 वर्ग मीटर क्षेत्र में यह जंगल विकसित किया जाएगा। इसकी तैयारी फैक्टरी प्रबंधन व वन विभाग की ओर से संयुक्त रूप से की गई है।
पौधे वन विभाग उपलब्ध कराएगा जबकि देखरेख व सिंचाई आदि का खर्च फैक्टरी प्रबंधन को वहन करना होगा। इस पहल को पर्यावरण मित्र नवीन दीक्षित ने भी सराहा है। वह कहते हैं कि इस तरह की पहल अन्य फैक्टरियों में हो तो हरियाली बढ़ेगी और स्वच्छ प्राण वायु मिलेगी।
वनीकरण के लिए जनपद में नव प्रयोग किया जा रहा है। फैक्टरियों के खाली स्थान पर घना जंगल तैयार होगा तो इसका फायदा पर्यावरण को होगा। तीन फैक्टरियों के रिक्त परिसर का चयन कर लिया गया है। मानसून आने से पहले यहां पौधे रोपने की तैयारी कर ली जाएगी। बारिश होने पर कम दूरी पर वैज्ञानिक तरीके से पौधे लगाए जाएंगे। यह जल्द बड़े होकर घना वन तैयार करेंगे। - एके द्विवेदी, डीएफओ कानपुर देहात।
51 अन्य फैक्टरियों में भी लगाए जाएंगे 30800 पौधे
रनियां, रायपुर, जैनपुर व नबीपुर स्थित 51 अन्य फैक्टरियों में अलग से पौधरोपण का लक्ष्य है। कम से कम सौ और अधिक से अधिक दो हजार पौधे रोपने के लिए फैक्टरीवार लक्ष्य तय किया गया है। उपायुक्त उद्योग के माध्यम से फैक्टरियों का चयन पौधरोपण के लिए कर लिया गया है। लक्ष्य आवंटन भी पूरा हो गया है। डीएफओ ने बताया कि 51 फैक्टरियों में 30800 पौधे लगाए जाएंगे।
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इससे जल्द ही हरियाली तैयार होगी और फैक्टरियों से प्रदूषण के बजाय प्राण वायु का संचार होगा। जनपद में उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व वन विभाग इस तरह का पहला प्रयोग कर रहा है। तीनों फैक्टरियों में 31 हजार पौधे लगाए जाएंगे। तीन साल में ये पौधे घना जंगल विकसित करेंगे।
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औद्योगिक क्षेत्र में मानसून आने पर हर साल पौधे लगाए जाते हैं। शासन से इसका लक्ष्य मिलता है। अलबत्ता फैक्टरी परिसर में घना जंगल उगाने को लेकर अब तक संजीदगी नहीं दिखाई गई। वन विभाग ने इस बार यह पहल की है।
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तीनों फैक्टरियों में उपलब्ध खाली करीब 6200 वर्ग मीटर क्षेत्र में यह जंगल विकसित किया जाएगा। इसकी तैयारी फैक्टरी प्रबंधन व वन विभाग की ओर से संयुक्त रूप से की गई है।
पौधे वन विभाग उपलब्ध कराएगा जबकि देखरेख व सिंचाई आदि का खर्च फैक्टरी प्रबंधन को वहन करना होगा। इस पहल को पर्यावरण मित्र नवीन दीक्षित ने भी सराहा है। वह कहते हैं कि इस तरह की पहल अन्य फैक्टरियों में हो तो हरियाली बढ़ेगी और स्वच्छ प्राण वायु मिलेगी।
वनीकरण के लिए जनपद में नव प्रयोग किया जा रहा है। फैक्टरियों के खाली स्थान पर घना जंगल तैयार होगा तो इसका फायदा पर्यावरण को होगा। तीन फैक्टरियों के रिक्त परिसर का चयन कर लिया गया है। मानसून आने से पहले यहां पौधे रोपने की तैयारी कर ली जाएगी। बारिश होने पर कम दूरी पर वैज्ञानिक तरीके से पौधे लगाए जाएंगे। यह जल्द बड़े होकर घना वन तैयार करेंगे। - एके द्विवेदी, डीएफओ कानपुर देहात।
51 अन्य फैक्टरियों में भी लगाए जाएंगे 30800 पौधे
रनियां, रायपुर, जैनपुर व नबीपुर स्थित 51 अन्य फैक्टरियों में अलग से पौधरोपण का लक्ष्य है। कम से कम सौ और अधिक से अधिक दो हजार पौधे रोपने के लिए फैक्टरीवार लक्ष्य तय किया गया है। उपायुक्त उद्योग के माध्यम से फैक्टरियों का चयन पौधरोपण के लिए कर लिया गया है। लक्ष्य आवंटन भी पूरा हो गया है। डीएफओ ने बताया कि 51 फैक्टरियों में 30800 पौधे लगाए जाएंगे।