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Kannauj: कांटे के मुकाबले की गवाह बनी इत्रनगरी, संसदीय चुनाव से जुड़ी हैं कई दिलचस्प यादें
Thu, 11 Apr 2024 09:45 PM IST
शिखा पांडेय
तारिक इकबाल, अमर उजाला, कन्नौज
तारिक इकबाल, अमर उजाला, कन्नौज
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 11 Apr 2024 09:45 PM IST
सार
वर्ष 1967 के चुनाव में डॉ. राम मनोहर लोहिया सिर्फ 500 वोटों से जीते थे। वर्ष 2014 और 2019 में भी सपा-भाजपा के बीच सांसों को थाम देने वाली टक्कर हुई थी।
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कन्नौज द्वार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
इत्र और इतिहास की नगरी कन्नौज में संसदीय चुनाव से जुड़ी कई दिलचस्प यादें जुड़ी हैं। यहां न सिर्फ पसंद के उम्मीदवार को बड़े अंतर से जीत मिलती रही है, बल्कि कई बार तो सीधी टक्कर में उम्मीदवारों के बीच जोरदार लड़ाई हुई है। पहले ही चुनाव में हुआ कांटे का मुकाबला अब तक लोगों के दिलों में है, जब सोशलिस्ट पार्टी के डॉ. राम मनोहर लोहिया ने कांग्रेस के उम्मीदवार सत्य नारायण मिश्र को सिर्फ 472 वोटों से हराया था।
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कन्नौज संसदीय सीट के लिए वर्ष 1967 से वर्ष 2019 के बीच कुल 16 बार लोकसभा चुनाव हो चुका है। इसमें वर्ष 2000 और 2012 में हुआ उपचुनाव भी शामिल है। यहां के सभी चुनाव में पहले ही चुनाव में कांटे का मुकाबला हुआ था। नई बनी सीट पर दावा जताने के लिए बड़े समाजवादी नेता और तत्कालीन सरकार की नीतियों के आलोचक डॉ. राम मनोहर लोहिया ने यहां से दावा किया था। उनके सामने कांग्रेस ने प्रयागराज के वरिष्ठ नेता सत्यनारायण मिश्र को मुकाबले में उतारा था।
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अपनी सादगी भरे अंदाज से गांव-गांव जाकर डॉ. लोहिया ने माहौल को अपने पक्ष में कर लिया। हालांकि चुनाव आसान नहीं रहा। पहले चुनाव में कुल 294581 वोट पड़े थे। गिनती के दौरान 283423 वोट वैध पाए गए थे। उसमें से डॉ. राम मनोहर लोहिया के हिस्से में 93578 वोट आए थे। उनके निटकतम प्रतिद्वंदी कांग्रेस के सत्यनाराय मिश्र को सिर्फ 93106 वोट ही मिले। दोनों के बीच कांटे के मुकाबले में जीत-हार का अंतर सिर्फ 472 वोटों का रहा था। उसके बाद उस तरक कांटे का मुकाबला फिर देखने को नहीं मिला। हर बार जीत का अंतर बढ़ता ही गया।
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पिछले दो चुनाव में सपा-भाजपा में जोरदार टक्कर
कभी यहां हाशिए पर रही भाजपा ने पिछले दो चुनाव के दौरान सपा को जोरदार टक्कर दी है। वर्ष 2009 के चुनाव में तीसरे नंबर पर रही भाजपा ने वर्ष 2014 के चुनाव में जोरदार टक्कर देते हुए दूसरा स्थान हासिल किया था। वर्ष 2019 के अगले ही चुनाव में भाजपा ने जोरदार मुकाबला करते हुए सपा से पिछली हार का बदला ले लिया।
कभी यहां हाशिए पर रही भाजपा ने पिछले दो चुनाव के दौरान सपा को जोरदार टक्कर दी है। वर्ष 2009 के चुनाव में तीसरे नंबर पर रही भाजपा ने वर्ष 2014 के चुनाव में जोरदार टक्कर देते हुए दूसरा स्थान हासिल किया था। वर्ष 2019 के अगले ही चुनाव में भाजपा ने जोरदार मुकाबला करते हुए सपा से पिछली हार का बदला ले लिया।
