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21 साल की कानूनी लड़ाई के बाद मिला न्याय, वर्ष 2000 की घटना में तीन साल बाद दोनों आरोपी हो गए थे दोषमुक्त
Sat, 30 Jan 2021 12:57 PM IST
शिखा पांडेय
आशीष अग्रवाल, अमर उजाला, कानपुर
आशीष अग्रवाल, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 30 Jan 2021 12:57 PM IST
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चाकू से हमलाकर घायल करने की 21 साल पुरानी घटना में सेशन से हाईकोर्ट और हाईकोर्ट से फिर सेशन कोर्ट तक कानूनी लड़ाई जारी रही। वर्ष 2003 में जो आरोपी दोषमुक्त करार दे दिए गए थे, हाईकोर्ट के आदेश पर हुई दोबारा सुनवाई में वही आरोपी दोषी साबित हुए।
फास्ट ट्रैक कोर्ट 52 के न्यायाधीश हरेंद्र कुमार ओझा ने हत्या के प्रयास में आरोपी दोनों भाइयों को सात-सात साल कैद और पांच-पांच हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया। जुर्माने से पांच हजार रुपये पीड़ित को क्षतिपूर्ति के रूप में देने के आदेश दिए।
चमनगंज के श्रीनगर निवासी शिवशंकर जायसवाल ने सात अक्तूबर 2000 को हत्या के प्रयास की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि मकान के पीछे रहने वाले भाइयों लाल और रमेश ने उनकी बहन से छेड़छाड़ की थी।
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भाई हरिशंकर ने विरोध किया तो दोनों रंजिश मानने लगे। छह अक्तूबर की रात हरिशंकर घर के बाहर फुटपाथ पर सो रहा था तभी दोनों भाइयों ने चाकू से हमला कर दिया। हरिशंकर 10-12 दिन अस्पताल में भर्ती रहा और ऑपरेशन भी हुआ।
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फास्ट ट्रैक कोर्ट 52 के न्यायाधीश हरेंद्र कुमार ओझा ने हत्या के प्रयास में आरोपी दोनों भाइयों को सात-सात साल कैद और पांच-पांच हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया। जुर्माने से पांच हजार रुपये पीड़ित को क्षतिपूर्ति के रूप में देने के आदेश दिए।
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चमनगंज के श्रीनगर निवासी शिवशंकर जायसवाल ने सात अक्तूबर 2000 को हत्या के प्रयास की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि मकान के पीछे रहने वाले भाइयों लाल और रमेश ने उनकी बहन से छेड़छाड़ की थी।
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भाई हरिशंकर ने विरोध किया तो दोनों रंजिश मानने लगे। छह अक्तूबर की रात हरिशंकर घर के बाहर फुटपाथ पर सो रहा था तभी दोनों भाइयों ने चाकू से हमला कर दिया। हरिशंकर 10-12 दिन अस्पताल में भर्ती रहा और ऑपरेशन भी हुआ।
फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश सुखबीर सिंह राना ने 31 अक्टूबर 2003 को लाल और रमेश को दोषमुक्त करार दिया था। आदेश के खिलाफ वर्ष 2004 में शिवशंकर ने हाईकोर्ट में रिवीजन याचिका दाखिल की।
29 मार्च 2019 को हाईकोर्ट ने दोषमुक्ति के आदेश को खारिज कर दिया और दोनों पक्षों को सुनने के बाद दोबारा आदेश पारित करने के निर्देश दिए। फास्ट ट्रैक कोर्ट 52 में मुकदमे की दोबारा सुनवाई शुरू हुई। वादी के न आने के बाद भी एडीजीसी हरिशंकर शुक्ला ने अभियोजन की ओर से कोर्ट में पक्ष रखा।
उन्होंने बताया कि मुकदमे में चुटहिल हरिशंकर, वादी शिवशंकर समेत सात गवाह और दस अभिलेखीय साक्ष्य कोर्ट में पेश किए गए थे। विवाद के कुल 14 बिंदुओं पर दोबारा सुनवाई की गई। अभियोजन के तर्कों को सुनने के बाद कोर्ट ने दोनों भाइयों को दोषी मानकर सजा सुनाई।
29 मार्च 2019 को हाईकोर्ट ने दोषमुक्ति के आदेश को खारिज कर दिया और दोनों पक्षों को सुनने के बाद दोबारा आदेश पारित करने के निर्देश दिए। फास्ट ट्रैक कोर्ट 52 में मुकदमे की दोबारा सुनवाई शुरू हुई। वादी के न आने के बाद भी एडीजीसी हरिशंकर शुक्ला ने अभियोजन की ओर से कोर्ट में पक्ष रखा।
उन्होंने बताया कि मुकदमे में चुटहिल हरिशंकर, वादी शिवशंकर समेत सात गवाह और दस अभिलेखीय साक्ष्य कोर्ट में पेश किए गए थे। विवाद के कुल 14 बिंदुओं पर दोबारा सुनवाई की गई। अभियोजन के तर्कों को सुनने के बाद कोर्ट ने दोनों भाइयों को दोषी मानकर सजा सुनाई।