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#LadengeCoronaSe: आपदा में अवसर नहीं, सांसों से लड़ती जिंदगी देखी, कोरोना के कहर के बीच उपलब्ध करा रहे प्राणवायु
Wed, 28 Apr 2021 02:40 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 28 Apr 2021 02:40 PM IST
सार
संकटकाल में कानपुर को भरपूर प्राणवायु उपलब्ध कराने के लिए किसी ने वक्त की जरूरत को कारोबार से ऊपर रख दिया है तो कोई कम संसाधन में भी ज्यादा से ज्यादा लोगों को राहत पहुंचाने की कोशिश में लगा है।
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अजय मिश्रा और सुमित बब्बर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
महामारी के दौर में हर तरफ से नकारात्मक सूचनाओं से मन खिन्न है। दवा से लेकर इलाज तक आपदा में लूटखसोट का अवसर तलाशते लोग व्यवस्था को मुंह चिढ़ा रहे हैं। इनके लिए सबक हैं वो तीन शख्सियतें, जिन्होंने जिंदगी की जरूरत समझी। संकटकाल में शहर को भरपूर प्राणवायु उपलब्ध कराने के लिए किसी ने वक्त की जरूरत को कारोबार से ऊपर रख दिया है तो कोई कम संसाधन में भी ज्यादा से ज्यादा लोगों को राहत पहुंचाने की कोशिश में लगा है। आइए जानते हैं रिमझिम इस्पात, बब्बर गैस प्लांट और मुरारी इंडस्ट्रियल गैस किन चुनौतियों के बीच आपकी जरूरत पूरी करने में जुटी हैं...
हजार सिलिंडर रोज, पर पूरी नहीं होती सबकी मुराद
सांसों पर आए संकट को दूर करने की कोशिश में कानपुर के ऑक्सीजन प्लांट बब्बर गैस एजेंसी में डबल शिफ्ट में कर्मचारियों की ड्यूटी लगानी पड़ रही है। यहां के कर्मचारी 16 से 18 घंटे मेहनत कर रहे हैं, पर मांग दोगुनी होने के चलते आधी ही आपूर्ति कर पा रहे हैं। इसके चलते उनको सिलिंडर भराने आए लोगों के गुस्से का भी सामना करना पड़ता है। बब्बर गैस एजेंसी के संचालक सुमित बब्बर का कहना है कि लोग साथ दें, सबको ऑक्सीजन देने की पूरी कोशिश की जा रही है। ऑक्सीजन भरने वाले कर्मचारियों की कमी के चलते भी दिक्कत आ रही है।
सुमित ने बताया कि 17 अप्रैल से ऑक्सीजन की मांग बढ़ी है। तब से लगातार इसमें इजाफा हुआ है। वर्तमान में रोज करीब एक हजार सिलिंडरों की आपूर्ति अस्पतालों और अन्य लोगों के उपचार के लिए की जा रही है। रोज नौ से 10 टन ऑक्सीजन की खपत है। मांग करीब दो हजार सिलिंडर यानी करीब बीस टन ऑक्सीजन की है।
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सुमित के मुताबिक गैस भरना एक्सपर्ट का काम है। जरा सी चूक बड़ी घटना में तब्दील हो सकती है। ऐसे में कुशल कर्मचारी ही रखे जाते हैं। पिछले कुछ दिनों से ऐसे कर्मचारियों की बेहद कमी है। एजेंसी में तीन कर्मचारी हैं, जो तय समय से अधिक काम कर रहे हैं। सुमित ने बताया कि छोटा सिलिंडर (1.05 क्यूबिक) 200 रुपये और बड़ा सिलिंडर (7 क्यूबिक) पांच सौ रुपये में भरा जाता है। एक बार में 24 सिलिंडरों में ऑक्सीजन भरी जाती है, जिसमें 30 से 40 मिनट का समय लगता है। इसी वजह से देर होती है।
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हजार सिलिंडर रोज, पर पूरी नहीं होती सबकी मुराद
सांसों पर आए संकट को दूर करने की कोशिश में कानपुर के ऑक्सीजन प्लांट बब्बर गैस एजेंसी में डबल शिफ्ट में कर्मचारियों की ड्यूटी लगानी पड़ रही है। यहां के कर्मचारी 16 से 18 घंटे मेहनत कर रहे हैं, पर मांग दोगुनी होने के चलते आधी ही आपूर्ति कर पा रहे हैं। इसके चलते उनको सिलिंडर भराने आए लोगों के गुस्से का भी सामना करना पड़ता है। बब्बर गैस एजेंसी के संचालक सुमित बब्बर का कहना है कि लोग साथ दें, सबको ऑक्सीजन देने की पूरी कोशिश की जा रही है। ऑक्सीजन भरने वाले कर्मचारियों की कमी के चलते भी दिक्कत आ रही है।
