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Kannauj: 19 साल में चौथी बार बदलेगा मेडिकल कॉलेज का नाम, पढ़ें पूरी जानकारी

Wed, 07 Feb 2024 06:09 PM IST
शिखा पांडेय तारिक इकबाल, अमर उजाला, कन्नौज
तारिक इकबाल, अमर उजाला, कन्नौज Published by: शिखा पांडेय Updated Wed, 07 Feb 2024 06:09 PM IST
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Kannauj: Name of medical college will change for the fourth time in 19 years
राजकीय मेडिकल कॉलेज - फोटो : अमर उजाला

निर्माण के दो दशक के दौरान यह चौथी बार होगा जब मेडिकल कॉलेज का नाम बदला जाएगा। तीन फरवरी को मुख्यमंत्री की ओर से इसके लिए की गई घोषणा के बाद राजकीय मेडिकल कॉलेज को बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर मेडिकल कॉलेज के नाम से जाना जाएगा। हालांकि अभी इसका शासनादेश जारी नहीं हुआ है। घोषणा के बाद प्रशासन ने इसका प्रस्ताव बनाकर भेज दिया है।

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तिर्वा में कन्नौज रोड पर मेडिकल कॉलेज की स्थापना वर्ष 2006 में हुई थी। तब इसका नाम राजकीय एलोपैथिक कॉलेज था। अगले ही साल प्रदेश में सियासी निजाम बदला। बसपा की सरकार में वर्ष 2007 में इसका नाम बदलकर बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर राजकीय मेडिकल कॉलेज कर दिया गया। पांच साल बाद सूबे में दोबारा सपा सरकार बनी तो वर्ष 2012 में इसका नाम राजकीय मेडिकल कॉलेज कर दिया गया। वर्ष 2017 में सूबे में सत्ता में भाजपा बनी। नाम तो नहीं बदला गया, लेकिन सपा शासन में बदले गए नाम पर सियासत खूब हुई। वर्ष 2022 में दोबारा सत्ता पर भाजपा काबिज हुई तो मेडिकल का नाम बदलने की आवाज उठने लगी।
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सदर सीट से विधायक व समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने इसके लिए बाकायदा मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखकर इसकी आवाज उठाई। उन्होंने मुख्यमंत्री से फिर वही मांग दोहराई। मुख्यमंत्री ने मांग को मंजूर करने का ऐलान करते हुए फिर से बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर राजकीय मेडिकल कॉलेज करने का ऐलान कर दिया। 12 साल बाद मेडिकल कॉलेज का नाम बदलने की प्रक्रिया की जा रही है।

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वर्ष 2012 से शुरू हुई एमबीबीएस की पढ़ाई
मेडिकल कॉलेज के निर्माण के बाद वर्ष 2009 में ओपीडी की शुरुआत हो गई थी। वर्ष 2012 में एनएमसी से मंजूरी मिलने के बाद 100 सीटों पर एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू हो गई थी। मेडिकल कॉलेज का संचालन तो शुरू करा दिया गया, लेकिन कमियों पर ध्यान नहीं दिया गया। अपने संचालन के 14 सालों से असुविधाओं से जूझ रहे मेडिकल कॉलेज को सुविधाएं देने के नाम पर शासन बजट देने में कतरा रहा है और सरकार नाम बदल कर मतदाताओं को रिझाने की कवायद कर रही है।

कॉर्डियोलॉजी-कैंसर अस्पताल को बजट का इंतजार
मेडिकल कॉलेज परिसर में ही कॉर्डियोलॉजी व कैंसर अस्पताल की इमारत भी बनकर तैयार है। पिछले सात साल से यह दोनों अस्पताल संचालन की राह तक रहे हैं। कैंसर अस्पताल में ओपीडी की जा रही है, लेकिन गंभीर मरीजों का इलाज नहीं हो रहा है। सृजित पदों पर भर्ती नहीं हुई है। उपकरणों के लिए बजट को मंजूरी नहीं मिली है।

364 नर्स की जरूरत, तैनाती 71 की
मेडिकल कॉलेज को पूर्ण रूप से संचालित करने के लिए 364 नर्सों के पदों को सृजित किया गया था। मौजूदा समय में सिर्फ 71 नर्स ही तैनात हैं। पिछले दिनों नर्स की संख्या बढ़ाने की संख्या की मंजूरी मिली है, लेकिन उस पर अब तक अमल शुरू नहीं हो सका है।

सूबे में सपा सरकार के दौरान मेडिकल कॉलेज की स्थापना की गई थी। तत्कालीन सांसद अखिलेश यादव ने जनता की मांग पर इसे मंजूर करवाया था। वर्ष 2012 में जब सपा की सरकार आई तो एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू हुई। उसी दौरान मेडिकल कॉलेज में कैंसर अस्पताल और कार्डियोलॉजी बनी। भाजपा की सात साल की सरकार में मेडिकल कॉलेज में कोई सुविधा उपलब्ध नहीं करवा सकी है। इलाज के लिए डॉक्टरों की कमी है, पढ़ाई के लिए फैकल्टी का टोटा है। सिर्फ नाम की सियासत की जा रही है।- कलीम खान, सपा जिलाध्यक्ष

समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान मेडिकल कॉलेज के नाम से बाबा साहेब का नाम हटाया गया था। तब सपा के कार्यकर्ताओं ने बोर्ड को तोड़ दिया था। सपा ने बाबा साहेब का अपमान किया था। भाजपा की सरकार ने बाबा साहेब के सम्मान में मेडिकल कॉलेज का नाम फिर से उनके ही नाम करने का फैसला किया है। फर्क साफ है। सोशल मीडिया पर पोस्ट।- असीम अरुण, समाज कल्याण मंत्री
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