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रिंद नदी में डूबे चचेरे भाइयों के शव मिले
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सरवनखेड़ा। रिंद नदी में डूबे चचेरे भाइयों के शव मंगलवार को कानपुर नगर से आए गोताखोरों ने ढूंढ निकाले। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद युवकों के शव उनके परिजनों को सौंप दिए।
गजनेर के लोहारी गांव निवासी बलदेव सिंह का बेटा विवेक उर्फ नंदू (17) अपने हम उम्र चचेरे भाई शेरू और गांव में रहने वाले दोस्त अंकुश सिंह, विकास सिंह, विक्रम सिंह, रत्नेश और विपिन के साथ सोमवार को खलपना गांव के किनारे से निकली रिंद नदी में नहाने गया था। उसी दौरान विवेक गहरे पानी में चला गया। उसे डूबता देख शेरू घबरा गया। वह भी विवेक की जान बचाने के चक्कर में डूब गया। दोनों भाइयों के डूबने पर नदी में नहा रहे दोस्तों ने शोर मचाया। जानकारी पर विवेक और शेरू के परिजनों समेत गांव के काफी लोग मौके पर पहुंचे। उन लोगों ने नदी में जाल डाला था। 37 वीं बटालियन पीएसपी और पुलिस की गोताखोरों की टीम कानपुर नगर से बुलाई गई। दोनों ने नावों और स्टीमर से दोनों भाइयों की नदी में घंटों तलाश की, लेकिन कुछ पता नहीं चला। इसके बाद रात आठ बजे दोनों भाइयों की तलाश का काम पुलिस, पीएसी के गोताखोरों ने बंद कर दिया था। प्रधान प्रतिभा के पति रामजीवन ने बल्लूपुरवा कानपुर नगर से गोताखोर छिद्दू और मनोज, डिलौलिया बांगर के भगवानदीन, सोनेलाल, राम मोहन, दीपक कुमार कुमार को बुलाया। इन लोगों ने तलाश शुरू करते हुए जाल नदी में डाला। मंगलवार को सुबह छह बजे गोताखोरों ने विवेक का शव जाल में फंसा पाया। गोताखोरों ने शव को नदी से बाहर निकाला। इसके बाद दोनों ने शेरू की तलाश शुरू की। सुबह करीब नौ बजे घटनास्थल से तीन किलोमीटर दूर नदी में उगी झाड़ियों के पास शव मिल गया।
गोताखोरों के शवों को नदी से बाहर निकालते ही कोहराम मच गया। दोनों परिवार के लोग अपने-अपने बच्चों के शव से लिपट कर बिलख पड़े। शेरू माता-पिता की इकलौती संतान था। बेटे की मौत से दुखी सूरज और उनकी पत्नी सुधा रोते-रोते बेहोश हो गए। यहीं हाल विवेक की मां रानी और पिता बलदेव का रहा। दोनों के परिजनों की हालत देख वहां मौजूद लोगों की भी आंखें भर्र आइं।
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विवेक और शेरू हम उम्र थे। दोनों एक साथ एक गांव में पले-बढ़े। साथ खेले। पोस्टमार्टम के बाद दोनों की अर्थियां एक साथ उठीं। एक साथ ही अंतिम संस्कार हुआ। दोनों भाइयों की दोस्ती और प्यार की चर्चा उनके दोस्तों और गांव वालों के बीच होती रही।
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गजनेर के लोहारी गांव निवासी बलदेव सिंह का बेटा विवेक उर्फ नंदू (17) अपने हम उम्र चचेरे भाई शेरू और गांव में रहने वाले दोस्त अंकुश सिंह, विकास सिंह, विक्रम सिंह, रत्नेश और विपिन के साथ सोमवार को खलपना गांव के किनारे से निकली रिंद नदी में नहाने गया था। उसी दौरान विवेक गहरे पानी में चला गया। उसे डूबता देख शेरू घबरा गया। वह भी विवेक की जान बचाने के चक्कर में डूब गया। दोनों भाइयों के डूबने पर नदी में नहा रहे दोस्तों ने शोर मचाया। जानकारी पर विवेक और शेरू के परिजनों समेत गांव के काफी लोग मौके पर पहुंचे। उन लोगों ने नदी में जाल डाला था। 37 वीं बटालियन पीएसपी और पुलिस की गोताखोरों की टीम कानपुर नगर से बुलाई गई। दोनों ने नावों और स्टीमर से दोनों भाइयों की नदी में घंटों तलाश की, लेकिन कुछ पता नहीं चला। इसके बाद रात आठ बजे दोनों भाइयों की तलाश का काम पुलिस, पीएसी के गोताखोरों ने बंद कर दिया था। प्रधान प्रतिभा के पति रामजीवन ने बल्लूपुरवा कानपुर नगर से गोताखोर छिद्दू और मनोज, डिलौलिया बांगर के भगवानदीन, सोनेलाल, राम मोहन, दीपक कुमार कुमार को बुलाया। इन लोगों ने तलाश शुरू करते हुए जाल नदी में डाला। मंगलवार को सुबह छह बजे गोताखोरों ने विवेक का शव जाल में फंसा पाया। गोताखोरों ने शव को नदी से बाहर निकाला। इसके बाद दोनों ने शेरू की तलाश शुरू की। सुबह करीब नौ बजे घटनास्थल से तीन किलोमीटर दूर नदी में उगी झाड़ियों के पास शव मिल गया।
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गोताखोरों के शवों को नदी से बाहर निकालते ही कोहराम मच गया। दोनों परिवार के लोग अपने-अपने बच्चों के शव से लिपट कर बिलख पड़े। शेरू माता-पिता की इकलौती संतान था। बेटे की मौत से दुखी सूरज और उनकी पत्नी सुधा रोते-रोते बेहोश हो गए। यहीं हाल विवेक की मां रानी और पिता बलदेव का रहा। दोनों के परिजनों की हालत देख वहां मौजूद लोगों की भी आंखें भर्र आइं।
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विवेक और शेरू हम उम्र थे। दोनों एक साथ एक गांव में पले-बढ़े। साथ खेले। पोस्टमार्टम के बाद दोनों की अर्थियां एक साथ उठीं। एक साथ ही अंतिम संस्कार हुआ। दोनों भाइयों की दोस्ती और प्यार की चर्चा उनके दोस्तों और गांव वालों के बीच होती रही।
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