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कानपुर देहात : हर ब्लॉक के एक परिषदीय विद्यालय में बनेगी मॉडल बाल वाटिका
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कानपुर देहात। नई शिक्षा नीति में बेसिक शिक्षा विभाग के विद्यालयों में भी पठन पाठन बदलाव की तैयारी है। प्री प्राइमरी कक्षाएं चलाने के लिए हर ब्लॉक के एक विद्यालय में मॉडल बाल वाटिका बनाई जानी है।
लगभग तीन लाख रुपये खर्च कर 10 मॉडल बाल वाटिका बनाने का प्रस्ताव है। शासन से जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद है। इस तरह से जनपद में दस मॉडल बाल वाटिका बनाई जाएंगी।
परिषदीय विद्यालयों में बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए बाल वाटिका बनाने का प्रावधान किया गया है। यह बाल वाटिका उन परिषदीय स्कूलों में बनेंगी जहां पर आंगनबाड़ी केंद्र है।
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इसमें तीन वर्ष से छह साल तक के बच्चों को रखा जाएगा। पहले दो साल आंगनबाड़ी केेंद्र के होंगे। एक साल बच्चा बाल वाटिका में रहेगा इसके बाद उसका प्रवेश पहली कक्षा में किया जाएगा।
यह कक्षाएं अब परिषदीय विद्यालय में ही चलेंगी। बाल वाटिका में बच्चों को खेल-खेल में सिखाया जाएगा। यह बाल वाटिका प्री स्कूल की तरह होगी। जनपद के दस ब्लॉकों के एक-एक परिषदीय विद्यालय में मॉडल बाल वाटिका बनाई जाएगी।
इसके लिए प्रति बाल वाटिका तीस हजार रुपये का प्रस्ताव मंजूरी के लिए भेजा गया है। बीएसए सुनील दत्त ने बताया कि मॉडल बाल वाटिका के जरूरी संसाधन जुटाने के लिए करीब 30 हजार रुपये व्यय का अनुमान है। इसके अनुसार तीन लाख रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है।
खरीदे जाएंगे खिलौने, फर्नीचर
बाल वाटिका बनाने के लिए प्रस्ताव को मंजूरी मिली तो इससे बच्चों को खेल खेल में सिखाने के लिए खिलौने व किटें खरीदी जाएंगी। इसके साथ ही फर्नीचर भी उपलब्ध कराया जाएगा। रंगीन चित्रों यानी टीएलएम के माध्यम से भी खेल खेल में सिखाया जाएगा। जनपद स्तर पर अर्ली चाइल्ड हुड केयर एवं एजूकेशन यानी ईसीसीई के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, नोडल शिक्षक व बाल विकास पुष्टाहार विभाग की सुपरवाइजर की तीनों कार्यशालाएं भी हो चुकी हैं।
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लगभग तीन लाख रुपये खर्च कर 10 मॉडल बाल वाटिका बनाने का प्रस्ताव है। शासन से जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद है। इस तरह से जनपद में दस मॉडल बाल वाटिका बनाई जाएंगी।
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परिषदीय विद्यालयों में बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए बाल वाटिका बनाने का प्रावधान किया गया है। यह बाल वाटिका उन परिषदीय स्कूलों में बनेंगी जहां पर आंगनबाड़ी केंद्र है।
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इसमें तीन वर्ष से छह साल तक के बच्चों को रखा जाएगा। पहले दो साल आंगनबाड़ी केेंद्र के होंगे। एक साल बच्चा बाल वाटिका में रहेगा इसके बाद उसका प्रवेश पहली कक्षा में किया जाएगा।
यह कक्षाएं अब परिषदीय विद्यालय में ही चलेंगी। बाल वाटिका में बच्चों को खेल-खेल में सिखाया जाएगा। यह बाल वाटिका प्री स्कूल की तरह होगी। जनपद के दस ब्लॉकों के एक-एक परिषदीय विद्यालय में मॉडल बाल वाटिका बनाई जाएगी।
इसके लिए प्रति बाल वाटिका तीस हजार रुपये का प्रस्ताव मंजूरी के लिए भेजा गया है। बीएसए सुनील दत्त ने बताया कि मॉडल बाल वाटिका के जरूरी संसाधन जुटाने के लिए करीब 30 हजार रुपये व्यय का अनुमान है। इसके अनुसार तीन लाख रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है।
खरीदे जाएंगे खिलौने, फर्नीचर
बाल वाटिका बनाने के लिए प्रस्ताव को मंजूरी मिली तो इससे बच्चों को खेल खेल में सिखाने के लिए खिलौने व किटें खरीदी जाएंगी। इसके साथ ही फर्नीचर भी उपलब्ध कराया जाएगा। रंगीन चित्रों यानी टीएलएम के माध्यम से भी खेल खेल में सिखाया जाएगा। जनपद स्तर पर अर्ली चाइल्ड हुड केयर एवं एजूकेशन यानी ईसीसीई के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, नोडल शिक्षक व बाल विकास पुष्टाहार विभाग की सुपरवाइजर की तीनों कार्यशालाएं भी हो चुकी हैं।