Kanpur: कंपनियों पर उपभोक्ताओं का 33122 करोड़ बकाया, फिर दरों में वृद्धि क्यों…9-10 रुपये यूनिट हो जाएगी बिजली
Kanpur News: उत्तर प्रदेश उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने निजीकरण और दरों में वृद्धि का विरोध किया। कहा कि अभी पूरे प्रदेश में बिजली दर समान है, निजीकरण हो जाने के बाद सभी बिजली कंपनियों की बिजली दर अलग-अलग होगी।
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प्रदेश के बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं का 33122 करोड़ रुपये सरप्लस है। ऐसे में सबसे पहले बिजली दरों में करीब 45 फीसदी कमी होनी चाहिए न कि वृद्धि। विद्युत नियामक आयोग ने 2001-17 के बीच की ऑडिटर बैलेंस शीट की जांच कर यह आंकड़ा जारी किया था। ये बातें आर्यनगर स्थित टीएसएच में हुई उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग की बैठक में उद्यमियों, आम लोगों और उत्तर प्रदेश उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहीं।
यूपी में बिजली की दरों में वृद्धि करने के यूपीपीसीएल के प्रस्ताव को लेकर हुई बैठक में उपभोक्ताओं-उद्यमियों ने निजीकरण और केस्को की प्रस्तावित 30-40% टैरिफ वृद्धि का पुरजोर विरोध किया। उद्यमियों ने कहा कि बेवजह टैरिफ में नौ से दस रुपये प्रति यूनिट की वृद्धि से महंगाई बढ़ेगी और इसका सीधा प्रभाव उद्योगों और उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार (पूर्व आईएएस) की अध्यक्षता में हुई बैठक में अवधेश ने कहा कि नोएडा पॉवर कंपनी लिमिटेड पर 1000 करोड़ का सरप्लस (जो धनराशि पहले कॉरपोरेशन द्वारा अलग-अलग मदों में गलत तरीके से वसूली गई) निकला था।
स्थिर व प्रतिस्पर्धी दरों की अपनानी चाहिए नीति
इस पर तीन साल पहले 10 प्रतिशत बिजली दरें घटाई गई थीं। ऐसा यूपी की सभी बिजली कंपनियों को करना चाहिए। आईआईए के पूर्व अध्यक्ष सुनील वैश्य ने कहा कि उप्र में पहले से ही औद्योगिक इकाइयों को ऊंची दरों पर बिजली मिल रही है। ऐसे में किसी भी प्रकार की वृद्धि एमएसएमई उद्योगों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालेगी। राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष आलोक अग्रवाल ने कहा कि राज्य सरकार व आयोग को उद्योग हित में स्थिर व प्रतिस्पर्धी दरों की नीति अपनानी चाहिए।
न्यूनतम चार्ज और फिक्स चार्ज को गलत ठहराया
इस दौरान संस्था के अध्यक्ष आरके अग्रवाल, दिनेश बरासिया, विक्रांत अग्रवाल व सदस्यों ने ज्ञापन भी दिया। आईआईए के पदाधिकारी आलोक अग्रवाल ने कहा कि नेट बिलिंग की समस्याओं से उपभोक्ता लगातार परेशान है। टैरिफ में इजाफा नियमों के विपरीत है। फीटा उद्योग व्यापार संघ के महासचिव उमंग अग्रवाल और अनूप जैन ने केस्को की प्रस्तावित टैरिफ वृद्धि का पुरजोर विरोध किया। उमंग ने वाणिज्यिक और औद्योगिक संयोजनों पर न्यूनतम चार्ज और फिक्स चार्ज को पूरी तरह गलत ठहराया।
दरों को लेकर होनी हैं कई बैठकें
व्यापारी नेता शेष नारायण त्रिवेदी ने कहा कि पहले से ही कारोबारी बिजली कटौती से परेशान हैं। ऐसे में दरों में वृद्धि कारोबार को पूरी तरह से खत्म कर देगी। आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि बिजली दरों को लेकर कई बैठकें होनी हैं। 25 जुलाई तक सभी डिस्कॉम में उपभोक्ताओं से विचार-विमर्श के बाद किसी नतीजे पर पहुंचेंगे। इस मौके पर आयोग के सदस्य सुनीत कुमार अग्रवाल, संजय कुमार सिंह, सरबजीत सिंह ढींगरा व केस्को एमडी सैमुअल पॉल एन मौजूद रहे।
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष केस्को की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
उत्तर प्रदेश उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने निजीकरण और दरों में वृद्धि का विरोध किया। कहा कि अभी पूरे प्रदेश में बिजली दर समान है, निजीकरण हो जाने के बाद सभी बिजली कंपनियों की बिजली दर अलग-अलग होगी। वर्तमान में केस्को की ओर से जिन कंपनियों को काम सौंपा गया है, उनमें से दो कंपनियां पंजाब और हरियाणा में ब्लैक लिस्टेड हैं। ऐसे में केस्को ने बिना जांच किए इनको काम कैसे दे दिया। केस्को में 87 करोड़ रुपये से अधिक की बिजली चोरी हो रही है। निजीकरण किसी भी सूरत में नहीं होने दिया जाएगा।
आयोग के अध्यक्ष ने ये दिए निर्देश
- फिक्स चार्ज खत्म करना संभव नहीं।
- प्रत्येक सर्किल में उपभोक्ता फोरम गठित कर शिकायतों की सुनवाई हो।
- स्मार्ट मीटर लगाने की रफ्तार को बढ़ाया जाए।
- ग्रामीण क्षेत्रों के छोटे दुकानदारों से अलग से कनेक्शन देने की सुविधा दी जाए।
- औद्योगिक क्षेत्र को स्काडा से जोड़ने की व्यवस्था का प्लान तैयार किया जाए।