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कानपुर देहात : बारिश शुरू पर खानचंद्रपुर में नहीं ढका क्रोमियम कचरा, भूजल को करेगा दूषित
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खानचंद्रपुर में डंप क्रोमियम सल्फेट कचरा। संवाद
- फोटो : AKBARPUR
कानपुर देहात/रनियां। बारिश शुरू होने के बाद भी खानचंद्रपुर में मटियामऊ मार्ग किनारे डंप क्रोमियम सल्फेट कचरा को ढका नहीं जा सका है। जबकि इसके लिए कानपुर की कंपनी को अधिकृत किया गया है। ऐसे में बारिश के पानी के साथ क्रोमियम कचरा घुलकर भूजल में मिलने की आशंका बनी है।
अकबरपुर तहसील के खानचंद्रपुर में मटियामऊ मार्ग किनारे 63 हजार मीट्रिक टन क्रोमियम कचरा खुले में डंप है। एनजीटी की सख्ती पर राज्य सरकार ने यूपीसीडा को कचरा निपटारे के लिए अधिकृत किया है। अगस्त 2020 में क्रोमियम कचरा निस्तारण की कवायद शुरू की गई थी।
इसके लिए अभी तक अकबरपुर के कुंभी में सेंगुर नदी किनारे चिह्नित 15 एकड़ भूमि उपलब्ध नहीं हो सकी है। यहां कंक्रीट के गड्ढे बनाकर कचरे का निपटारा कराया जाना प्रस्तावित है। उधर, बारिश में पहले क्रोमियम कचरा पानी के साथ भूजल में मिलने से रोकने के लिए एचडीईपी जियोमेंब्रेन शीट से ढकने का निर्णय लिया गया।
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करीब दस बीघा भूमि में फैले कचरे को ढकने के लिए यूपीसीडा ने 3.37 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान लगा ई टेंडर निकाला था। इसमें चार कंपनियों ने रुचि दिखाई। अंत में कानपुर की आरआर कंस्ट्रक्शन कंपनी को टेंडर दिया गया।
अब बारिश होने लगी है इसके बाद भी अभी तक कचरा ढकने की शुरुआत नहीं हो सकी है। लोगों का कहना है कि दूसरे स्ट्रेटा का भूजल दूषित हो चुका है। यदि जल्द कचरा नहीं ढका गया तो और गहराई तक भूजल दूषित हो जाएगा।
कंपनी तय होने के बाद एचडीपीई जियोमेंब्रेन शीट का नमूना सलाहकार संस्था आईआईटी कानपुर को भेजा गया है। इसके पास होने पर कंपनी काम शुरू करेगी। इसकी प्रक्रिया हो रही है। - संजय त्रिपाठी, एक्सईएन यूपीसीडा।
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अकबरपुर तहसील के खानचंद्रपुर में मटियामऊ मार्ग किनारे 63 हजार मीट्रिक टन क्रोमियम कचरा खुले में डंप है। एनजीटी की सख्ती पर राज्य सरकार ने यूपीसीडा को कचरा निपटारे के लिए अधिकृत किया है। अगस्त 2020 में क्रोमियम कचरा निस्तारण की कवायद शुरू की गई थी।
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इसके लिए अभी तक अकबरपुर के कुंभी में सेंगुर नदी किनारे चिह्नित 15 एकड़ भूमि उपलब्ध नहीं हो सकी है। यहां कंक्रीट के गड्ढे बनाकर कचरे का निपटारा कराया जाना प्रस्तावित है। उधर, बारिश में पहले क्रोमियम कचरा पानी के साथ भूजल में मिलने से रोकने के लिए एचडीईपी जियोमेंब्रेन शीट से ढकने का निर्णय लिया गया।
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करीब दस बीघा भूमि में फैले कचरे को ढकने के लिए यूपीसीडा ने 3.37 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान लगा ई टेंडर निकाला था। इसमें चार कंपनियों ने रुचि दिखाई। अंत में कानपुर की आरआर कंस्ट्रक्शन कंपनी को टेंडर दिया गया।
अब बारिश होने लगी है इसके बाद भी अभी तक कचरा ढकने की शुरुआत नहीं हो सकी है। लोगों का कहना है कि दूसरे स्ट्रेटा का भूजल दूषित हो चुका है। यदि जल्द कचरा नहीं ढका गया तो और गहराई तक भूजल दूषित हो जाएगा।
कंपनी तय होने के बाद एचडीपीई जियोमेंब्रेन शीट का नमूना सलाहकार संस्था आईआईटी कानपुर को भेजा गया है। इसके पास होने पर कंपनी काम शुरू करेगी। इसकी प्रक्रिया हो रही है। - संजय त्रिपाठी, एक्सईएन यूपीसीडा।