फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Justice after 41 years, Grandson punished Babas killers in Unnao, court upheld sentence

नहीं मानी हार...41 साल बाद इंसाफ: पौत्र ने बाबा के हत्यारों को दिलाई सजा, कोर्ट ने सजा रखी है बरकरार

Thu, 08 Jun 2023 10:48 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Thu, 08 Jun 2023 10:48 AM IST
सार

Unnao News: तहरीर में उन्होंने अपने पिता की गोली व धारदार हथियारों से हत्या किए जाने की बात कही थी। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली थी। लगभग एक साल बाद 15 अप्रैल 1983 को तत्कालीन जिला जज ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

विज्ञापन
Justice after 41 years, Grandson punished Babas killers in Unnao, court upheld sentence
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

उन्नाव जिले के अचलगंज कोतवाली क्षेत्र में निचली अदालत से आजीवन कारावास की सजा पाए हत्यारोपियों को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। पिता के हत्यारों को फिर सजा दिलाने की उम्मीद में बेटे की एक सड़क हादसे में मौत हो गई। तो पौत्र ने बाबा के हत्यारों को सजा दिलाने की ठानी।

विज्ञापन

आखिरकार 41 साल बाद न्यायालय ने उसके बाबा के हत्यारों की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी और दस दिन में समर्पण का आदेश दिया है। 17 जून 1982 को शाम पांच बजे मवइया लायक निवासी गौरी शंकर शुक्ल की बाजार से घर लौटते समय बदरका गांव के पास एक बाग में गोली मार कर हत्या कर दी थी।
विज्ञापन

मृतक के पुत्र अशोक कुमार शुक्ल (अब मृत) ने पुलिस को तहरीर देकर बताया था कि वर्ष 1981 में उनके यहां डकैती हुई थी। जिसमें गांव के ही राज किशोर, करुणा शंकर व दो अज्ञात लोगों के शामिल होने की आशंका जताई गई थी। इसी खुन्नस में राज किशोर व करुणा शंकर ने उनके पिता गौरी शंकर की हत्या कर दी।

विज्ञापन
विज्ञापन

गोली मारी...फिर धारदार हथियार से मारा
तहरीर में उन्होंने अपने पिता की गोली व धारदार हथियारों से हत्या किए जाने की बात कही थी। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली थी। लगभग एक साल बाद 15 अप्रैल 1983 को तत्कालीन जिला जज ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

सड़क हादसे में हो गई थी मौत
इसके बाद आरोपियों ने हाईकोर्ट में अपील करते हुए जमानत करा ली थी। तबसे मुकदमा विचाराधीन चल रहा था। इसी बीच 2018 में वादी अशोक कुमार शुक्ल की एक दुर्घटना में मौत हो गई। वह अपने पिता के हत्यारों को सजा दिलाने की हसरत लिए ही दुनिया से चले गए।

दस दिन के अंदर अदालत में समर्पण का आदेश
मृतक के पौत्र अरविंद शुक्ल ने मुकदमे की पैरवी जारी रखी। 30 मई 2023 को हाईकोर्ट ने मामले में फैसला सुनाया। न्यायाधीश अताउर्रहमान मसूदी व सरोज यादव की पीठ ने राजकिशोर और करुणा शंकर की आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी है और दस दिन के अंदर अदालत में समर्पण का आदेश जारी किया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed