कानपुर: रंगदारी मामले में खत्म हुई जिरह, सुरेश पाल बोले- अखिलेश दुबे ने नहीं पुलिस की एसआईटी ने धमकाया था
Kanpur News: अधिवक्ता अखिलेश दुबे पर ढाई करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने का आरोप लगाने वाले होटल कारोबारी सुरेश पाल की कोर्ट में जिरह पूरी हो गई है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश हुए सुरेश पाल ने पुलिस और एसआईटी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अखिलेश ने उनसे कोई रंगदारी नहीं मांगी थी।
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कानपुर में एक साल से जेल में बंद अधिवक्ता अखिलेश दुबे पर ढाई करोड़ रुपये रंगदारी मांगने का आरोप लगाने वाले होटल कारोबारी सुरेश पाल की जिरह मंगलवार को खत्म हो गई। वीडियो कांफ्रेंसिंग से हाजिर हुए सुरेश ने जिरह के दौरान पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। सवालों के जवाब में कहा कि अखिलेश ने उससे न तो कभी रंगदारी मांगी न ही धमकाया, बल्कि एसआईटी ने ही उसे ऑपरेशन महाकाल में जेल भेजने की धमकी दी और सादे कागजों पर हस्ताक्षर करवाए थे।
सुरेश के इस बयान ने पुलिस और एसआईटी को कठघरे में खड़ा कर दिया है। सुरेश ने छह अगस्त 2025 को किदवईनगर थाने में अधिवक्ता अखिलेश दुबे व आयुष उर्फ लवी मिश्रा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मुकदमे में पहले तो सुरेश ने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक अखिलेश दुबे की जमानत याचिका का विरोध किया। इस कारण अखिलेश को अब तक जमानत नहीं मिल सकी थी, लेकिन अचानक वह कोर्ट में गवाही के दौरान बयान से मुकर गए।
कोर्ट ने खुद भी सुरेश से कुछ सवाल पूछे
उन्होंने कहा कि उनसे कोई रंगदारी नहीं मांगी गई। उन्होंने थाने में न कोई तहरीर दी और न ही पुलिस को कोई बयान नहीं दिए। इसके बाद अभियोजन ने उसे पक्षद्रोही घोषित कर उनसे जिरह शुरू की थी। जिला जज अनमोल पाल की अदालत में मंगलवार को सुरेश वीडियो कांफ्रेंसिंग से हाजिर हुए। अभियोजन की ओर से कार्यवाहक डीजीसी ने उनसे जिरह की। कोर्ट ने खुद भी सुरेश से कुछ सवाल पूछे। इसके बाद बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने भी सुरेश से कुछ सवाल पूछे।
सुरेश पाल के बदले बयान ने खड़े किए सवाल
तीन तारीखों से चल रही सुरेश की जिरह आखिर खत्म हो गई। अब एक अक्तूबर को अभियोजन अगला गवाह पेश करेगा। सुरेश पाल के बदले बयान ने करीब सवा साल पहले तत्कालीन पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार और उनके ऑपरेशन महाकाल दोनों को ही सवालों के घेरे में ला दिया है। जिस तरह से सुरेश ने उस वक्त की एसआईटी पर आरोप मढ़े हैं। उससे इतना तो साफ है कि कहीं न कहीं कुछ गड़बड़ी या तो पहले हुई थी या अब हो रही है।
जिरह के दौरान इस तरह रहे सुरेश के जवाब
- वृंदावन में एक प्लाॅट था और प्रयागराज में एक आवासीय मकान था जिसे वर्ष 2023 और 2024 में बेचा गया लेकिन इसे व्यावसायिक जरूरतों के लिए बेचा था न कि अखिलेश को रंगदारी देने के लिए।
- मैं तो लवी मिश्रा का पूरा नाम व पता तक नहीं जानता।
- अखिलेश की जमानत याचिका पर विरोध जताने मैं अपनी मर्जी से हाईकोर्ट नहीं गया था। पुलिस ले गई थी। फोटो खिंचवाई और वकालतनामे व कुछ सादे कागजातों पर हस्ताक्षर करवाए थे। सुप्रीम कोर्ट भी मैं नहीं गया था।
- मेरे ऊपर पुलिस के बड़े अफसरों का दबाव था जिससे मैं भयभीत था। मजिस्ट्रेट के सामने मेरे बयान दर्ज होने से पहले भी पुलिस ने मुझ पर दबाव बनाया था। जो बताया गया वही बयान दिए।
- पॉक्सो के मुकदमे को दोबारा खोलकर जेल भेजने की धमकी देकर कानपुर बुलाया। फिर कहा अखिलेश दुबे का नाम लो। सादे कागजों पर हस्ताक्षर करवाए। टाइपशुदा तहरीर पर एसआईटी ने दबाव बनाकर हस्ताक्षर करवाए।