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दूध कंपनी नहीं कर रही नियमित खरीद, किसान परेशान
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कानपुर देहात। लॉकडाउन के कारण जिले में दूध की खरीद प्रभावित हो रही है। जिले में स्थापित बड़ी दुग्ध कंपनी नियमित रूप से दूध की खरीद नहीं कर पा रही है। क्रमवार 50 से सौ कलेक्शन सेंटर बंद करके दूध की खरीद मात्रा को नियंत्रित किया जा रहा है। इससे किसानों के सामने दूध की बिक्री की समस्या खड़ी हो गई है।
आवश्यक सेवाओं में आने के बाद भी दूध की बिक्री बाजार में नहीं हो पा रही है। इसकी वजह दुकानों का बंद होना है। फुटकर विक्रेता पॉलीपैक दूध खरीद ही नहीं रहे हैं। इसका असर खरीद करने वाली कंपनियों पर पड़ रहा है। माती में एक बड़ी कंपनी का प्रोसेसिंग प्लांट हैं। इस प्लांट की क्षमता नौ लाख लीटर स्टाक करने की है। प्रोसेसिंग की क्षमता पांच लाख लीटर है। इस कंपनी के गांवों में दो सौ खरीद केंद्र हैं। उनसे 11 हजार किसान जुड़े हैं। लॉकडाउन का असर पूरी तरह से हावी है। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। पशुपालक रामदास, दीपक सिंह, पप्पू सचान ने बताया कि दस से बीस लीटर दूध रोज हो रहा है। कंपनी एक दिन दूध खरीदती है और अगले दिन खरीद बंद कर देती है। इससे बड़ा नुकसान हो रहा है। कंपनी के लोगों ने बताया कि नजदीक का बड़ा बाजार कानपुर नगर है। वहां दूध की बिक्री नहीं हो पा रही है। फुटकर विक्रेताओं की दुकानें बंद हैं। इससे प्लांट में क्षमता से अधिक दूध आने पर रोक-रोककर खरीद करनी पड़ रही है।
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आवश्यक सेवाओं में आने के बाद भी दूध की बिक्री बाजार में नहीं हो पा रही है। इसकी वजह दुकानों का बंद होना है। फुटकर विक्रेता पॉलीपैक दूध खरीद ही नहीं रहे हैं। इसका असर खरीद करने वाली कंपनियों पर पड़ रहा है। माती में एक बड़ी कंपनी का प्रोसेसिंग प्लांट हैं। इस प्लांट की क्षमता नौ लाख लीटर स्टाक करने की है। प्रोसेसिंग की क्षमता पांच लाख लीटर है। इस कंपनी के गांवों में दो सौ खरीद केंद्र हैं। उनसे 11 हजार किसान जुड़े हैं। लॉकडाउन का असर पूरी तरह से हावी है। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। पशुपालक रामदास, दीपक सिंह, पप्पू सचान ने बताया कि दस से बीस लीटर दूध रोज हो रहा है। कंपनी एक दिन दूध खरीदती है और अगले दिन खरीद बंद कर देती है। इससे बड़ा नुकसान हो रहा है। कंपनी के लोगों ने बताया कि नजदीक का बड़ा बाजार कानपुर नगर है। वहां दूध की बिक्री नहीं हो पा रही है। फुटकर विक्रेताओं की दुकानें बंद हैं। इससे प्लांट में क्षमता से अधिक दूध आने पर रोक-रोककर खरीद करनी पड़ रही है।
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