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30 मार्च को दिए एक करोड़, 31 को ले लिए
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Thu, 16 Apr 2015 03:13 AM IST
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जेके कैंसर संस्थान रावतपुर में व्यवस्थाओं को लेकर हाईकोर्ट की फटकार के बाद भी सरकार का लापरवाही भरा रवैया सामने आया है। कई बार मशीनों के लिए भेजे गए प्रस्ताव के बाद शासन ने एक करोड़ रुपये तो जारी किए, लेकिन 30 मार्च को। कंपनियों से कोटेशन मांगने को एक दिन का समय दिया गया।
इतनी जल्दी व्यवस्था न बन पाई तो 31 मार्च को वित्तीय वर्ष के आखिरी दिन एक करोड़ रुपये वापस चले गए। यह अलग बात है कि रुपये वित्त विभाग को वापस न होकर महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा (डीजीएमई) के पर्सनल लेजर अकाउंट (पीएलए) में जमा हो गए हैं। ऐसे में मशीनों की खरीद का मामला फिर अटक गया है।
जेके कैंसर संस्थान में व्यवस्था को लेकर जनहित सेवा संस्थान ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने सरकार को फटकार लगाई है और डीजीएमई पर भी जुर्माना किया हुआ है। हाईकोर्ट ने बजट देकर जेके कैंसर संस्थान में सुविधाओं की बहाली को कहा है।
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वित्तीय वर्ष समाप्त होने के एक दिन पहले 30 मार्च को एक करोड़ रुपये का बजट मिला। ट्रेजरी से इसकी सूचना डायरेक्टर डॉ. एमपी मिश्र को दी गई। उनसे कहा गया कि तत्काल मशीनों की सप्लाई करने वाली कंपनियों से बात की जाए। डॉ. मिश्र ने अपने स्तर से काफी प्रयास किए, लेकिन किसी कंपनी वाले ने वित्तीय वर्ष के आखिरी दिन इस संबंध में कोई बात नहीं की। नतीजा हुआ कि रुपये वापस करने पड़े।
जेके कैंसर के डायरेक्टर डॉ. एमपी मिश्र ने कहा कि बजट डीजीएमई के पीएलए में जमा हो गया है। यह अकाउंट केजीएमयू लखनऊ में होता है। बजट वापस नहीं गया है।
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इतनी जल्दी व्यवस्था न बन पाई तो 31 मार्च को वित्तीय वर्ष के आखिरी दिन एक करोड़ रुपये वापस चले गए। यह अलग बात है कि रुपये वित्त विभाग को वापस न होकर महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा (डीजीएमई) के पर्सनल लेजर अकाउंट (पीएलए) में जमा हो गए हैं। ऐसे में मशीनों की खरीद का मामला फिर अटक गया है।
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जेके कैंसर संस्थान में व्यवस्था को लेकर जनहित सेवा संस्थान ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने सरकार को फटकार लगाई है और डीजीएमई पर भी जुर्माना किया हुआ है। हाईकोर्ट ने बजट देकर जेके कैंसर संस्थान में सुविधाओं की बहाली को कहा है।
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वित्तीय वर्ष समाप्त होने के एक दिन पहले 30 मार्च को एक करोड़ रुपये का बजट मिला। ट्रेजरी से इसकी सूचना डायरेक्टर डॉ. एमपी मिश्र को दी गई। उनसे कहा गया कि तत्काल मशीनों की सप्लाई करने वाली कंपनियों से बात की जाए। डॉ. मिश्र ने अपने स्तर से काफी प्रयास किए, लेकिन किसी कंपनी वाले ने वित्तीय वर्ष के आखिरी दिन इस संबंध में कोई बात नहीं की। नतीजा हुआ कि रुपये वापस करने पड़े।
जेके कैंसर के डायरेक्टर डॉ. एमपी मिश्र ने कहा कि बजट डीजीएमई के पीएलए में जमा हो गया है। यह अकाउंट केजीएमयू लखनऊ में होता है। बजट वापस नहीं गया है।