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कानपुर: कोरोना के नए स्ट्रेन से सबसे ज्यादा मौतें, प्रिजम्पटिव रोगियों की मौत का आंकड़ा पी गए अस्पताल
Fri, 07 May 2021 09:08 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Fri, 07 May 2021 09:08 AM IST
सार
ये रोगी कोविड अस्पतालों में मरते हैं, लेकिन इनका आंकड़ा पोर्टल पर चढ़ाया नहीं जाता। इससे पता ही नहीं चल रहा है कि कितने प्रिजम्पटिव रोगी मरे हैं।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
कानपुर में संक्रमितों की मौतों की संख्या कम दिखाने के लिए स्वास्थ्य विभाग आंकड़ेबाजी का खेल खेल रहा है। कोरोना के नए स्ट्रेन से सबसे अधिक मौतें हो रही हैं। आरटीपीसीआर में कोरोना के इस नए स्ट्रेन की रिपोर्ट निगेटिव आती है, सिर्फ सीटी में रोग की पुष्टि होती है।
इन्हें प्रिजम्पटिव रोगी नाम दिया गया है। इन रोगियों की मौत का कोई लेखा-जोखा नहीं है। ये रोगी कोविड अस्पतालों में मरते हैं, लेकिन इनका आंकड़ा पोर्टल पर चढ़ाया नहीं जाता। इससे पता ही नहीं चल रहा है कि कितने प्रिजम्पटिव रोगी मरे हैं।
हैलट के कोविड अस्पतालों में भी अभी तक प्रिजम्पटिव रोगियों की गिनती नहीं की गई है। इसके साथ ही निजी अस्पतालों ने भी कोई आंकड़ा स्वास्थ्य विभाग को नहीं दिया है। सिर्फ उन रोगियों के ही आंकड़ों को शामिल किया गया, जिनकी आरटीपीसीआर रिपोर्ट पॉजिटिव आती है।
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वह आंकड़ा भी पोर्टल पर देर से चढ़ाकर घपला किया जा रहा है। माइक्रो बायोलॉजी विभाग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि नए स्ट्रेन की सेंसिटिविटी कम है। इससे रिपोर्ट निगेटिव आ जाती है। इस तरह के रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ी है।
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इन्हें प्रिजम्पटिव रोगी नाम दिया गया है। इन रोगियों की मौत का कोई लेखा-जोखा नहीं है। ये रोगी कोविड अस्पतालों में मरते हैं, लेकिन इनका आंकड़ा पोर्टल पर चढ़ाया नहीं जाता। इससे पता ही नहीं चल रहा है कि कितने प्रिजम्पटिव रोगी मरे हैं।
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हैलट के कोविड अस्पतालों में भी अभी तक प्रिजम्पटिव रोगियों की गिनती नहीं की गई है। इसके साथ ही निजी अस्पतालों ने भी कोई आंकड़ा स्वास्थ्य विभाग को नहीं दिया है। सिर्फ उन रोगियों के ही आंकड़ों को शामिल किया गया, जिनकी आरटीपीसीआर रिपोर्ट पॉजिटिव आती है।
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वह आंकड़ा भी पोर्टल पर देर से चढ़ाकर घपला किया जा रहा है। माइक्रो बायोलॉजी विभाग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि नए स्ट्रेन की सेंसिटिविटी कम है। इससे रिपोर्ट निगेटिव आ जाती है। इस तरह के रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ी है।
पहले इन रोगियों को आरटीपीसीआर रिपोर्ट निगेटिव होने की वजह से कोविड अस्पतालों में भर्ती नहीं किया जाता था और नॉन कोविड अस्पताल इन्हें लेते नहीं थे। बाद में शासन ने इनके कोविड अस्पतालों में अलग वार्ड बनवाकर भर्ती करने की व्यवस्था तो करवा दी है लेकिन इनकी मौतों का आंकड़ा गायब है।
इससे रोगियों की मौतें छिपाने में निजी अस्पतालों को और आसानी हो गई है। कार्यवाहक सीएमओ डॉ. एके सिंह का कहना है कि निजी अस्पताल कोविड पॉजिटिव रिपोर्ट वाले रोगियों का ही आंकड़ा दे रहे हैं। पोर्टल पर उसी को अपलोड किया जाता है।
इन्हें कहते हैं प्रिजम्पटिव
रोगी की सांस फूलना, ऑक्सीजन सेच्युरेशन बहुत लो हो जाना जैसे लक्षण हों, लेकिन उनकी आरटीपीसीआर रिपोर्ट निगेटिव आए। सीटी स्कैन की रिपोर्ट और एक्सरे में फेफड़े क्षतिग्रस्त हों। शरीर में सारी कमियां कोरोना रोगियों की ही तरह हों तो इन्हें कोरोना रोगी मान लिया जाता है। इनके इलाज में कोरोना प्रोटोकॉल का ही पालन किया जाता है।
इससे रोगियों की मौतें छिपाने में निजी अस्पतालों को और आसानी हो गई है। कार्यवाहक सीएमओ डॉ. एके सिंह का कहना है कि निजी अस्पताल कोविड पॉजिटिव रिपोर्ट वाले रोगियों का ही आंकड़ा दे रहे हैं। पोर्टल पर उसी को अपलोड किया जाता है।
इन्हें कहते हैं प्रिजम्पटिव
रोगी की सांस फूलना, ऑक्सीजन सेच्युरेशन बहुत लो हो जाना जैसे लक्षण हों, लेकिन उनकी आरटीपीसीआर रिपोर्ट निगेटिव आए। सीटी स्कैन की रिपोर्ट और एक्सरे में फेफड़े क्षतिग्रस्त हों। शरीर में सारी कमियां कोरोना रोगियों की ही तरह हों तो इन्हें कोरोना रोगी मान लिया जाता है। इनके इलाज में कोरोना प्रोटोकॉल का ही पालन किया जाता है।