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सुमित ने बताया कि 17 अप्रैल से ऑक्सीजन की मांग बढ़ी है। तब से लगातार इसमें इजाफा हुआ है। वर्तमान में रोज करीब एक हजार सिलिंडरों की आपूर्ति अस्पतालों और अन्य लोगों के उपचार के लिए की जा रही है। रोज नौ से 10 टन ऑक्सीजन की खपत है। मांग करीब दो हजार सिलिंडर यानी करीब बीस टन ऑक्सीजन की है।
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सुमित के मुताबिक गैस भरना एक्सपर्ट का काम है। जरा सी चूक बड़ी घटना में तब्दील हो सकती है। ऐसे में कुशल कर्मचारी ही रखे जाते हैं। पिछले कुछ दिनों से ऐसे कर्मचारियों की बेहद कमी है। एजेंसी में तीन कर्मचारी हैं, जो तय समय से अधिक काम कर रहे हैं। सुमित ने बताया कि छोटा सिलिंडर (1.05 क्यूबिक) 200 रुपये और बड़ा सिलिंडर (7 क्यूबिक) पांच सौ रुपये में भरा जाता है। एक बार में 24 सिलिंडरों में ऑक्सीजन भरी जाती है, जिसमें 30 से 40 मिनट का समय लगता है। इसी वजह से देर होती है।
नेता, अफसरों का दबाव के बीच सबकी संतुष्टि की चुनौती
कानपुर में सबसे ज्यादा दिक्कत लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन (एलएमओ) की है। सरकार इसकी आपूर्ति बढ़ा दे तो ऑक्सीजन का संकट जल्द खत्म हो सकता है। यह बात ऑक्सीजन प्लांट मुरारी इंडस्ट्रियल गैस के एमडी अजय मिश्रा ने कही। उनका कहना है कि इन दिनों नेताओं और अफसरों के दबाव के बीच सबको संतुष्ट करने की चुनौती भी है।
अजय मिश्रा का कहना है कि मौजूदा स्थिति में शहर को 60 से 70 टन एलएमओ की दरकार है, जबकि अभी मात्र 10 से 15 टन ही आपूर्ति हो पा रही है। मौजूदा समय में शहर की हालत बेहद खराब हैं। रोजाना 1200 के औसत से सिलिंडरों की आपूर्ति की जा रही है। इनमें एक हजार बड़े और 200 छोटे सिलिंडर हैं। जबकि, इन दिनों चार से पांच हजार बड़े सिलिंडरों की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि सामान्य दिनों में भी इतनी ही आपूर्ति होती थी, जिसमें कुछ सप्लाई आसपास के जिलों में भी जाती थी। अभी सिर्फ चिकित्सकीय उपयोग के लिए ही ऑक्सीजन दी जा रही है। रोजाना इन्हीं 1200 सिलिंडरों को अस्पतालों, सीधे आने वाले लोगों को दिया जाता है। बड़ा सिलिंडर 18 से 20 घंटे और छोटा दो से ढाई घंटे चलता है। वह कहते हैं कि इस समय काफी दबाव है। अफसरों, नेताओं के अलावा आम जनता की जरूरतों को भी ध्यान में रखकर काम करना पड़ रहा है। हमसे जितना हो पा रहा है, वह कर रहे हैं। साथ ही सरकार से अनुरोध है कि वह एलएमओ की व्यवस्था कराए, जिससे संकट से मुक्ति मिले।
कानपुर में सबसे ज्यादा दिक्कत लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन (एलएमओ) की है। सरकार इसकी आपूर्ति बढ़ा दे तो ऑक्सीजन का संकट जल्द खत्म हो सकता है। यह बात ऑक्सीजन प्लांट मुरारी इंडस्ट्रियल गैस के एमडी अजय मिश्रा ने कही। उनका कहना है कि इन दिनों नेताओं और अफसरों के दबाव के बीच सबको संतुष्ट करने की चुनौती भी है।
