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दिन में तीन बार रंग बदलता है ये शिवलिंग!, आज भी कायम है रहस्य

Mon, 31 Jul 2017 08:24 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Mon, 31 Jul 2017 08:24 AM IST
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घाटमपुर के सिमौर गांव के मंदिर में स्थापित कालेश्वर महादेव मंदिर - फोटो : अमर उजाला
आपको शायद इस बात पर यकीन नहीं होगा लेकिन यह बात बिल्कुल सत्य है कि कालेश्वर महादेव को समर्पित यह शिवलिंग दिन में तीन बार अपना रंग बदलता है...
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उत्तर प्रदेश की घाटमपुर तहसील क्षेत्र के सिमौर गांव में कालेश्वर महादेव का मंदिर है। यह वर्षों से लोगों की आस्था का केंद्र है। कहते हैं यहां बना शिवलिंग बेहद अद्भूत है। खैर यह तो व्यक्तिगत आस्था का सवाल है और जैसा कि हम सभी जानते हैं कि आस्था के सामने किसी भी प्रकार के तर्क-वितर्क काम नहीं करते। इसके बावजूद इस रंग बदलने वाले शिवलिंग का रहस्य “कौतुहल और भक्ति” दोनों के लिए अपनी जगह छोड़ जाता है।
 


 

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अपनी विशेष बनावट और पत्थर की विशेषता के चलते यहां बना शिवलिंग सूर्य की रोशनी में दिन मेें तीन बार रंग बदलता सा प्रतीत होता है। यह देखने यहां भक्तगण आते रहते हैं। विशेषकर सावन में मंदिर में दूर-दूर से भक्तगण पूजा अर्चना करने आते हैं।लोगों का मानना है कि शिवलिंग के अलग-अलग रंग में दिखने का अपना अलग अर्थ है। इतना ही नहीं इसे अलग-अलग रंगों में देखने का भी अपना महत्व है। स्थानीय लोगों का मानना है कि शिवलिंग के दर्शन मात्र से ही इंसान की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं और उसके जीवन से दुख दूर हो जाते हैं।
 

 

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विशेषकर अविवाहित लोग जब अपने मनोनुकूल जीवनसाथी की कामना लिए हुए कालेश्वर महादेव के दर्शन करते हैं तो उनकी आकांक्षा बहुत जल्दी पूरी हो जाती है। कानपुर के नजदीक घाटमपुर-गजनेर मार्ग पर सिमौर गांव स्थित है यहां पहुंचने के लिए कस्बा गजनेर (कानपुर देहात) से करीब पांच किलोमीटर पूर्व की ओर चलना पड़ता है। वहीं, घाटमपुर की ओर से जाने के लिए पंद्रह किलोमीटर चलना पड़ता है। मंदिर रोड से चंद कदम की दूरी पर स्थित है। 

 

 

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सिमौर गांव निवासी कमलेश मिश्र व अरुण कुमार मिश्र ने बताया कि मंदिर में स्थापित शिवलिंग काफी पुराना है। सरखेलपुर गांव निवासी पूर्व प्रधान रामबाबू त्रिपाठी व नंदना गांव निवासी पं. रामदत्त त्रिपाठी ने बताया कि शिवलिंग बेशकीमती काले रंग के कसौटी पत्थर से निर्मित है। काफी आकर्षक है। कसौटी व एक अन्य काले पत्थर में सूरज की किरणों के प्रभाव से शिवलिंग के रंग बदलने जैसा भ्रम भी होता है। सावन के सोमवारों में मंदिर में सुबह से शाम तक शिवभक्तों का तांता लगा रहता है।
 

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