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संक्रमण का नया स्ट्रेन: बिना पकड़ में आए सीधे फेफड़ों पर हमला बोल रहा कोरोना
Wed, 28 Apr 2021 01:50 PM IST
शिखा पांडेय
रजा शास्त्री, अमर उजाला, कानपुर
रजा शास्त्री, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 28 Apr 2021 01:50 PM IST
सार
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरबी कमल का कहना है कि यह स्थिति समझ में ही नहीं आ रही है। सभी की आरटीपीसीआर जांचें निगेटिव हैं।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
कोरोना का एक नया रूप सामने आया है। कोविड का यह स्ट्रेन बिना पकड़ में आए सीधे फेफड़ों में पहुंचकर उन्हें क्षतिग्रस्त करने लगता है। रोगी की आरटीपीसीआर जांच निगेटिव आती है, इससे उसे नॉन कोविड मान लिया जाता है। हैलट में इस तरह के दो-चार नहीं, तीन सौ मरीज भर्ती हैं।
इतनी संख्या में इस नए लक्षण वाले रोगी पहली बार चिह्नित किए गए हैं। हैलट के अलावा अन्य अस्पतालों में भी ऐसे रोगी मिल रहे हैं। हैलट इमरजेंसी में सांस फूलने का लक्षण लेकर ये रोगी आए थे। इन्हें न खांसी आ रही थी और न ही गले में संक्रमण था।
सांस फूलने के साथ इन्हें बुखार रहा है। इन रोगियों को हैलट के विभिन्न वार्डों में भर्ती कर दिया गया। रोगियों का ऑक्सीजन लेवल 90 प्रतिशत से जब एक-दो दिन में 40-50 हो गया तो रोगियों का एक्सरे और सीटी स्कैन कराया गया। फेफड़ों की हालत बहुत खराब निकली।
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अब इनकी स्थिति संभालनी मुश्किल पड़ रही है। निमोनिया में दी जाने वाली दवाएं खिलाई जा रही हैं, लेकिन वे असर नहीं दिखा रही हैं। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरबी कमल का कहना है कि यह स्थिति समझ में ही नहीं आ रही है। सभी की आरटीपीसीआर जांचें निगेटिव हैं।
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इतनी संख्या में इस नए लक्षण वाले रोगी पहली बार चिह्नित किए गए हैं। हैलट के अलावा अन्य अस्पतालों में भी ऐसे रोगी मिल रहे हैं। हैलट इमरजेंसी में सांस फूलने का लक्षण लेकर ये रोगी आए थे। इन्हें न खांसी आ रही थी और न ही गले में संक्रमण था।
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सांस फूलने के साथ इन्हें बुखार रहा है। इन रोगियों को हैलट के विभिन्न वार्डों में भर्ती कर दिया गया। रोगियों का ऑक्सीजन लेवल 90 प्रतिशत से जब एक-दो दिन में 40-50 हो गया तो रोगियों का एक्सरे और सीटी स्कैन कराया गया। फेफड़ों की हालत बहुत खराब निकली।
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अब इनकी स्थिति संभालनी मुश्किल पड़ रही है। निमोनिया में दी जाने वाली दवाएं खिलाई जा रही हैं, लेकिन वे असर नहीं दिखा रही हैं। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरबी कमल का कहना है कि यह स्थिति समझ में ही नहीं आ रही है। सभी की आरटीपीसीआर जांचें निगेटिव हैं।
रोगियों को ऑक्सीजन की भी बहुत जरूरत पड़ रही है। इसी तरह के रोगी कोविड स्टेटस वाले अस्पतालों में भी आए हैं। स्थिति गंभीर होने पर उन्हें हैलट रेफर कर दिया जा रहा है। इन रोगियों को कोविड रोगियों की तुलना में जल्दी वेंटिलेटर की जरूरत पड़ रही है।
केस-1
किदवईनगर की 56 साल की महिला रोगी का ऑक्सीजन लेवल 50 होने पर उन्हें हैलट इमरजेंसी लाया गया। ऑक्सीजन लगाने के बाद भी लेवल में सुधार नहीं हुआ। कोरोना की जांच के लिए सैंपल भेजा गया। रिपोर्ट निगेटिव आई। दो दिन के अंदर रोगी को वेंटिलेटर की जरूरत पड़ गई।
केस- 2
तिलकनगर के 76 साल के वृद्ध को अचानक बहुत तेज कमजोरी आई और सांस फूलने लगी। इसके अलावा कोई लक्षण नहीं था। ऑक्सीजन तेजी से गिरी। ऑक्सीजन सपोर्ट के बाद भी स्थिति नहीं सुधरी तो एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। सीटी स्कैन में फेफड़ों की स्थिति बहुत खराब निकली।
केस-1
किदवईनगर की 56 साल की महिला रोगी का ऑक्सीजन लेवल 50 होने पर उन्हें हैलट इमरजेंसी लाया गया। ऑक्सीजन लगाने के बाद भी लेवल में सुधार नहीं हुआ। कोरोना की जांच के लिए सैंपल भेजा गया। रिपोर्ट निगेटिव आई। दो दिन के अंदर रोगी को वेंटिलेटर की जरूरत पड़ गई।
केस- 2
तिलकनगर के 76 साल के वृद्ध को अचानक बहुत तेज कमजोरी आई और सांस फूलने लगी। इसके अलावा कोई लक्षण नहीं था। ऑक्सीजन तेजी से गिरी। ऑक्सीजन सपोर्ट के बाद भी स्थिति नहीं सुधरी तो एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। सीटी स्कैन में फेफड़ों की स्थिति बहुत खराब निकली।
वायरस का म्यूटेशन चला करता है। यह कोरोना का ही कोई नया स्ट्रेन हो सकता है। आरटीपीसीआर जांच को लेकर इसकी सेंसिटिविटी कम हो सकती है। इसीलिए शासन ने कोरोना जैसे लक्षण वाले रोगियों का इलाज कोविड अस्पताल के अलग वार्ड में करने के निर्देश दिए हैं।- डॉ. जीके मिश्रा, अपर निदेशक, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण