कानपुर: ठेकेदार ने खोले राज, एसआईटी को दिया 40-20-40 का हिसाब, बाेला- बिना पार्षद नहीं होता अप्रूवल और भुगतान
Kanpur News: ठेकेदार गोविंद शर्मा ने एसआईटी के सामने कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं। उसने टेंडर से लेकर भुगतान तक में 40% कमीशनबाजी का 40-20-40 का खेल उजागर करते हुए बताया कि इसमें बाबू, चीफ इंजीनियर और कई भ्रष्ट पार्षद शामिल हैं। मामले में अब पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल खुद ठेकेदार गोविंद और गुरुजी के नाम से चर्चित राजेश शुक्ला से 50 कड़े सवाल पूछेंगे।
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कानपुर में आखिर शहर की जर्जर सड़कें क्यों जनता को दर्द दे रही हैं इसका खुलासा नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार के मुख्य आरोपी आगरा के ठेकेदार गोविंद शर्मा ने किया। गोविंद ने रविवार को एसआईटी के समक्ष अपने बयान दर्ज कराए। सूत्रों के अनुसार ठेकेदार ने टेंडर डालने से लेकर काम पूरा होने पर होने वाले भुगतान तक के लिए होने वाले कमीशन के बंदरबांट से पर्दा हटाया। कमीशन के इस खेल में नगर निगम के बाबुओं से लेकर चीफ इंजीनियर तक शामिल हैं।
किसी काम का अप्रूवल हो या फिर उसका भुगतान कराना हो तो इसमें पार्षद की भूमिका सबसे अहम होती है। एसआईटी के सूत्रों का कहना है कि गोविंद के बयान जनता के गुनहगारों को सजा दिलाने में कारगर साबित होंगे। बता दें कि बीते माह ठेकेदार गोविंद शर्मा व उसके साथियों संदीप जैन और रज्जन बाजपेई के खिलाफ नगर निगम के टेंडर प्रक्रिया में धांधली करने और रंगदारी वसूलने का मामला फजलगंज थाने में दर्ज कराया गया था।
नगर निगम में बैठे लोगों को देना पड़ता है कमीशन
नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने तहरीर दी थी। पुलिस ने रज्जन और संदीप को गिरफ्तार किया था, जबकि गोविंद ने गिरफ्तारी पर स्टे ले रखा है। फिलहाल रज्जन और संदीप भी जमानत पर बाहर हैं। गोविंद ने रविवार को एसआईटी और डीसीपी सेंट्रल अतुल श्रीवास्तव के समक्ष अपने बयान दर्ज कराए हैं। गोविंद ने बताया कि किसी तरह टेंडर लेने के लिए ठेकेदारों को नगर निगम में एक, डेढ़, दो, ढाई और तीन से लेकर पांच-सात फीसदी तक कमीशन नगर निगम में बैठे लोगों को देना पड़ता है।
कमीशन में खप जाती है 40 फीसदी धनराशि
ठेकेदार ने बताया करीब 40 फीसदी धनराशि तो कमीशन देने में ही खप जाती है। सड़कों के निर्माण कार्य के लिए स्वीकृत धनराशि का सिर्फ 40 फीसदी ही खर्च हो पाता है। घटिया निर्माण कार्य को भी कमीशन के चक्कर में कुछ पार्षद ओके कर देते हैं। गुणवत्तापूर्ण कार्य पूरा होने की रिपोर्ट लगाकर ठेकेदारों के भुगतान में भी मददगार साबित होते हैं। सूत्रों का दावा है कि गोविंद ने कुछ भ्रष्ट पार्षदों और अधिकारियों के नाम तक एसआईटी को बताए हैं। गोविंद ने एसआईटी को यह भी बताया है कि टेंडर प्रक्रिया में सिंडीकेट से बाहर के ठेकेदारों को डराने-धमकाने की जिम्मेदारी रज्जन बाजपेई ही संभालता था।
चुनाव तक लड़ चुका ठेकेदार
सूत्रों के अनुसार गोविंद ने बताया कि उसने पहले केडीए में छोटी सी नौकरी की। उसके मामा नगर निगम में नौकरी करते थे। इस कारण बाद में वह भी नगर निगम में नौकरी करने लगे। धीरे-धीरे ठेकेदारी के मैदान में उतरा। पैसा कमाया तो गृह जनपद राजस्थान से 2007 में बसपा के टिकट से चुनाव भी लड़ा। 2012 में वह भाजपा में शामिल हो गया गया। केडीए से पहले उसने आगरा में भी एडीए में भी नौकरी की थी।
सीपी भी करेंगे गोविंद और गुरुजी से 50 सवाल
एसआईटी के सूत्रों के अनुसार गोविंद के बयानों के बाद एक बार फिर से उसे पूछताछ के लिए जल्द बुलाया जाएगा। इस बार उसके साथ-साथ ब्लैक लिस्ट कंपनी तिरुपति ट्रेडर्स के संचालक राजेश शुक्ला जो कि नगर निगम में गुरुजी के नाम से जाने जाते हैं उन्हें भी बुलाया जाएगा। दोनों से इस बार एसआईटी के साथ पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल भी 50 सवाल करेंगे। सवालों की सूची तैयार की जा रही है।
ठेकेदारों की ये कंपनियां हुई थीं ब्लैक लिस्टेड
- मेसर्स दिलीप बाजपेई
- मेसर्स अजय इंटर प्राइजेज, मालिक अजय बाजपेई
- पारसनाथ बिल्डर, मालिक संदीप जैन
- कैला इंटरप्राइजेज, मालिक गोविंद शर्मा
- तिरुपति ट्रेडर्स, प्रार्थना शुक्ला पत्नी प्रोफेसर राजेश शुक्ला
आरोपी ठेकेदार के बयानों से कुछ महत्वपूर्ण जानकारी मिली हैं। इस पर एसआईटी अपनी जांच आगे बढ़ा रही है। भ्रष्टाचार के किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा। एसआईटी की जांच पूरी होते ही कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। -रघुबीर लाल, पुलिस कमिश्नर