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कानपुर: छह क्लर्कों की भर्ती घोटाले में सीबीआई की जांच शुरु, अफसरों से मांगा जवाब
Fri, 25 Sep 2020 11:53 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 25 Sep 2020 11:53 AM IST
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सीबीआई
- फोटो : ani
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कानपुर में डायरेक्टर जनरल ऑफ क्वालिटी एश्योरेंस (डीजीक्यूए) कांप्लेक्स स्थित सामान्य वस्तु नियंत्रणालय में वर्ष 2016 में छह क्लर्कों की भर्ती घोटाले की सीबीआई जांच शुरू हो गई है। सीबीआई की लखनऊ शाखा ने नियुक्ति बोर्ड में शामिल रहे सभी अधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए 25 सितंबर को अपना पक्ष रखने को कहा है।
दिल्ली सीबीआई निदेशक ने लखनऊ में तैनात अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रामसिंह को पूछताछ करने के निर्देश दिए हैं। सूत्र बताते हैं कि दिल्ली मुख्यालय में तैनात डीजीक्यूए के निर्देशों के तहत विभाग के तत्कालीन नियंत्रक देवकीनंदन ने छह क्लर्कों की नियुक्ति के लिए आदेश करके ऑफिस के वरिष्ठ अधिकारी डॉ. संतोष तिवारी को भर्ती बोर्ड का चेयरमैन बनाया था।
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दिल्ली सीबीआई निदेशक ने लखनऊ में तैनात अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रामसिंह को पूछताछ करने के निर्देश दिए हैं। सूत्र बताते हैं कि दिल्ली मुख्यालय में तैनात डीजीक्यूए के निर्देशों के तहत विभाग के तत्कालीन नियंत्रक देवकीनंदन ने छह क्लर्कों की नियुक्ति के लिए आदेश करके ऑफिस के वरिष्ठ अधिकारी डॉ. संतोष तिवारी को भर्ती बोर्ड का चेयरमैन बनाया था।
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उन्हीं की देखरख में अभ्यर्थियों की परीक्षा हुई। परीक्षा में पास होने के बाद भी नियुक्ति न होने की शिकायत कई अभ्यर्थियों ने रक्षा मंत्री, डीजीक्यूए और सीबीआई को लिखित रूप में की। शिकायत में आरोप है कि चेयरमैन संतोष तिवारी ने विभाग के ही आफिस अधीक्षक एवं डीजीक्यूए सलाहकार समिति के सदस्य एचएन तिवारी से मिलकर लाखों रुपये लेकर अपने रिश्तेदारों एवं जानने वालों की भर्ती करा दी।
भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने पर तत्कालीन रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर ने जांच के आदेश दिए थे। इस पर विभाग के तत्कालीन महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल शमशेर सिंह ने विजिलेंस जांच कराई, जिसमें शिकायत सही पाई गई।
शमशेर सिंह के आदेश पर उक्त सभी छह क्लर्कों को बर्खास्त कर दिया गया था, लेकिन कर्मचारी नेता एचएन तिवारी ने हाईकोर्ट से स्टे ले लिया था। तब से सभी क्लर्क अपनी सीटों पर कार्यरत हैं। हाल ही में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के पास भी शिकायतें पहुंचीं तो सीबीआई सक्रिय हुई और क्राइम ब्रांच लखनऊ को जांच सौंप दी है।
भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने पर तत्कालीन रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर ने जांच के आदेश दिए थे। इस पर विभाग के तत्कालीन महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल शमशेर सिंह ने विजिलेंस जांच कराई, जिसमें शिकायत सही पाई गई।
शमशेर सिंह के आदेश पर उक्त सभी छह क्लर्कों को बर्खास्त कर दिया गया था, लेकिन कर्मचारी नेता एचएन तिवारी ने हाईकोर्ट से स्टे ले लिया था। तब से सभी क्लर्क अपनी सीटों पर कार्यरत हैं। हाल ही में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के पास भी शिकायतें पहुंचीं तो सीबीआई सक्रिय हुई और क्राइम ब्रांच लखनऊ को जांच सौंप दी है।