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Kanpur: मरने के बाद पैर में प्लास्टर बांधने का मामला, कमेटी ने जांच शुरू की, प्राचार्य ने की पूछताछ
Fri, 30 Dec 2022 11:32 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Fri, 30 Dec 2022 11:32 AM IST
सार
कानपुर के हैलट अस्पताल में आयुष्मान लाभार्थी के साथ लापरवाही बरतने के मामले में तीन सदस्यीय कमेटी ने जांच शुरू कर दी है। उसकी रिपोर्ट आने के बाद अगली कार्रवाई की जाएगी।
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आयुष्मान लाभार्थी अशोक के साथ लापरवाही बरतने का मामला
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कानपुर के हैलट अस्पताल में बुधवार को आयुष्मान रोगी अशोक (50) की मौत के बाद पैर में प्लास्टर बांधे जाने के मामले में तीन सदस्यीय कमेटी ने जांच शुरू कर दी है। परिजनों का कहना है कि जब रोगी के शव को बाहर निकाला गया था तो उसके पैर में बंधा प्लास्टर गीला था। जब वह तड़के अशोक को हैलट इमरजेंसी लेकर आए थे तो पैर में प्लास्टर नहीं था।
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इमरजेंसी से बाहर शव आने के बाद ही पैर में प्लास्टर पाया गया। वहीं अस्थि रोग विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. संजय कुमार ने बताया कि रोगी को रात में ही प्लास्टर बांध दिया गया था। उनका दावा है कि प्लास्टर 24 घंटे तक गीला रहता है। परिजन समझ नहीं पाए। वहीं जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने अलग से इस संबंध में जानकारी ली।
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हैलट इमरजेंसी में जाकर पूछताछ की। फर्रुखाबाद के सुल्तानपुर गांव निवासी अशोक के छोटे भाई रंजीत का कहना है कि अगर हैलट इमरजेंसी की सीसीटीवी फुटेज देखी जाए तो पता चल जाएगा कि रोगी के पैर पर इमरजेंसी में आते वक्त प्लास्टर नहीं चढ़ा हुआ था। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी फाइल आयुष्मान योजना की बनी हुई थी।
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उसी के दो पास भी जारी किए गए थे। इमरजेंसी में रोगी फाइल बनवाते वक्त रोगी के आयुष्मान योजना का लाभार्थी होने के संबंध में पूछा जाता है। उनकी आंखों के सामने रोगी तड़प कर मरा है। डॉ. संजय कुमार का कहना है कि पैर के फ्रैक्चर से रोगी की मौत नहीं होती। रोगी अशोक के गुर्दे खराब हो गए थे। सीरम क्रेटेनिन छह रहा है। इसी वजह से रोगी को मेडिसिन भेजा गया था। वहीं प्राचार्य डॉ. संजय काला का कहना है कि कमेटी जांच कर रही है। उसकी रिपोर्ट आने के बाद अगली कार्रवाई की जाएगी।