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प्यार सरहदों की बंदिशों को नहीं जानता: जर्मनी की जूलिया बनीं गांव के दीपेश की हमसफर, पढ़ें- इनकी लव स्टोरी
Wed, 12 Mar 2025 06:40 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालौन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालौन
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 12 Mar 2025 06:40 PM IST
सार
जर्मनी की जूलिया ने गांव के दीपेश संग सात फेरे लिए। शहर के राठ रोड पर वैवाहिक रस्में हुईं। परिजनों ने आशीर्वाद दिया।
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दीपेश पटेल के साथ शादी के बंधन में बंधी जूलिया
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कहते हैं प्यार सरहदों की बंदिशों को भी नहीं जानता। यह बात जर्मनी से शहर के कपासी गांव पहुंची जूलिया ने साबित कर दी। बुधवार को हिंदू रीति-रिवाज से उन्होंने मूलरूप से कपासी के रहने वाले शिक्षक दीपेश पटेल से शादी की। जर्मनी से आए युवती के परिजन भी इस विवाह के साक्षी बने। दो संस्कृतियों के इस बंधन की खबर सुनकर कई लोग बिन बुलाए भी इस शादी समारोह में शामिल हुए।
उरई से 10 किलोमीटर दूर स्थित कपासी गांव निवासी मानवेंद्र सिंह पटेल मनरेगा में संविदा पर टीए हैं। उनके इकलौते पुत्र दीपेश पटेल ने बनारस हिंदू विश्व विद्यालय से पॉल्टिकल साइंस में मास्टर डिग्री की है। उनके पिता मानवेंद्र ने बताया कि बीएचयू से डिग्री प्राप्त करने के बाद दीपेश, वियतनाम चला गया था। वहां उन्होंने एक साल तक पढ़ाया। इंडोनेशिया व यूएसए में एक कंपनी में काम किया। इसके बाद जर्मनी की कंपनी में काम करने लगे। वहां करीब ढाई साल से रह रहे हैं।
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उरई से 10 किलोमीटर दूर स्थित कपासी गांव निवासी मानवेंद्र सिंह पटेल मनरेगा में संविदा पर टीए हैं। उनके इकलौते पुत्र दीपेश पटेल ने बनारस हिंदू विश्व विद्यालय से पॉल्टिकल साइंस में मास्टर डिग्री की है। उनके पिता मानवेंद्र ने बताया कि बीएचयू से डिग्री प्राप्त करने के बाद दीपेश, वियतनाम चला गया था। वहां उन्होंने एक साल तक पढ़ाया। इंडोनेशिया व यूएसए में एक कंपनी में काम किया। इसके बाद जर्मनी की कंपनी में काम करने लगे। वहां करीब ढाई साल से रह रहे हैं।
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नौकरी के दौरान दीपेश की जूलिया से हुई दोस्ती
जर्मनी में ही नौकरी के दौरान दीपेश की दोस्ती जूलिया से हो गई। दोनों की दोस्ती प्यार में बदल गई। जूलिया ने भारत आना जाना भी शुरू कर दिया। दीपेश और जूलिया के शादी करने के प्रस्ताव को उनके पिता व मां क्रांति ने अनुमति दे दी। जूलिया के परिजनों, रिश्तेदारों को दोनों के रिश्ते से कोई नाराजगी नहीं थी। दोनों ने शादी के लिए सहमति दे दी। रविवार को जूलिया कपासी आ गई। इसके बाद मंगलवार को हल्दी, मेंहदी का कार्यक्रम हुआ। बुधवार को शहर के श्यामा सरोवर होटल में उनका दिन में विवाह संपन्न हुआ। विवाह के दौरान मौजूद परिजनों, दोस्तों व रिश्तेदारों ने उन पर फूलों की वर्षा की।
वर पक्ष ने विवाह समारोह में आए विदेशी अतिथियों का भारतीय व्यंजनों के साथ स्वागत किया। विदेशी मेहमानों ने बताया कि न तो उन्हें हिंदी आती है और न ही भारतीय संस्कृति की कोई खास जानकारी है। इसके बाद भी भारतीय रीति रिवाज में शादी से खुश नजर आए।
जर्मनी में ही नौकरी के दौरान दीपेश की दोस्ती जूलिया से हो गई। दोनों की दोस्ती प्यार में बदल गई। जूलिया ने भारत आना जाना भी शुरू कर दिया। दीपेश और जूलिया के शादी करने के प्रस्ताव को उनके पिता व मां क्रांति ने अनुमति दे दी। जूलिया के परिजनों, रिश्तेदारों को दोनों के रिश्ते से कोई नाराजगी नहीं थी। दोनों ने शादी के लिए सहमति दे दी। रविवार को जूलिया कपासी आ गई। इसके बाद मंगलवार को हल्दी, मेंहदी का कार्यक्रम हुआ। बुधवार को शहर के श्यामा सरोवर होटल में उनका दिन में विवाह संपन्न हुआ। विवाह के दौरान मौजूद परिजनों, दोस्तों व रिश्तेदारों ने उन पर फूलों की वर्षा की।
वर पक्ष ने विवाह समारोह में आए विदेशी अतिथियों का भारतीय व्यंजनों के साथ स्वागत किया। विदेशी मेहमानों ने बताया कि न तो उन्हें हिंदी आती है और न ही भारतीय संस्कृति की कोई खास जानकारी है। इसके बाद भी भारतीय रीति रिवाज में शादी से खुश नजर आए।