पहले नजदीकी मुकाबले में डिंपल जीतीं, अगली बार कड़ी टक्कर देकर जीते सुब्रत
वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान यहां सपा और भाजपा के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला था। सपा की डिंपल यादव को 489164 वोट हासिल हुए थे। कड़ी टक्कर देते हुए भाजपा के सुब्रत पाठक ने 469257 वोट हासिल किया था। बेहद नजदीकी मुकाबले में वह सिर्फ 19907 वोटों से शिकस्त खा गए। हालांकि 2019 के अगले ही चुनाव में उन्होंने जोरदार बराबरी की। उनके खाते में न सिर्फ पिछले चुनाव से ज्यादा वोट आए बल्कि पांच लाख का आंकड़ा पार करते हुए कुल 563087 वोट हासिल किया। डिंपल यादव ने उनका पीछा तो खूब किया, लेकिन वह 550734 वोट हासिल कर बेहद नजदीकी मुकाबले में 12353 वोट से अपनी सीट गंवा बैठीं। इत्रनगरी के इतिहास में वर्ष 1967 के चुनाव के 52 साल बाद इनती जोरदार टक्कर देखने को मिली।
वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान यहां सपा और भाजपा के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला था। सपा की डिंपल यादव को 489164 वोट हासिल हुए थे। कड़ी टक्कर देते हुए भाजपा के सुब्रत पाठक ने 469257 वोट हासिल किया था। बेहद नजदीकी मुकाबले में वह सिर्फ 19907 वोटों से शिकस्त खा गए। हालांकि 2019 के अगले ही चुनाव में उन्होंने जोरदार बराबरी की। उनके खाते में न सिर्फ पिछले चुनाव से ज्यादा वोट आए बल्कि पांच लाख का आंकड़ा पार करते हुए कुल 563087 वोट हासिल किया। डिंपल यादव ने उनका पीछा तो खूब किया, लेकिन वह 550734 वोट हासिल कर बेहद नजदीकी मुकाबले में 12353 वोट से अपनी सीट गंवा बैठीं। इत्रनगरी के इतिहास में वर्ष 1967 के चुनाव के 52 साल बाद इनती जोरदार टक्कर देखने को मिली।
तीन सबसे जोरदार मुकाबले
- वर्ष 1967 में सोशलिस्ट पार्टी के डॉ. राम मनोहर लोहिया 472 वोट से जीते
- वर्ष 2014 में समाजवादी पार्टी की डिंपल यादव 19907 वोट से जीतीं
- वर्ष 2019 में भारतीय जनता पार्टी के सुब्रत पाठक 12353 वोट से जीते
- वर्ष 1967 में सोशलिस्ट पार्टी के डॉ. राम मनोहर लोहिया 472 वोट से जीते
- वर्ष 2014 में समाजवादी पार्टी की डिंपल यादव 19907 वोट से जीतीं
- वर्ष 2019 में भारतीय जनता पार्टी के सुब्रत पाठक 12353 वोट से जीते
इन मुकाबलों का नतीजा रहा नजदीकी
- 1971 में कांग्रेस के सत्य नारायन मिश्र 43115 वोट से जीते
- 1980 में जनपा पार्टी के छोटे सिंह यादव 39137 वोट से जीते
- 1998 में समाजवादी पार्टी प्रदीप यादव 42504 वोट से जीते
तीन सबसे बड़ी जीत
- 2004 में सपा के अखिलेश यादव 307373 वोट के बड़े अंतर से जीते
- 1971 में बीएलडी के रामप्रकाश त्रिपाठी 171042 वोट से जीते
- 2009 में सपा के अखिलेश यादव 115864 वोटों से जीते
- 1971 में कांग्रेस के सत्य नारायन मिश्र 43115 वोट से जीते
- 1980 में जनपा पार्टी के छोटे सिंह यादव 39137 वोट से जीते
- 1998 में समाजवादी पार्टी प्रदीप यादव 42504 वोट से जीते
तीन सबसे बड़ी जीत
- 2004 में सपा के अखिलेश यादव 307373 वोट के बड़े अंतर से जीते
- 1971 में बीएलडी के रामप्रकाश त्रिपाठी 171042 वोट से जीते
- 2009 में सपा के अखिलेश यादव 115864 वोटों से जीते