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गुरु होंगे 9 से वक्री, मिथुन, कन्या के लिए शुभ
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Mon, 08 Dec 2014 03:14 AM IST
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देव गुरु बृहस्पति 9 दिसंबर की सुबह 10:31 बजे से अपनी उच्च राशि कर्क में वक्री होंगे।
इस गोचर अवधि में जहां मिथुन, कन्या, वृश्चिक, मकर एवं मीन राशि वालों के लिए शुभ फल प्रदान होंगे।
वहीं मेष, वृषभ, कर्क, सिंह, तुला, धनु एवं कुंभ राशि वाले जातकों के लिए प्रतिकूल समय होने की संभावना है।
गुरु के वक्री होने की इस गोचर अवधि में राजनीतिक उथल पुथल हो सकती है। गुरु 9 अप्रैल 2015 को सुबह 7.09 बजे गुरु मार्गी होंगे।
ज्योतिषाचार्य पंडित दीपक पांडेय ने बताया कि जिनकी कुंडली में गुरु अशुभ हो तो गोचराधीन (अवधि) अशुभ को कम करने के कुछ उपाय कर सकते हैं।
जैसे भोजन में केसर का उपयोग करें। साधु, ब्राह्मण एवं पीपल के पेड़ की पूजा करें। गुरुवार के दिन केले के दो पौधे विष्णु भगवान के मंदिर में लगाएं।
पीले रंगों के पुष्पों के पौधे घर में लगाएं। शुभश्री के पंडित उमाशंकर शर्मा का कहना है कि जिस पलंग पर आप सोते हैं उसके चारों कोने में सोने की कील या तार लगाएं।
शुभ मुहूर्त पर किसी धार्मिक स्थल पर गुप्त दान करें। गुरुवार को स्नान के जल में नागरमोथा की जड़ीबूटी मिला लें और फिर स्नान करें।
इस दिन साबुत मूंग मंदिर में दान करें। हल्दी की माला या दक्षिणावर्त शंख दान कर सकते हैं। माता-पिता एवं गुरुजनों का नित आशीर्वाद प्राप्त करें तथा बुजुर्गों की सेवा करें।
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इस गोचर अवधि में जहां मिथुन, कन्या, वृश्चिक, मकर एवं मीन राशि वालों के लिए शुभ फल प्रदान होंगे।
वहीं मेष, वृषभ, कर्क, सिंह, तुला, धनु एवं कुंभ राशि वाले जातकों के लिए प्रतिकूल समय होने की संभावना है।
गुरु के वक्री होने की इस गोचर अवधि में राजनीतिक उथल पुथल हो सकती है। गुरु 9 अप्रैल 2015 को सुबह 7.09 बजे गुरु मार्गी होंगे।
ज्योतिषाचार्य पंडित दीपक पांडेय ने बताया कि जिनकी कुंडली में गुरु अशुभ हो तो गोचराधीन (अवधि) अशुभ को कम करने के कुछ उपाय कर सकते हैं।
जैसे भोजन में केसर का उपयोग करें। साधु, ब्राह्मण एवं पीपल के पेड़ की पूजा करें। गुरुवार के दिन केले के दो पौधे विष्णु भगवान के मंदिर में लगाएं।
पीले रंगों के पुष्पों के पौधे घर में लगाएं। शुभश्री के पंडित उमाशंकर शर्मा का कहना है कि जिस पलंग पर आप सोते हैं उसके चारों कोने में सोने की कील या तार लगाएं।
शुभ मुहूर्त पर किसी धार्मिक स्थल पर गुप्त दान करें। गुरुवार को स्नान के जल में नागरमोथा की जड़ीबूटी मिला लें और फिर स्नान करें।
इस दिन साबुत मूंग मंदिर में दान करें। हल्दी की माला या दक्षिणावर्त शंख दान कर सकते हैं। माता-पिता एवं गुरुजनों का नित आशीर्वाद प्राप्त करें तथा बुजुर्गों की सेवा करें।
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