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Kanpur: रंगदारी व धमकाने में अधिवक्ता अखिलेश दुबे समेत दो गए जेल, एलआईयू सतर्क

Thu, 07 Aug 2025 07:14 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Thu, 07 Aug 2025 07:14 PM IST
सार

Kanpur News: झूठे आरोप लगाकर फिरौती मांगने के मामले में गिरफ्तार वकील अखिलेश दुबे समेत दो को जेल भेजा गया।

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Kanpur: Advocate Akhilesh Dubey and two others sent to jail for extortion and intimidation
अधिवक्ता अखिलेश दुबे - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भाजपा नेता को झूठे मुकदमे में फंसाकर रंगदारी मांगने और धमकाने के मामले में आरोपी अधिवक्ता अखिलेश दुबे व आयुष उर्फ लवी मिश्रा को सीजेएम सूरज मिश्रा ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। दोनों की ओर से जमानत अर्जी भी दाखिल की गई थी लेकिन दस साल तक की सजा का अपराध होने के कारण जमानत अर्जी सीजेएम कोर्ट से खारिज हो गई है। शुक्रवार को सेशन कोर्ट में अर्जी दाखिल की जा सकती है।
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भाजपा नेता रवि सतीजा ने बर्रा थाने में बुधवार को रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इसमें आरोप है कि अखिलेश दुबे व साथियों ने मिलकर वादी मुकदमा रवि सतीजा के खिलाफ बर्रा थाने में पॉक्सो एक्ट के तहत एक झूठा मुकदमा लिखवाया। जांच में घटना झूठी पाए जाने पर एफआर लगी तो आरोपियों ने रवि को उसके सोना मेंशन बिल्डिंग की छत पर कब्जे और जान माल की धमकी दी। वादिनी मुकदमा के माध्यम से कोर्ट में कूटरचित शपथपत्र दिलवाया गया फिर रवि को अखिलेश ने अपने कार्यालय में बुलाकर मुकदमे से बचाने के लिए 50 लाख रुपये रंगदारी मांगी। पुलिस ने मुकदमे में अखिलेश दुबे और लवी मिश्रा को बुधवार रात गिरफ्तार कर लिया था। अखिलेश की रात 8:40 बजे और लवी की 9:30 बजे गिरफ्तारी दिखाई गई है। सुबह लगभग 10:30 बजे दोनों को कड़ी सुरक्षा में सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया।
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डीजीसी दिलीप अवस्थी, जेडी कुंवर विक्रम सिंह व अभियोजन अधिकारी आराध्य मिश्रा ने कोर्ट में दोनों को रंगदारी मांगने, धमकाने, घर में घुसने और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने के मामले में न्यायिक हिरासत में जेल भेजने की मांग की। तर्क रखा कि 6 अगस्त को रिपोर्ट दर्ज हुई है। 24 घंटे में विवेचना पूरी नहीं हो सकती। आरोपी सबूतों को प्रभावित कर सकते हैं। वहीं अखिलेश के अधिवक्ता एमके द्विवेदी ने कहा कि अखिलेश व लवी के खिलाफ कूटरचना, रंगदारी मांगने और किसी घर में घुसने का कोई सबूत नहीं है। रुपयों का कोई लेनदेन नहीं हुआ है। वादिनी ने खुद कोर्ट पहुंचकर अपने हस्ताक्षर से शपथपत्र दाखिल किया है इसलिए इसमें अखिलेश के खिलाफ कूटरचना का कोई अपराध नहीं बन रहा। ऐसा भी कोई सबूत नहीं मिला जिससे यह साफ होता कि आरोपियों ने रवि के घर या उसकी किसी संपत्ति में घुसने की कोशिश की। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने अखिलेश और लवी को सिर्फ रंगदारी और धमकाने के आरोप में ही रिमांड स्वीकार किया जबकि घर में घुसने व कूटरचना के पर्याप्त साक्ष्य न होने पर इनसे संबंधित धाराओं में रिमांड खारिज कर दिया। इसके बाद जमानत अर्जी दाखिल की गई लेकिन गंभीर अपराध मानकर कोर्ट ने अर्जी खारिज कर दी। लगभग 11:45 बजे दोनों को कड़ी सुरक्षा में कोर्ट से जेल भेज दिया गया।
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कड़ी सुरक्षा में लाया गया कोर्ट, एलआईयू भी सतर्क
अखिलेश और लवी को पुलिस की कड़ी सुरक्षा में जिलाधिकारी कार्यालय के पीछे वाले गेट से लाया गया और सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया। इस दौरान जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर, सीजेएम कोर्ट के बाहर और कचहरी के शताब्दी द्वार पर भी भारी फोर्स तैनात की गई थी। क्यूआरटी के जवान भी मुस्तैद थे और एलआईयू की टीम भी पल-पल की जानकारी से अफसरों को अपडेट करती रही।

 

सात धाराओं में मांगा रिमांड पर तीन में ही मिला
पुलिस की ओर से बीएनएस की धारा 308(2), 308(5), 338, 336(3), 340(2), 351(3), 329(3) में कोर्ट से रिमांड मांगा गया था। यह धाराएं रंगदारी, धमकाने, कूटरचना और घर में घुसने के अपराध से संबंधित हैं लेकिन कूटरचना और घर में घुसने के अपराध से संबंधित पर्याप्त सबूत कोर्ट में पेश नहीं किए जा सके जिस पर कोर्ट ने सिर्फ रंगदारी और धमकाने से संबंधित धाराओं 308(2), 308(5) व 351(3) में ही रिमांड मंजूर किया। इसमें धारा 308(5) में सर्वाधिक दस साल तक की सजा का प्रावधान है।
 
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