अजय मिश्रा का कहना है कि मौजूदा स्थिति में शहर को 60 से 70 टन एलएमओ की दरकार है, जबकि अभी मात्र 10 से 15 टन ही आपूर्ति हो पा रही है। मौजूदा समय में शहर की हालत बेहद खराब हैं। रोजाना 1200 के औसत से सिलिंडरों की आपूर्ति की जा रही है। इनमें एक हजार बड़े और 200 छोटे सिलिंडर हैं। जबकि, इन दिनों चार से पांच हजार बड़े सिलिंडरों की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि सामान्य दिनों में भी इतनी ही आपूर्ति होती थी, जिसमें कुछ सप्लाई आसपास के जिलों में भी जाती थी। अभी सिर्फ चिकित्सकीय उपयोग के लिए ही ऑक्सीजन दी जा रही है। रोजाना इन्हीं 1200 सिलिंडरों को अस्पतालों, सीधे आने वाले लोगों को दिया जाता है। बड़ा सिलिंडर 18 से 20 घंटे और छोटा दो से ढाई घंटे चलता है। वह कहते हैं कि इस समय काफी दबाव है। अफसरों, नेताओं के अलावा आम जनता की जरूरतों को भी ध्यान में रखकर काम करना पड़ रहा है। हमसे जितना हो पा रहा है, वह कर रहे हैं। साथ ही सरकार से अनुरोध है कि वह एलएमओ की व्यवस्था कराए, जिससे संकट से मुक्ति मिले।
सांसें जरूरी, कारोबार फिर बढ़ जाएगा
कोरोना महामारी के बीच जब निजी अस्पताल ऑक्सीजन-वेंटिलेटर नाम पर लूट मचाए हैं, वहीं शहर के उद्यमी योगेश अग्रवाल ऑक्सीजन का उत्पादन करके नजीर पेश कर रहे हैं। कानपुर के अलावा अन्य जिलों में ऑक्सीजन की आपूर्ति कर वह हजारों जिंदगियां बचा रहे हैं। इसके लिए उन्होंने अपने स्टील प्लांट का उत्पादन 60 से 65 फीसदी तक घटा दिया है।
उन्होंने बताया कि ऑक्सीजन निशुल्क है। सांसों का चलना जरूरी है, उद्योग और कारोबार फिर बढ़ जाएगा। ऑक्सीजन की कमी से रोज हो रही मौतों की जानकारी के बाद रिमझिम इस्पात के एमडी योगेश अग्रवाल ने अपने परिवार के सदस्यों से बात कर स्टेनलेस स्टील प्लांट में औद्योगिक ऑक्सीजन की जगह मेडिकल ऑक्सीजन का उत्पादन शुरू कर दिया।
अब यहां से प्रतिदिन दो से ढाई हजार सिलिंडर शहर और अन्य जिलों के अस्पतालों में निशुल्क भेजे जा रहे हैं। रिमझिम स्टील देश की अग्रणी स्टील निर्माता कंपनी है। योगेश ने बताया कि बुंदेलखंड क्षेत्र के हमीरपुर जिले में भरुआ सुमेरपुर गांव में उनकी फैक्टरी है। ऑक्सीजन की किल्लत के बारे में सुना तो विचार आया कि क्यों न अपनी यूनिट की ऑक्सीजन जरूरतमंदों को उपलब्ध कराई जाए। 17 अप्रैल से प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में निशुल्क ऑक्सीजन सिलिंडर भेजे जा रहे हैं। शुरुआत में रोज 600 सिलिंडर भेजे जा रहे थे। अब यह संख्या बढ़कर 2500 हो चुकी है। जरूरत पड़ने पर ऑक्सीजन की आपूर्ति और बढ़ाने की भी तैयारी है।
कोरोना महामारी के बीच जब निजी अस्पताल ऑक्सीजन-वेंटिलेटर नाम पर लूट मचाए हैं, वहीं शहर के उद्यमी योगेश अग्रवाल ऑक्सीजन का उत्पादन करके नजीर पेश कर रहे हैं। कानपुर के अलावा अन्य जिलों में ऑक्सीजन की आपूर्ति कर वह हजारों जिंदगियां बचा रहे हैं। इसके लिए उन्होंने अपने स्टील प्लांट का उत्पादन 60 से 65 फीसदी तक घटा दिया है।
उन्होंने बताया कि ऑक्सीजन निशुल्क है। सांसों का चलना जरूरी है, उद्योग और कारोबार फिर बढ़ जाएगा। ऑक्सीजन की कमी से रोज हो रही मौतों की जानकारी के बाद रिमझिम इस्पात के एमडी योगेश अग्रवाल ने अपने परिवार के सदस्यों से बात कर स्टेनलेस स्टील प्लांट में औद्योगिक ऑक्सीजन की जगह मेडिकल ऑक्सीजन का उत्पादन शुरू कर दिया।
अब यहां से प्रतिदिन दो से ढाई हजार सिलिंडर शहर और अन्य जिलों के अस्पतालों में निशुल्क भेजे जा रहे हैं। रिमझिम स्टील देश की अग्रणी स्टील निर्माता कंपनी है। योगेश ने बताया कि बुंदेलखंड क्षेत्र के हमीरपुर जिले में भरुआ सुमेरपुर गांव में उनकी फैक्टरी है। ऑक्सीजन की किल्लत के बारे में सुना तो विचार आया कि क्यों न अपनी यूनिट की ऑक्सीजन जरूरतमंदों को उपलब्ध कराई जाए। 17 अप्रैल से प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में निशुल्क ऑक्सीजन सिलिंडर भेजे जा रहे हैं। शुरुआत में रोज 600 सिलिंडर भेजे जा रहे थे। अब यह संख्या बढ़कर 2500 हो चुकी है। जरूरत पड़ने पर ऑक्सीजन की आपूर्ति और बढ़ाने की भी तैयारी है।